लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- पावनि तिहारमे महिलाक योगदान
मिथिलामे मौसमके अनुसार सभ मासमे सभरंग पावनि होइत अछि।एहि पावनिक जिवंत रखबामे महिला सभके बहुत बरका योगदान रहैत छैन, स्त्री बिनु कोनहुँ पावनि तिहार,कोनहुँ शुभ अशुभ काजमे विध बेवहार आ धार्मिक,अध्यातमिक,परिवारिक समाजिक लगाव असंभव अछि।
जखन कोनहुँ पावनि आबवला रहैत अछि त’ महिला सभ किछु दिन पहिने सँ ओकर तैयारीमे लाइग जाइत छथि। ओ परिवारक लेल कपड़ा लत्ता सँ लक नुवा लहठी सभहक जोगार क्षमतानुसार करैत छथि। पावनि सँ एक दिन पूर्वे घर आंगन सुचिता सँ निप पोति पवित्र बना कए रखैत छथि आ पावनि दिन ठांउ कए शुरू भ’ जाइत छथि ओकर जोगार मे।
अप्पन मिथिलामे पावनिक बड्ड महत्त्व होइत अछि। समयानुकूल सभ पावनिमे सभरंग पूरी पकवान बनैत अछि आ ई सहेज कए रखनाइ मात्र एकटा महिले सँ संभव होइत अछि। कारण ई पावनि मात्र पर्व नञि अपितु अपन संस्कृति संस्कारक आइना देखबैत अछि। हरेक पावनिक अपन एकटा किस्सा आ कोनहुँ राज नुकाएल रहैत अछि।
स्त्री जाति जन्मे सँ सहनशीलत मानल जाइत छथि। ओ बेर पर बजबो करती मुदा अपन संस्कृति सँ जुरल सभ पावनिके अक्षुण्ण रखबाक प्रयास सेहो करती आ सम्हारि सेहो नीक सँ लै छथि।
पावनि तिहारमे मात्र महिलाक योगदान सिमित नञि अपितु जतेक घरमे नीक वेजाय काज होइत अछि सभमे हुनकर बहुत बेसी योगदान रहैत छैन। जन्म सँ लक मरन तक, मुण्डन, उपनायन सँ लक विवाह पूजा पाठ तक ओ अपना आपके तन मोन धन सँ समर्पित क’ दैत छथिन। कोनहुँ पावनि तिहार नीक सँ सम्पन्न करबामे अपन एड़ी चोटी एक क’ दैत छथिन। पावनि त’ एहन जे ओ संततिक जीवन रक्षा लेल ३०/ ४० घंटा धरि निर्जला जितिया व्रत सेहो क’ लैत छथि। छठी पावनि सन कठिन व्रत सेहो करैत छथि। ओ संतानक रक्षा रहैक वा पतिक दिर्घायु रहबाक लेल व्रत पूजा सभ खुशी पूर्वक करैत छथि। साउस ससुरके परमधाम गेला पर तेरह दिन तक अनोन खाए सभ विध कार्य नियम निष्ठा सँग करैत छथि। महिला की छथि ई कहनाई महिला लेल सेहो असंभव अछि।
निष्कर्ष ई जे मिथिलाक पावनि तिहार महिलाके योगदानक फलस्वरूप एखन धरि जिवंत अछि। ओ अपन मिथिलाक हरेक पावनिमे उद्धारक संग अपन कर्तव्यक निर्वाहन करैत, कोबर ,मारब,अरिपन,गीतनाद,खोंइछ, सिंदूर, धसा, महावर, मेंहदी सभकें समेटने संजोगने तत्परता पूर्वक निबाहैत छथि।
