लेख विचार
प्रेषित: आभा झा अद्विका
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
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विषय :– युवा लोकनिक भविष्य निर्माणमे सिनेमाक रचनात्मक योगदान
आजुक युग सूचनाक युग कहल जाइत अछि। एहि युगमे सिनेमा केवल मनोरञ्जनक माध्यम नहि रहल, बल्कि शिक्षा, संस्कार, प्रेरणा आ समाज परिवर्तनक प्रभावशाली साधन बनि गेल अछि। विशेष रूपसँ युवा वर्ग सिनेमासँ बेसी प्रभावित होइत अछि। युवा जीवनमे जे देखैत छथि, सुनैत छथि आ अनुभव करैत छथि, ओकर प्रभाव हुनक सोच आ व्यवहार पर पड़ैत अछि। ताहि लेल आवश्यक अछि जे सिनेमा युवाकेँ सही दिशा देखाबय।
युवा राष्ट्रक आधारशिला छथि। हुनक विचार, चरित्र आ कर्म पर देशक भविष्य निर्भर करैत अछि। यदि सिनेमा सकारात्मक संदेश दैत अछि, तऽ युवा अपन जीवनमे संघर्ष, परिश्रम, अनुशासन, ईमानदारी आ आत्मविश्वासकेँ अपनाबैत छथि। एहन फिल्म जे कठिन परिस्थितिमे सफलता, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक सेवा, महिला सम्मान, राष्ट्रभक्ति आ मानवीय मूल्यकेँ प्रस्तुत करैत अछि, ओ युवा पीढ़ीकेँ नव ऊर्जा प्रदान करैत अछि।
सिनेमा कल्पनाक संसार होइतहुँ वास्तविक जीवनक अनेक समस्याकेँ जनमानसक समक्ष आनैत अछि। किसानक पीड़ा, सैनिकक बलिदान, शिक्षाक महत्त्व, पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचारक विरोध, नशामुक्ति, बेटी शिक्षाक आवश्यकता आ सामाजिक समानता जेकाँ विषय युवाकेँ सोचबाक लेल प्रेरित करैत अछि। एहि प्रकार सिनेमा मनोरञ्जनक संग समाजकेँ जागरूक करबाक काज सेहो करैत अछि।
सिनेमाक माध्यमसँ विभिन्न संस्कृति, भाषा आ परम्पराक परिचय होइत अछि। युवा अपन देशक विविधताकेँ बुझैत छथि आ “एकता मे अनेकता” केर भावकेँ आत्मसात करैत छथि। एहन सोच लोकतांत्रिक समाजकेँ सशक्त बनबैत अछि। जखन युवा भेदभाव छोड़ि मानवीय दृष्टिकोण अपनाबैत छथि, तखन राष्ट्रक विकासक गति तेज होइत अछि।
तथापि, सिनेमाक नकारात्मक पक्षसँ आँखि मूँदि कऽ नहि रहल जा सकैत। किछु फिल्म हिंसा, अपराध, नशा, अश्लीलता आ त्वरित सफलताक मिथ्या सपना प्रस्तुत करैत अछि। यदि युवा बिना विवेक एहि सभकेँ अपनाबऽ लगथि, तँ ओ अपन लक्ष्यसँ भटकि सकैत छथि। ताहि लेल आवश्यक अछि जे सिनेमा देखैत समय सही-गलतक विवेक बनल रहय। मनोरञ्जनकेँ जीवनक आदर्श नहि बनाओल जाए।
फिल्म निर्माता लोकनिक सेहो सामाजिक दायित्व अछि। हुनका एहन कथा प्रस्तुत करबाक चाही जाहिसँ युवामे नैतिकता, संवेदना, सहिष्णुता, श्रमक सम्मान आ देशप्रेमक भावना जागृत हो। केवल व्यावसायिक लाभ लेल एहन सामग्री प्रस्तुत करब जे समाजकेँ गलत दिशा दए, ओ उचित नहि अछि। समाजकेँ दिशा देब कलाकारक सेहो नैतिक उत्तरदायित्व अछि।
अभिभावक आ शिक्षकक भूमिका सेहो महत्त्वपूर्ण अछि। युवाकेँ केवल सिनेमा देखबाक स्वतंत्रता नहि, बल्कि ओहिमे निहित संदेश बुझबाक संस्कार सेहो देबाक आवश्यकता अछि। जखन परिवार, विद्यालय आ सिनेमा सभ मिलिकऽ सकारात्मक वातावरण बनाबैत अछि, तखन युवा सशक्त चरित्रक निर्माण करैत छथि।
अन्ततः, सिनेमा एक शक्तिशाली साधन अछि। एकर उपयोग ज्ञान, प्रेरणा आ राष्ट्रनिर्माण लेल हो, तँ युवा पीढ़ी उज्ज्वल भविष्य गढ़ि सकैत अछि। मुदा यदि एकर दुरुपयोग हो, तँ ओ समाजकेँ भ्रमित सेहो कऽ सकैत अछि। अतः आवश्यक अछि जे युवा विवेकपूर्ण दृष्टिसँ सिनेमा देखथि, सकारात्मक संदेश ग्रहण करथि आ अपन प्रतिभाकेँ समाजक हितमे समर्पित करथि।
“युवा जँ सिनेमासँ केवल मनोरञ्जन नहि, बल्कि संस्कार, प्रेरणा आ जीवनक सही दिशा ग्रहण करथि, तँ ओ अपन भविष्यक संग-संग राष्ट्रक भविष्य सेहो उज्ज्वल बना सकैत छथि।”
