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नवरात्रि नवचेतना केर संचार करैत अछि

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लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय : आस्था, आत्मशुद्धि आऽ नवजीवनक उत्सव “चैत्र नवरात्र”

मिथिलाक सांस्कृतिक परम्परा में नवरात्र केवल एक पाबनि नहि, बल्कि आत्मा के जागरण, शक्ति के आराधना आऽ जीवन के नवसंस्कारक महापर्व अछि। चैत्र मास मे आरम्भ होमयवाला ई नवरात्रि, प्रकृति के नवोदय संगे मानव हृदय मे नवचेतना के संचार करैत अछि। जखन धरती पर नवांकुर फूटैत अछि, आम्र-मंजर महकैत अछि, कोयल कुहुकैत अछि तखन मानू सृष्टि स्वयं देवी शक्ति के स्वागत मे सजि उठैत अछि।
चैत्र नवरात्र विशेष रूप सँ आदिशक्ति के नौ रूप शैलपुत्री सँ सिद्धिदात्री धरि के आराधना के समय अछि। ई नौ दिन केवल बाह्य पूजा नहि, बल्कि आन्तरिक साधना, संयम, श्रद्धा आऽ आत्मावलोकन के यात्रा सेहो अछि।
चैत्र नवरात्रि, जीवन के मूल तत्व शक्ति के स्मरण कराबैत अछि। शक्ति के बिना सृष्टि निष्प्राण अछि, आऽ शक्ति के बिना मनुष्यक जीवन सेहो अपूर्ण। ई पाबनि हमरा सिखबैत अछि जे शक्ति केवल बाह्य पराक्रम नहि, बल्कि धैर्य, करुणा, सहिष्णुता आऽ आत्मसंयम के नाम अछि।
नवरात्रि के नौ दिन साधक अपन भीतर के नकारात्मक प्रवृत्तिसँ संघर्ष करैत अछि। काम, क्रोध, लोभ, मोह आऽ अहंकार ई सभ अन्धकार के रूप छथि, जनिका पर विजय प्राप्त कऽ मानव ‘विजयादशमी’ के दिशा मे अग्रसर होइत अछि।
उपवास, जप, ध्यान आऽ देवी स्तुति ई सभ साधन मन आऽ शरीर के शुद्ध करैत अछि। जखन मन संयमित होइत अछि, तखन आत्मा के प्रकाश स्वतः प्रकट होइत अछि।
चैत्र नवरात्रि के एक विशेषता ई सेहो अछि जे ई समय प्रकृति आऽ मानव के गहीर सम्बन्ध के अनुभव कराबैत अछि। खेत-खरिहान में हरियरी, वातावरण में मधुरता आऽ आकाश मे निर्मलता ई सभ जीवन के सकारात्मक ऊर्जा सँ भरि दैत अछि।
आध्यात्मिक दृष्टि सँ देखल जाए तऽ नवरात्रि ‘आत्मा के नवजीवन’ के पाबनि अछि। जाहि प्रकार धरती पर बीआ अंकुरित होइत अछि, तहिना साधना सँ मानव के भीतर सद्गुण अंकुरित होइत अछि।
अन्ततः, चैत्र नवरात्रि केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहि अछि, बल्कि जीवन के दिशा बदलए वाला एक गहन आध्यात्मिक अवसर अछि। ई पाबनि हमरा स्मरण कराबैत अछि जे सत्य विजय बाह्य संसार पर नहि, बल्कि अपन भीतर के अज्ञान आऽ विकार पर होइत अछि।
जखन हम श्रद्धा, संयम आऽ समर्पण के संग देवी शक्ति के आराधना करैत छी, तखन हम अपन जीवन के अधिक संतुलित, शांत आऽ अर्थपूर्ण बना सकैत छी।
अतः, ई नवरात्रि हमरा सभक लेल एक नव संकल्प बनय अंधकार सँ प्रकाश दिस, दुर्बलता सँ शक्ति असंतुलन सँ समरसता दिस अग्रसर होयबाक।

आयल नवरात्रि, नव प्रभात,
मंगल गूंजय घर-आँगन बाट।
माँ दुर्गा के चरणन में,
झुकय श्रद्धा भरल हर ठाठ॥
भक्ति के दीप जरय अंतर्मन,
मिटय अज्ञान के अन्हार,
माँ के कृपा सँ फलय जीवन,
सुख-शांति रहय आजीवन।

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