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मैथिली भाषा-साहित्य, फिल्म, संचार एवं मंच उद्घोषक किसलय कृष्ण केँ मातृशोक

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१७ मार्च २०२६, मैथिली जिन्दाबाद !!

हम मानव लेल माय समान अनमोल सम्बन्ध आर किछु नहि । अनिवार्य ईश्वरक श्रेणी सर्वप्रथम माताक स्थान होइत छन्हि । प्रिय किसलय कृष्णक माताश्री प्रभा देवीक स्वर्गवास ११ मार्च २०२६ केँ भ’ गेलन्हि । समय-समय पर पुत्र आ माताक सन्दर्भ अनेकन सामग्री सब सामाजिक संजाल मार्फत हमरा लोकनि देखैत आबि रहल छलहुँ, अचानक स्वर्गवासी हेबाक समाचार क्षुब्ध करयवला छल ।

पता चलल जे अचानक बीमार भ’ अस्पताल मे भर्ती भेलथि, किछु समय अथक चेष्टा-उपचारक बावजूद ओ एहि इहलोक सँ परलोक सिधारि गेलथि । ओ ८५ वर्षक आयु मे हमरा सब केँ छोड़िकय चलि गेलिह । विदित हो जे बस एक-डेढ़ वर्ष पूर्व पिताजीक देहान्त भ’ गेल छलन्हि, तदोपरान्त अपन जन्मों-जन्मक सम्बन्ध केँ निभेबाक लेल माताश्री सेहो जल्दिये चलि गेलथि एना अनुभूति भ’ रहल अछि ।

माँ प्रभा देवी एक शिक्षित, सम्भ्रान्त, सुसंस्कृत मिथिला नारी रहथि । हुनक जन्म (पैतृक गाम) बनगाँव (सहरसा) लेकिन शिक्षा-दीक्षा मातृक भवानीपुर (नवगछिया, भागलपुर) मे भेल छलन्हि । पंडित गणपति झा जे संस्कृत विद्यालय, कर्णगढ़ (भागलपुर) मे शिक्षक रहथि हुनक सुपुत्री छलिह । हिनक शिक्षा संस्कृत माध्यमसँ भेल छलन्हि । ओ आजीवन आध्यात्मिक आ स्वाध्यायी बनल रहलिह । पैछला ५० वर्ष सँ मासिक पत्रिका “कल्याण” मंगाकय पढ़ैत रहलिह । मैथिली आ हिन्दीक शताधिक पोथी पढ़बाक कार्य कय चुकल छलिह ।

किसलयजी संग चर्चा मे पता चलल जे मृत्यु सँ मात्र तीन दिन पूर्व यानि ८ मार्च कें केदार कानन लिखित ‘कोसिकन्हाक चिट्ठी’ पढ़िकय सम्पन्न कएने रहथि । सैकड़ों गीत, श्लोक आ तुलसीकृत् रामचरितमानसक ‘सुन्दरकाण्ड’ पूर्ण कण्ठस्थ छलन्हि ।

घरक समस्त दायित्व केँ पूर्ण कुशलता सँ निभबैत प्रभा देवी शिक्षक पति कृष्ण वल्लभ ठाकुर संग सादगीपूर्ण जीवन बितौलनि । पति कृष्ण वल्लभ ठाकुर मैथिली सँ स्नातक कय १९६५ सँ १९६९ धरि मध्य विद्यालय, कुनौली बाजार मे शिक्षण कयलनि । तदोपरान्त १९६९ सँ १९९८ धरि उर्दू मध्य विद्यालय, मझौल मे शिक्षक रहि प्रधानाध्यापक पद पर सेवा प्रदान करैत सेवानिवृत्त भेल छलाह तथा ९ मई २०२३ केँ हुनक देहावसान भ’ गेल छलन्हि ।

हमरा मोन पड़ैछ, किसलयजी ओतय प्रथम भतीजीक विवाह मे नवहट्टा गेल रही ताहि समय पिताश्री शय्या धय लेने रहथि । माताश्री एकदम भला-चंगा, गोर लागि प्रणाम करैत आशीर्वाद ग्रहण कएने रही । पिताश्री आजीवन अनुशासन प्रिय आ आध्यात्मिक चेतनासम्पन्न व्यक्तित्व रूप मे सम्पूर्ण क्षेत्र मे आदरणीय रहलाह ।

हिनका लोकनि द्वारा मानव संसार मे तीन गोट सम्भ्रान्त, सुशिक्षित आ सुसंस्कृत सुपुत्र एवं दुइ सुपुत्री सौंपल गेल अछि । जेठ पुत्र प्रमोद ठाकुर केर शिक्षा बी. ए. (प्रतिष्ठा) आ पेशा प्राइवेट स्कूल शिक्षक तथा कर्मकाण्डक पण्डित, तहिना माझिल पुत्र संजय ठाकुर केर शिक्षा एम.ए. तथा बी.एड. एवं पेशा राजकीय मध्य विद्यालय, एकाढ़ (सहरसा) मे शिक्षक, तिनका सँ छोट पुत्री नूतन जे सपरिवार ३० वर्ष सँ मुम्बई मे सपरिवार रहि रहल छथि, हुनका सँ छोट पूनम जे कि स्वास्थ्य विभाग, महिषी मे कार्यरत छथि, आर सब सँ छोट किसलय कृष्ण जिनक शिक्षा एम.ए. (दिल्ली विश्वविद्यालय) आ पेशा मैथिली-मिथिलाक काज लेल पूर्ण समर्पित – मल्टिपल टैलेन्ट सहित अपन फुल टाइम योगदान भाषा-साहित्य, संस्कृति, संचार, फिल्म आदि लेल दय रहल छथि, एकटा फ्रीलांशर शैली मे पत्रकारिता संगहि शोधकार्य मे सेहो निपुण छथि ।

आगाँक पीढ़ी मे छह गोट पोती आ तीन गोट पोताक संगहि नाति-नातिन सब सँ परिपूर्ण परिवारक जनक प्रभादेवी-कृष्णवल्लभ केर स्वर्ग मे वास होइन्ह । सम्पूर्ण परिवार पर कृपा बनेने रहथि । परमात्माक कृपा स्वर्गलोक मे हिनको सब पर बनल रहय । जीवनक सदुपयोग केना कयल जाइछ, तेकर उदाहरण हिनका लोकनि मे हमरा सब सेहो देखैत आदर्शपथ आ अनुशासनक संग अपन-अपन जीवन सफल करैत रही यैह कामना करैत छी ।

हरिः हरः!!

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