पोपगिरी करब छोड़ि मैथिलीक शक्तिवर्धनक कार्य जरूरी
सन्दर्भः मैथिली अकादमीक निष्क्रियता – औफिस पर ताला – पुनर्संचालनक बात
विगत किछु समय सँ विराटनगर मे “अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन-२०२५” केर आयोजन मे संलिप्तताक कारण बहुते रास ‘मैथिली बात’ सब आंशिक तौर पर देखितो स्वयं केँ चुपचाप रखने रही । आब कनेक आफियत भेटल त किछु लिखि रहल छीः
१. मैथिली अकादमी – एक अत्यन्त महत्वपूर्ण राज्य-प्रदत्त उपक्रम थिक । १९७६ मे स्थापित अकादमी मैथिली भाषा-साहित्य, शिक्षा, रोजगार संग लोकसंस्कृतिक अनेकों श्रुति आधारित मौखिक साहित्य केँ पर्यन्त लिपिबद्ध व डिजिटल रेकर्डिंग करबेलक । मुदा क्रमिक रूप सँ ई शिथिल होइत चलि गेल अछि । कियैक ? कियैक तँ हमरा लोकनि पदक होड़ मे संस्था केँ ओझरेने छी, काजक कोनो होड़ कतहु नहि भ’ रहल अछि । पोपगिरी मात्र होइत अछि संस्थाध्यक्ष लोकनिक, आ कनी टा काज होइते श्रेय लूटबाक होड़ मचि जाइछ अक्सर । एहि खतरनाक आत्ममुग्धताक स्थिति सँ बहरेनाय बड जरूरी छैक । जमीनी सत्य केँ नकारिकय अपन बाहरी आवरण पर चमक-दमक देखेला सँ किछु लोक भले किछु समय लेल नामार्जित कय लेब, मुदा दीर्घकाल मे एकर कोनो माइन-मोजर नहि रहि जायत, मरि जायब, कियो श्रद्धाञ्जलियो तक नहि देत । सावधान होउ । पोपगिरी छोड़िकय जमीन पर उतरि मैथिलीक रक्षार्थ जमीनक लोक केँ सक्रिय बनेनाय परमावश्यक छैक ।
२. मैथिली ठाकुर वर्सेज मिथिला मिरर – ललित नारायण जी द्वारा स्थापित-संचालित मिथिला मिरर पर मैथिली ठाकुर द्वारा व्यक्तिगत कथ्य-तथ्य केँ सार्वजनिक कयल जेबाक आधार पर स्ट्राइक केर मामला बड़ा जोर सँ अभरल छल । एलकेजे समूह अर्थात् जे मात बात पदेनाय जनैत अछि सेहो सब बड एक्टिव भ’ कय सामाजिक संजाल पर घिनेबाक कार्य करैत देखायल । चुनाव मे टिकट भेटलैक मैथिली केँ सेहो कतेको केँ अपच भेलैक, कतेको लोक कतेको तरहक रद्द-दस्त सरेआम सामाजिक संजाल पर करैत देखायल । आब मैथिली दिश सँ किछु एक्शन लेल गेलैक तेँ मिथिला मिरर बन्द भ’ गेलैक सेहो सब बात आयल संजाल पर । गुम्मा महादेव सभक जागृति सेहो देखय लेल भेटल, फेसबुक लाइव द्वारा, विचार द्वारा आ अनेकों समीक्षा-विश्लेषण-आकलन-व्यकलन सब द्वारा काठमांडू सँ कलिंगाक राजधानी धरि, काश्मीर सँ कन्याकुमारी धरि… गुम्मो लोक सब चुम्मो-चुम्मो करय त बुझू ‘अच्छे दिन’ मैथिलीक आबि गेल । हमर दुइ टूक कहब अछि जे आपस मे समन्वय बढ़ेबाक चेष्टा हो, टेढ़ी देखेला सँ वैमनस्यता बढ़िते जायत आ एहिना एक-दोसरक अहित करैत रहब । खास कय केँ मिथिला के बाभन देवता सब अपन एहेन कमजोरी पर आत्मचिन्तन करैत एक-दोसर केँ डाउन शो करब बन्द करथि । एहि सँ बेसी हम किछु नहि कहब । बेटी मैथिली आब जनप्रतिनिधिक जिम्मेदारी मे छथि, गम्भीर काज दिश ध्यान देथि । एहि सब तरहक झिना-मसिना बात सब मे नहि ओझराइथ, हुनकर स्वास्थ्य आ भविष्य दुनू लेल नीक रहतनि । ललित जी सेहो निरपेक्ष संचारकर्म करथि, आपसी वैमनस्यता बढ़ेबाक कोनो तरहक विश्लेषण आ गैर-जरूरी सम्पादकीय भूमिका निभेबाक जरूरत नहि । एहि बीच ओ काफी गम्भीर काज सब करय लागल रहथि, मुदा मैथिली चुनाव प्रकरण सँ किछु अनावश्यक टिप्पणी-टीका मे पड़लाह आ आइ प्रतिशोधक भावना सँ मैथिली वर्सेज ललित भ’ रहल अछि, जे केकरो नीक नहि लागि रहल छैक ।
३. विभिन्न आयोजनक सन्दर्भ मे – मैथिलीक आयोजन मे छरे-छाँट एकल जातिक सहभागिता सँ इतर सर्वजातीय समिति, कार्यक्रम संयोजन दल, सहभागी विमर्शी, दाता-सहयोगी सभक खोज आ जोड़ संस्थाध्यक्ष सब पर निर्भर करैछ । भारतक एकटा पैघ संस्थाक कार्यकारिणी समितिक नामावली प्राप्त भेल, देखल जे लगभग ५० गोटेक नाम ओहि मे समावेश छल, मुदा लाखों सामान्य मैथिल समुदायक कोनो खास प्रतिनिधित्व, समावेश, सहभागिता कतहु नहि देखायल । यैह सब कारण सँ मैथिली कहीं एक्के-दुए जातिक त नहि थिक – ई सब सन्देह आम आदमी, कम पढ़ल-लिखल आदमी, सामान्य वर्ग मे सन्देह उत्पन्न करैत छैक । आर तेँ, संख्या पर संचालित लोकतंत्र मे मैथिली मात्र अल्पसंख्यक केर भाषा बनि जेबाक कारण राजनीतिक दृष्टि सँ कमजोर भेल जा रहल अछि । यथार्थ एकर ठीक विपरीत छैक, उच्च जातिक लोकक घर सँ लगभग ९५% मैथिली गायब छैक से सब मंच पर ठोप-चानन कय पोपगिरी करैत देखाइछ, आर जेकर घरो मैथिली व बाहरो मैथिली से सब मंच सँ नीचों नहि बल्कि अत्यन्त दूर रहबाक कारण उपेक्षित भाव मे मैथिली सँ फराक होयबाक हीनताबोधक भाव मे…. आब कहू ? एना हेतैक मैथिलीक कल्याण ?
आर बात मोन पड़त त बाद मे कहब-लिखब ! अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन २०२५ ईश्वरक असीम दया सँ सम्पन्न भेल । समग्र प्रतिवेदन उपरान्त पूर्ण प्रतिवेदन शीघ्र जारी करब ।
प्रणाम !
हरिः हरः!!
