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रोशनी झा (जनकपुर) – हत्या या हादसा ?

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रोशनी झा (जनकपुर) हत्या या हादसा ?

– प्रवीण नारायण चौधरी, सम्पादक, मैथिली जिन्दाबाद!!

विराटनगर, ४ दिसम्बर २०२५ ।

  • अपडेट व सामाजिक विमर्श
  • हत्याक आरोप मे पति प्रशान्त मिश्र पुलिस हिरासत मे, पिता पहिनहिं गिरफ्तार
  • समाज मे जबर्दस्त प्रतिक्रिया – क्षोभ
  • सामाजिक संस्था सब द्वारा निरन्तर विरोध प्रदर्शन आ रोशनी लेल न्याय केर मांग
  • पोस्टमार्टम मे गड़बड़ीक आशंका
  • दोषी पक्ष पर पैसा बले पोस्टमार्टम मे आत्महत्याक निष्कर्ष – शरीर पर चोटक निशानक बात सेहो उल्लेखित करबाक सम्बन्धित अस्पतालक स्पष्टीकरण
  • पुलिस प्रशासन पर केस कमजोर बनाकय आरोपी केँ बचेबाक आशंका
  • जनकपुर संचारकर्मी समुदायक सजगता सँ पुलिस प्रशासन पर निष्पक्ष छानबीन करबाक दबाव

मृतक रोशनी झा – नवविवाहिता दुल्हिन रूप मे (फोटोः साभार फेसबुक)

जनकपुर मे घटित घटना मे एकटा युवती रोशनीक हत्या या हादसाक परिप्रेक्ष्य मे सामाजिक संजाल पर चर्चा तीव्र होयब स्वाभाविक अछि । काल्हि एहि सन्दर्भित किछु विचार, दहेज मुक्त मिथिलाक किछु स्टैन्ड आदि पर जनतब देनहि रही । आगाँक रिपोर्ट (अपडेट) ई अछि जे लड़का आ लड़काक पिता पुलिस हिरासत मे अछि, पुलिसक अनुसन्धान जारी छैक । स्थानीय पत्रकार लोकनिक दबाव पर पुलिस प्रशासन द्वारा अधजरल अवस्थाक साक्ष्य सभक अवहेलना करबाक सन्दर्भ मे आइ फेर पुलिसक दल घटनास्थल पर जा कय साक्ष्य सभक संकलन (निरीक्षण) कार्य कयलक अछि ।

नेपाल प्रहरी मे पड़ल जाहेरीक प्रथम पृष्ठ – नेपाली भाषा मे किटानी जाहेरीक अर्थ होइछ आरोपित सभक नाम लय केँ कयल गेल शिकायत – उजुरी

विदित हो जे लड़काक बदलैत बयान आ उपलब्ध साक्ष्य सभक आधार पर आम धारणा यैह बनल अछि जे ई कोनो हादसा नहि, बल्कि हत्या थिक । काफी रास इनसाइड स्टोरी सब बाहर आबि रहल अछि । यथा लड़का मे धनार्जनक तीव्र महात्वाकांक्षा, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत केर कथासार, ताहि मे ससुरारिक लोक सब सँ लाखों टका पैंच-उधार, ताहि पर सँ विवाहेतर प्रेम सम्बन्धक सन्देह, एहि सब विन्दु पर धर्मपत्नी द्वारा पति पर लगाम लगेबाक प्रयास मे आपसी अनबन होयब आ दुर्घटना घटित होयबाक दुष्परिणाम सोझाँ आयब – बाद मे लड़का द्वारा बहिन-बहिनोइ (डाक्टर) आदिक सहयोग सँ दुर्घटनावश घटित ‘हत्या’ सँ उमकबाक प्रयास आदिक यथास्थिति चर्चा मे अछि । रोशनीक दुइ बच्चा – जेठ बेटा लगभग ४ वर्षक, एक बेटी लगभग २ वर्षक हाल रोशनीक सासुर परिवारहि केर संरक्षण मे अछि । आरोपी हत्यारा पतिक बहिन एवं परिजन सब सेहो अपन बचाव मे तर्क आ स्पष्टीकरण राखल जेबाक स्थिति अछि, परञ्च चोरक मुँह चान सन – लड़काक अबस्था सँ लोकमत ‘हत्या’ केर घटना मानिकय चलि रहल अछि । बाकी, पुलिस अनुसन्धान आ नेपालक न्याय प्रणाली अनुरूप आगाँ जे किछु होयत से हेबाक अपेक्षा लोक रखैत अछि ।

सामाजिक विमर्शः दहेजक कारण हत्या या हादसा

आमतौर पर कोनो निरीह स्त्रीक हत्या होइते यैह कल्पना कयल जाइछ जे दहेजलोभी लड़का व ओकर परिजन दहेजक मांग पूरा नहि कयल जेबाक कारण केकरो बेटी केँ मारि दैत अछि । रोशनी झा प्रकरण मे सेहो यैह बात पर आमलोकक शंका गेनाय कोनो अस्वभाविक नहि । मिथिलाक भारतीय भूभाग मे सेहो एहि घटना सँ आम लोक मे आक्रोश अछि । दोषी केँ कड़ा दण्ड भेटय समाजक यैह मांग अछि ।

जँ अपराधी (हत्यारा) केँ दोषमुक्त कय देल जायत त समाज मे गलत सन्देश जायत । ओहिना आइ-काल्हि बेटीवला सब बिना बेटीक सहमति लेने विवाह करय लेल हड़बड़ नहि करैत विवाहक उमेर बदलि गेल अछि । आब वरक विवाह नहि, वराँठोक विवाह नहि, बौलिवूड जेकाँ ‘झराँठ’ सभक विवाह होबय लागल अछि । कनियो सब कनियाँठ भेला उपरान्ते विवाह लेल हामी भरैत देखाइत छथि ।

एहि तरहक घटना आ अपराधी प्रति कोनो तरहक सहानुभूति रखला उपरान्त कन्यापक्ष मे वितृष्णा बढ़त आ समाज पर अत्यन्त प्रतिकूल असर पड़बाक जोखिम बनत । तेँ – समस्त समाज सावधान अछि । कानून मे भ्रष्टाचारिता प्रति नेपालक जेन-जी आन्दोलन प्रत्यक्ष उदाहरण अछि जे केना देशहि भरि ‘प्रचण्ड होम‍-हवन’ मात्र किछेक घन्टा मे कय देने छल ।

अनावश्यक आ असान्दर्भिक आक्रोश वाहियात – सचेत बनू कृपया

गोटेक लोक अन्हेरक आक्रोश मे असन्दर्भित तथ्य – तर्क – धारणा सब जोड़िकय असम्बन्धित लोक एवं सरोकार रखनिहार केँ सेहो गाइर-माइर देबाक स्थिति बनौने अछि । एहि मे दहेज मुक्त मिथिलाक नाम लय केँ एकटा गैरखोर लोकक समूह, जे किछुए दिन पूर्व मैथिली ठाकुर समान कलावर्गक बेटी जे मिथिलाक नाम विश्वप्रसिद्धिक योगदान दैत आबि रहल अछि, तेकर राजनीति मे प्रवेश पर कुतर्क आ मिथ्याढोंग सँ कतेको तरहक उपद्रवी बात-विचार सँ सामाजिक संजाल केँ घिनौने छल, तेकर प्रतिकार करबाक जे दुस्साहस हम सब कएने रही, ताहि सँ जरल-झरकल लोक सब हमरो सब केँ गाइर पढ़य सँ अपना केँ नहि रोकि पाबि रहल अछि ।

खैर, सामाजिक संजाल मे लोक शौचालय मे बैसि मलत्यागहु बेर अपना केँ बड़का नीतिवाने मानि अनावश्यक आ गैरसरोकारी केँ गरियाबय के अधिकारी मानि किछु कय सकैछ, ताहि सँ हम सब विचलन मे नहि पड़ैत छी – बस, अपन कर्तव्य व कर्म कथमपि बेजा नहि हो जे प्रारब्ध गलत बनय ततबी ध्यान रखैत छी । बाकी ईश्वर स्वयं जनैत छथि, वैह जनथिन, दण्डाधिकारी हुनका सँ पैघ आर कियो नहि । एहि तरहक एकटा समूह अछि जेकरा हास्य-विनोद मे ‘एलकेजे समूह’ हम कहल करैत छी, ओ सब मात्र सक्रिय देखाइत अछि आर ओकरा प्रति समाज मे गम्भीरता सँ संज्ञान लेबाक मनोदशा पर्यन्त नदारद रहैछ ।

भविष्यक लेल चेतना

मिथिला समाज मे विवाह संस्था बड पैघ समस्या मे फँसि चुकल अछि । दहेज सँ बेसी समस्या आडम्बरी खर्च आ भौतिक सुख प्रति अतिआशक्तिक कारण चार्वाक दर्शन व नास्तिकता हावी होयबला मानवीय लोभ दोषी अछि । रोशनी झाक जँ हत्ये भेलैक अछि त ओकर पाछाँ स्पष्टतः एहि लड़काक धनार्जन प्रति बेतरतीब व्यवहार दोषी छैक । हमर आकलन यैह अछि, समाजक लोक सँ विमर्श मे, खासकय केँ ध्रुव भाइ (जनकपुर) जेहेन सजग संचारकर्मी संग भेल चर्चा, पूनम मैथिल दीदी सन साहित्यकार एवं सखी-बहिनपा जनकपुर संयोजिका संग भेल चर्चा एवं विभिन्न बुद्धिजीवी समाज – शिक्षक, कवि, आदिक भावना केँ बुझला सँ हमरा ई स्पष्ट भेल से कहि सकैत छी ।

अन्त मे, हम रोशनीक आत्माक चिर शान्ति लेल ईश्वर सँ प्रार्थना करैत छी । ओकर दुनू आत्मज-आत्मजा प्रति संवेदनशील छी । सभक कल्याण होइ यैह कामना करैत छी ।

हरिः हरः!!

एहि सन्दर्भित पूर्वक विचार निम्नानुसार अछि 

विराटनगर, ३ दिसम्बर २०२५ ।

रोशनी झा (जनकपुर) – हादसा अथवा हत्या ?
सामाजिक संजाल मे एखन जनकपुरक ई वीभत्स काण्ड काफी चर्चा मे अछि । कियो-कियो दहेज मुक्त मिथिला अभियान पर पर्यन्त सवाल ठाढ़ करैत एहि सन्दर्भक चर्चा कयलनि । हालांकि दहेज मुक्त मिथिला नितान्त फेसबुक समूह रूप मे समस्त मिथिलावासी आ विशेष रूप सँ युवा पीढ़ी मे दहेज कूरीति विरूद्ध एक जनजागरण अभियान मात्र थिक, केवल स्वयंसंकल्प आ स्वेच्छाचारिताक धर्म अनुरूप विवाहक आध्यात्मिक महत्व केँ आत्मसात करबाक एक प्रकल्प थिक, सन्तानोत्पत्तिक मूल आधार – सृष्टि निरन्तरताक एक मजबूत प्रकृति-पुरुष मिलनक सिद्धान्त थिक । एहि मे देखाबा आ आडम्बर मे ओझराइत संसार केँ सचेत करबाक एक जागृतिमूलक समूह यात्रा थिक । तथापि, जहिया-कहियो कियो पीड़ित औपचारिक रूप मे हमरा सभक हस्तक्षेप-सहयोग चाहलनि, कयल गेलनि, अन्यथा ‘बेगानी शादी में अब्दूल्ला दिवाना’ आ नामक खरखांही लेल कोनो अभियान ‘दहेज मुक्त मिथिला’ नहि चलौलक, न आगू चलायत ।
कि थिक रोशनी झा प्रकरण ?
जनकपुरक समीपक एक सम्भ्रान्त आ सम्पन्न परिवारक बेटी रोशनी झा, देखय मे सुशील-सौम्य, पढ़य-लिखय मे आगू, दुइ सन्तानक माय (एक बेटा, एक बेटी), एक सरकारी पदाधिकारी (नेपाल मे अधिकृत नाम सँ चिन्हल जायवला व्यक्तित्व) केर पत्नी, सामाजिक संजाल मे पर्यन्त सक्रिय टिकटौक बनेनिहाइर, पति-पत्नीक जोड़ी जेकर प्रशंसा सब करैत छल – लेकिन गत सप्ताह वृहस्पति दिन व्रत रखने ओ बेटी अन्तिम साँस लय संसार छोड़ि चलि बसल ।
साक्ष्य-स्थिति-परिस्थिति हत्याक संकेत कय रहल अछि । नैहर आ खास कय रोशनीक मायक कथनानुसार लड़का प्रशान्तक भ्रामक बयान आ हादसा उपरान्त माय द्वारा देखल रोशनीक निस्तेज शरीर – पुनः रोशनीक पहिरल कपड़ा, ओकर डायरी आदि केँ जरेबाक साक्ष्य – लड़काक बहिन-बहिनोइ सभक भूमिका – लड़का परिवारक टका-पैसा आ पहुँच आदिक रसूख – ई सारा एकसाथ बाजि रहल अछि जे शंकास्पद अवस्था मे रोशनीक मृत्यु आ ताहि समय लड़काक उपस्थिति आ भूमिका व बदलैत बयान ‘हत्या’ थिक, जेकरा हादसाक नाम देल जा रहल अछि । परञ्च ई बात हमरा सभक कहने-बुझने कि होयत ? एतय प्रशासन आ पहुँच स्वयं काज कय रहल अछि, विधान अनुसार कार्रबाई केर बात अछि, ताहि ठाम हम सब केवल सहानुभूति आ संवेदना मात्र जाहिर कय सकैत छी ।
समाज मे चर्चा जरूरी
कोनो घटना घटित भेलाक बाद ‘दहेज प्रथा’ पर सवाल उठैछ । केकरो बेटी विवाहक गोटेक वर्ष बितला उपरान्तो, दुइ सन्तानक माय रहितो, जँ शंकास्पद अवस्था मे मृत्युवरण करैछ, त दहेज प्रथा – दहेजक लोभ – आदि स्वाभाविक रूप सँ चर्चा मे आबि गेल करैछ ।
वर्तमान केस मे सेहो एकटा सरकारी पदाधिकारी सँ बेटीक विवाह करौनिहार, अपन ओकादि सँ फाजिल टका-पैसा इन्तजाम कय केँ बेटी लेल सुखद भविष्य तकनिहार माता-पिता खूब लेन-देन कय केँ बेटीक विदाइ कएने छल । मुदा आब एकटा बात सोझाँ आयल – लड़का दुइ नम्बर के अछि । “मिसरजी दुइ नमरी काज करैत छलथि से सत्य अछि ।” – यैह बात सर्वविदित आ बहुचर्चित अछि । आब दुइ नमरी काज करयवला भले अपन दु-नमरिया आ भ्रामक प्रेमजाल सँ जकड़ल आ ताहि मे अपन धर्मपत्नीक संग समय कम खर्च कय ‘बाहरवाली-लटकझटक’ मे ओझरायल हो, पत्नी विरोध करय त ओकरा संग झगड़ा-झंझटि आ मारिपीट हो… फेर कियो कि करय ?
ओ धर्मपत्नी अधर्मी पतिक हाथें मारले टा जायत, दोसर उपाय यैह जे समय पर चेतिकय अपन स्वाभिमानक बल पर हमर कथा ‘कलियुगी सीताराम” केर सीता बनि राम केँ असगर छोड़िकय स्वयं वन मे रहिकय लव-कुश केँ पोसि-पालि स्वतः अवधक उत्तराधिकारी बनबाक लेल ठाढ़ करय ।
अन्दाजी पंचे डेढ़ सय सँ बचनाय बेसी नीक
आइ-काल्हि घटना दोसरक घर घटैछ त समाज मे रंग-बिरंगक नीतिवान लोक सब अपन भुरकी आ घुरकी सब साइड कय केँ ओहि घरक विश्लेषण आ नीति छाँटय मे आगू बढ़ि जाइछ । काल्हि एकटा एहने ढोंगी नीतिवान् जेकर अपनहिं घर मे एहने कलंक लागल छैक, से दहेज मुक्त मिथिलाक नाम अनेरे घसिटैत देखायल हमरा । बर्दाश्त नहि भेल त ओकरा आईना देखेलियैक, देखलक वा नहि से वैह जानय । कनिकबे अपन भुरकी केकरो देखा दियौक त ओ लागत माइये-बहिने गरियाबय । मुदा तेहेन क्षुद्रक मुँह सँ अवाचो कथा निकलय, ईश्वरक आशीर्वादे भेटैछ । अन्दाजी कोनो विषय मे केकरो उपदेश देनाय उचित नहि । कानून, प्रशासन, समाज, लोक – ई सब चारूकात रहैत छैक । ओ स्वतः सच्चाइ केँ जानि लैत छैक । उचित दण्डक प्रावधान अनुसार काज होयत, जँ रसूख-पहुँच सँ बचियो जायत, त ओकरा परमात्मा स्वयं दण्डित करैत छथिन । सत्यमेव जयते । अन्दाजी मे बेसी नहि ढलते ! प्लीज !!
दहेज मुक्त मिथिला ढोल नहि पिटैछ
एकटा बात बेर-बेर आ समय-समय पर कहैत आयल छी – हमरा सब एहि संवेदनशील विषय मे सदिखन पराम्बा जानकी जी केँ कमान्डर मानि आगू बढ़ैत छी । तेँ, ढोल पिटनाय जरूरी नहि छैक । जे कियो आइ धरि हमरा सब संग सम्पर्क आ औपचारिक नियमानुसार मदति चाहलनि, जानकी जीक परम इच्छा सँ हुनका समाधान भेटलनि । हालहि वैह जनकपुरक एकटा परम-सुन्दर जोड़ी टूटैत-टूटैत जुटि गेलथि । हम सब धन्यवाद करैत छी जानकी जी केँ । बेर-बेर प्रणाम हे जगदम्बे ! बस एहिना ध्यान राखू ।
हरिः हरः!!

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