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विवाहक बदलैत प्रारूप सँ उत्पन्न संकट कें मात देब तऽ केवल सजग सोच, समर्पण आ समझदारी सँ संभव अछि  

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लेख विचार
प्रेषित: अशोक कुमार सहनी
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- विवाहक बदलैत प्रारूप, ओकर दुष्प्रभाव एवं समाधान

#प्रस्तावना

#विवाह मानव जीवनक एक महत्वपूर्ण संस्था अछि जे सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आ नैतिक दृष्टिकोण सँ अत्यंत जरूरी मानल गेल अछि। परंपरागत रूप में विवाह के उद्देश्य मात्र दुई व्यक्ति के जीवन संगिनी बनबऽ नहि, बल्कि परिवार, समाज आ संस्कृतिक संरक्षण करब सेहो रहल अछि। मुदा, 21वीं शताब्दी मे बदलैत जीवनशैली, वैश्वीकरण, आधुनिकता आ व्यक्तिगत स्वतंत्रताक प्रभाव मे विवाहक रूप–रेखा तेजी सँ परिवर्तित भऽ रहल अछि। एकर कारणे कतहु सकारात्मक परिवर्तन देखाए पड़ैए, तऽ कतहु गंभीर सामाजिक समस्या सेहो उत्पन्न भऽ रहल अछि।

विवाहक बदलैत #प्रारूप

1. #प्रेम विवाहक प्रचलन:
पारंपरिक समाज मे विवाह परिवारक सहमति पर आधारित होइत छल। लेकिन आब प्रेम विवाहक संख्या तेजी सँ बढ़ि रहल अछि। युवा वर्ग अपन जीवनसाथी स्वयं चुनए चाहैए, जे स्वतंत्रताक संकेत अछि, मुदा एहि में पारिवारिक सहभागिता कम होइत जा रहल अछि।

2. #लिव-इन रिलेशनशिप:
विशेष रूप सँ शहरी क्षेत्र मे अब बिना विवाहक संबंध—लिव-इन रिलेशनशिप—बढ़ि रहल अछि। एहि संबंध मे कर्तव्य, बंधन आ जिम्मेदारी कम होइत अछि, जे विवाहक मूल उद्देश्य पर प्रश्न उठबैत अछि।

3. विवाहक #आयु मे देरी:
कैरियर निर्माण, उच्च शिक्षा आ आत्मनिर्भरता केर चाह मे नव पीढ़ी विवाह के टारी रहल अछि। स्त्री आ पुरुष दुनू अपन आर्थिक आ मानसिक स्वतंत्रता के पहिने प्राथमिकता दैत छथि।

4. #अंतरजातीय/#अंतरधार्मिक विवाह:
जाति-पांति आ धर्मक सीमा पार करि कऽ विवाहक बढ़ल संख्या सामाजिक स्वीकार्यता के चुनौती दऽ रहल अछि। यद्यपि ई परिवर्तन सामाजिक समरसता के दिशा मे महत्वपूर्ण कदम मानल जा सकैत अछि।

5. #डिजिटल मैरिज प्लेटफॉर्म:
आब सोशल मीडिया आ मेट्रिमोनियल वेबसाइट्स द्वारा विवाहक जोड़नी तय होइत अछि। एहि में सुविधा तऽ अछि, मुदा ठगी आ असत्य व्यवहारक संभावना सेहो बढ़ि गेल अछि।

#दुष्प्रभाव

1. #पारिवारिक विघटन:
नव ढंगक विवाह, खास कऽ बिना सामाजिक स्वीकृति या पारिवारिक आधार के, अकसर विघटनक कारण बनैए। विवाह पश्चात जब अपेक्षा पूरा नहि होइत अछि तऽ अलगाव या तलाकक स्थिति उत्पन्न होइत अछि।

2. #तलाक दर मे वृद्धि:
स्वतन्त्रता आ व्यक्तिगत सोचक टकराव, अहंकार, समझौता करबाक अभाव आ मानसिक असंतुलनक कारणे आब तलाकक संख्या खतरनाक रूप सँ बढ़ि रहल अछि।

3. #बच्चाक मानसिक प्रभाव:
टूटल परिवार मे पसरल तनाव, कलह आ अभिभावकक दूरी बच्चाक मनोविज्ञान पर गहिंर असर छोड़ैत अछि। ओ आत्मविश्वासहीन, असुरक्षित आ विद्रोही बनि सकैत अछि।

4. #सामाजिक अराजकता:
विवाह संस्था पर विश्वास कम होबऽ लगल अछि। ई प्रवृत्ति सामाजिक ढाँचाक अस्थिरता आ संबंधक कमजोर बनाबऽ मे भूमिका निभा रहल अछि।

5. #संस्कार आ परंपराक ह्रास:
विवाहक माध्यम सँ जे पारिवारिक आ सांस्कृतिक मूल्य स्थानांतरित होइत छल, ओ परंपरा धीरे–धीरे समाप्त होइत जा रहल अछि। नव पीढ़ी संस्कार सँ कटैत जा रहल अछि।

#समाधान

1. संतुलित #सोच अपनाउ:
आधुनिकता संग–संग परंपरा के सम्मान देब जरूरी अछि। विवाहक चयन मे नव पीढ़ी अपन स्वतंत्रता जरूर रखए, मुदा ओहि मे बुजुर्गक अनुभव आ संस्कार सेहो जोड़ल जाय।

2. #पूर्व विवाह परामर्श:
विवाह पूर्व परामर्श (pre-marital counselling) एक नीक कदम भऽ सकैत अछि, जाहि मे दू व्यक्ति एक–दोसरक सोच, जीवनशैली, अपेक्षा आदि पर स्पष्टता पबैत छथि।

3. #पारिवारिक सहभागिता:
विवाह केवल दुई व्यक्ति के बीच संबंध नहि, बल्कि दुई परिवार के संगम थिक। एही कारणे परिवारक सक्रिय सहभागिता आ मार्गदर्शन आवश्यक अछि।

4. #शिक्षा द्वारा जागरूकता:
विद्यालय स्तर पर विवाहक उद्देश्य, पारिवारिक जीवन, संबंधक महत्व आदि पर पाठ्यक्रम जोड़ल जाय, जाहि सँ युवा समय सँ सही सोच विकसित कऽ सकए।

5. #मीडिया पर नियंत्रण:
सिनेमा, वेब सीरीज आ सोशल मीडिया पर जे भ्रमित करै वाला प्रेम संबंधक चित्रण होइत अछि, ओकरा नियंत्रित कएल जाय। सकारात्मक आदर्श विवाह संबंध प्रस्तुत कएल जाय।

6. #संविधानिक संरक्षण आ #कानूनी उपाय:
विवाहक कानूनी अधिकार, महिला सुरक्षा, दहेज विरोधी कानून, तलाक प्रक्रिया आदि मे सुधार आ सशक्त कार्यान्वयन जरूरी अछि।

#आखिरमे

विवाह केवल सामाजिक औपचारिकता नहि, बल्कि जीवनक एक गंभीर जिम्मेदारी अछि। आधुनिकता आ स्वतंत्रताक संग अगर विवेक, संस्कार आ जिम्मेदारी जोड़ल जाए तऽ विवाहक संस्था फेर सँ मजबूत बनि सकैत अछि। हम सभ के चाही जे बदलैत समय के संग–संग अपन परंपरा, संस्कृति आ परिवारिक मूल्यमे संतुलन बना कऽ विवाह के #पवित्रता बनौने राखी। विवाहक बदलैत प्रारूप सँ उत्पन्न संकट के मात देब तऽ केवल सजग सोच, समर्पण आ समझदारी सँ संभव अछि।

  1. जय मिथिला जय मैथिल ।

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