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यज्ञ-विधिए मिथिला केर पद्धतिक अनुसार विवाह सम्पादन उचित

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लेख विचार
प्रेषित: पीतांबरी देवी
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :-  विवाहक बदलैत प्रारूप ओकर दुष्प्रभाव ओ समाधान।

विवाह एकटा पवित्र वन्धन छिक।एहि मे दू परिवार दू गाम आर दू मनुष्य के सम्बन्ध जोड़ल जाईत अछि। पहिले जवाना मे विवाह कुल- मूल जाति देख के होईत छल। वर सँ कनिया छोट रहैत छली। सासुर के कनिया घर बूझैत छलि। वर मां बाबूजी के कहल मे रहैत छलाह ।सबटा रीत- रेवाज गार्जियन के हाथ मे रहैत छलनि। आर गार्जियन समाज से बान्हल रहैत छलाह। आर जे समाज के रीती- रेवाज छल वैह घर मे होईत छल। पिता के रहैत बेटा के जूति नहि चलैत छलनि। कनिया सासुर आ नैहर सासु ससूरक हिसाब सँ जाईत छलि। पति अपन पिता के कहल मे रहैत छलाह। सासु के मर्जी से घर चलैत छल।ओहि समय मे बेटी सासुर मे बहुत कष्टमय जीवन कटैत छलि। सासु यदि बदमाश रहै छलखिन  जँ दू चारि टा ननदी रहैत छलनि ते बूझू जे बेटी के कष्टक अंत नहि अछि। पति एकटा तमसविन मात्र रहैत छलाह ,बाजि नहि सकैत छथिन्ह किछु। फेर समाज मे किछु सुधार भेल बेटी के बाप सब कमौआ वर सब करय लगला आर वर सब कनिया लऽ के प्रदेश जाय लगला।आब ई भेल जे कनिया सब डेरा पर रहय लागली।ओतय के रहन सहन सिखय लगली । मैथिल छोरि हिन्दी बाजय लगली।बच्चा सबके अंग्रेजी स्कूल मे पढ़वय लागली। आर समाज बदलय लागल। माता पिता गाम के वासी आर धिया पुता शहर के वासी भय गेल।एक तऽ शहर मे जगहके अभाव दोसर बाहरक रहन सहन मे रमनाई । आब आंठि, अपैत, हिरखाह, भिरखाह सबटा बिसरल गेल आर एक टुकरी बिस्कुटो के दांत काटि के खैऽत । आंठि- कुईठ ते कियो बूझबो ने करैत छै। शहरुआ हवा मे सासु- ससुर आर माय-बाप सब अलग भय गेला। जे मोन हैत सैह करब। सर समज के कोनो मोजर नै । गाम एलौं ते सबके अपन धौंस देखौलौं । समाजो आब चुप रहैत अछि कारण सब घरके वैह हाल छै। माय बापक मुँह लागल जे बाल बच्चा कहैत छनि ओ सब करय लगैत छथि कारण पाई ते बेटे खर्च करैत छनि। आर जतेक बाहरी आडंबर सब अछि सिनेमा मे जे सब देखबैत छैक ओ सब आब मिथिला मे हुआ लागल।अपन बिध व्यबहार सबटा बिसरि रहल। कारण आब जे पुतहु 40 वर्ष पहिने शहर गेलि ओ ते आब सासु बनि रहल छथि। ओ गाम घर के किछु बूझबे ने केलनि । ओ शहरूआ सासु सब बाहरी बिध व्यबहार सब करय लागल । बूढ़ी बहुतेक तऽ स्वर्ग चलि गेलीह आर जे गाम घर मे बांचल छथि ओ चूपे रहैत छथि कारण हुनकर के सुनतनि। आब एतेक आडम्बर मिथिला मे आबि गेले जे एकरा सुधारनाई बहुत कठिन अछि। आब घरे घर मैरेज डे, बर्थडे, मदर डे, फादर डे सबटा मनाओल जाईत अछि आर एहि मे खूब खर्च होईत अछि।  नया शाल 1 जनवरी के सब बरका पार्टी करैत छथि आब ई सब मिथिला के पावनि बनि रहल अछि ।आर एकरा समेटनाई बहुत कठिन अछि। विवाह दान मे मिथिला के बिध व्यबहार कम आर परदेश बला विध व्यवहार बेसिए देखय मे अबैत अछि।

एकर समाधान –

तखनहि भय सकैत अछि जे नवयुवक नवयुवती सब आगु आबथि आर समाज मे जतेक कुरिति पसरि रहलै ओकरा समेटबाक कोशिस करथि। मिथिलाके बियाहक विध हल्लुक रहय ।सादा जीवन उच्च विचार छलै। एहिठाम बाहरी ताम-झाम से दुर राखल जाय छल अपना केँ। अपन पावनि तिहार मनाओल जाय छल। अपन भोजन अपनाओल जाय छल । अनावश्यक खर्च कम कैल जाय छल।

मात्र मिथिला के रीति रिवाजक मोताबिक सँ जँ चलै जायत । तऽ तखनहि एहि मे सुधार भय सकैत अछि। सब नवतुरिया सब एहि मे सहयोग करता तखनहि सुधरत।कैएक लाख अनावश्यक खर्च विवाह मे एक राति लेल होईत अछि । ओ कत जाइत अछि? बाँके -बाटे । देखाबा करवाक कोन काज ? सब ते चिन्हते अछि जे अहाँ के छिए आ कतेक पैघत अछि । एहि मे नवयुवक आ नवयुवती सब आगु आबथु आर अपन मिथिला के बचाबथु। अपन मिथिला केर संस्कृति, परम्परा,सादगी, संग आर्थिक बचाव करैत यज्ञ -आहूतिक तूल्य जे वैवाहिक पद्धति छल तकर अनुसरण सँ विवाह करथि।जे विधी देव-तूल्य अछि, संस्कृत आ संस्कार युक्त अछि। रामसिया समान एक पत्नी व्रता वा एक पति व्रता केर पुरातन पद्धतिक अनुसार विवाह कएला सँ संबंध दीर्घायु हैत। साल भरि मे वर कनियाँ पावनिक बहाने धीरे -धीरे गहिंर प्रेमक स्वाद पबैत परिवारिक जिम्मेवारी सीखथि । संगे सभ सदस्यक तित – मिठ बूझि पैघक अनुभव सँ गृहस्थी केर गूढ़ रहस्य बूझथि। नैहर सासूर मऽ वर कनियाँ दुनू केँ सभ संग स्नेह सँ जूड़ि गेने संबंध मजगूत आ टिकाऊ
होइ छै।

वर कनियाँ दुनू अपन साथी कऽ संग-संग सपरिवार लेल सेहो एकटा सीमा मे रहैत सम्पूर्ण मर्यादाक पालन अवश्य करथि।सभ केँ सम्मान देब लेब कऽला सँ संबंध सानन्द चलैत रहैत अछि।

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