- लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- वटसावित्री व्रत
एकर विशेषता आओर महत्व – सनातन धर्म केर मुख्य स्तम्भ अछि अपन मिथिला आ मिथिलाक पावनि तिहार। एहिठाम केर सभ पाबनि उद्येश्य पूर्ण होइत छैक। भगवत कृपा के विना मानवीय जीवनक परिकल्पना संभव नहि अछि। एहि ठाम केर बेसी पावनि सुहाग केर रक्षार्थ, बाल बच्चा के दीर्घायु होयवाक लेल संगहि भाई बहिनक प्रेमकस्नेहक प्रतीक के रूप मे मनाओल जाइत अछि।
बरसाइत अर्थात वटसावित्री पावैनक मिथिला में बड़ पैघ माहात्म्य। सुहाग रक्षा सदासुहागनक कामना सौं मैथिल स्त्री ई पावैन बहुत निष्ठा पवित्रता सौं करै छथि। कियो उपवास त कियो बिना नूनक भोजन।नव विवाहिता एक दिन पूर्व अर्बा-अर्बाईन भोजन सायंकाल भगवती गीत गवैत हरैद दुबि से गौड़ीक निर्माण कय माटिक नाग-नागिन बना सातटा उरीदक बर पकवै छथि। प्रात भेने बेरसाईत दिन स्नान सोलहो श्रृंगार जे एकटा सुहागनक निशानी छी लाल पियर साड़ी पहिर खोईछ लय फूल अक्षत चानन दुबि बेलपात धूप दीप नैवेद्य मे आम लिची केरा अंकुरी। विसहाराक लेल दूध लाबा माटिक दूटा नव सरबा केराऊ दालि अरबा चाऊर गोटा सुपारी जनेऊ द्रव्य आ सूत। माटि या कपड़ाक बनल बर कनियां भूसना सिनूर पूजा स्थल पर बियाह करावक लेल।अहिवात मे जरैत दीप माथपर खिरोधनी(वोहिनी) मे बरके फर 14 या 7 गोट डाली, बियनि, आ पंखा लय छाता तानि अहिवाती सबहक संग गीत नाद गवैत बरक गाछ तर पहुंचि जतय गाय गोबर सौं पहिने निपने रहै छथि सिनूर पिठार सौं अरिपन दय बाम भाग गौड़ी बीच में नागनागिन। तेसर अरिपन पर सावित्रीक पूजा केल जाई छनि।चारिम अरिपन पर सोमाधोविनक पूजा कयल जाई छनि।सूत सौं सात बेर बरक गाछ मे पतिक मंगलकामना करैत लटपटबैत छथि, छाता ओढाउल जाई छैक बियनि सौ हावा कयल जाई छैक आ पाकल आम लय जल चढाय केरा पात पर पूजाक सामग्री नैवेद्य सजा कमल आसन पर बैसि पूजा अर्चना करै छथि आ मिथिला मे प्रचलित सोमा धोविनक कथा जे नाग-नागिन पर आधारित अछि और स्कन्धपुराण वर्णित सावित्री सत्यवानक कथा श्रवण करै छथि आ अंगना आबि गोसाऊन के गोर लागि पांचटा अहिवाती के खीर दय खीर खाई छथि वा उपवास रखै छथि।प्रात भेने कौआ डकै से पूर्व ओहि गौरी के नदी वा पोखैर मे प्रवाहित करै छथि।
पावनिक महत्व बहुत बेसी छैक कारण मैथिलानी जे हरदम अपन जीवन सुहागक रक्षाक लेल ढाल बना लै छथि। एको टा खोंच पति आ परिवार पर सहन नहिं क सकै छथि, जौं परिवार पर कोनो आंच आयल त दुर्गा आ चण्डी बनितो देरी नै लगै छनि।
एहन पतिपरायण स्त्री जीवनसंगिनी भेला पर समस्त मिथिला वासी अत्यन्त गौरवान्वित अनुभव करैत छैथि। धन्य हमर सभक मिथिला आ धन्य एहि ठाम केर पावैन तिहार ।
