Search

समानता, सहमति आ स्वाभिमान पर आधारित संबंधक स्थापना होइ तँ दहेज मुक्त भेलै

657 भ्यूज

 

लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- दहेज मुक्त मिथिला: सांस्कृतिक पुनर्जागरणक स्वर”

नारीक सम्मान सँ होय समाजक उद्धार,
दहेज मुक्त विवाह सँ बदलय संसार।
सादा जीवन, उच्च विचारक संग,
मिथिला गढ़य नव संस्कृतिक रंग।

दहेज मुक्त विवाह स’ आशय ओहन विवाह सऽ छै जाहिमे वर-पक्ष द्वारा वधू-पक्ष सऽ कियो आर्थिक, भौतिक या अन्य प्रकारक लेन-देन (दहेज) नहि लेल जाइत अछि। एहि विवाह पद्धति मे पारंपरिक दहेज प्रथा के विरोध करैत समानता, सहमति आ स्वाभिमान पर आधारित संबंधक स्थापना होइत अछि।
मिथिला में दहेज प्रथा एक सामाजिक विडंबना अछि। जे सदैव अपन सांस्कृतिक समृद्धि, विद्वत्ता आ नारी गरिमा लेल प्रसिद्ध रहल अछि, ओहिठाम दहेज प्रथा एक गम्भीर सामाजिक समस्या बनि चुकल अछि। वर के ‘कमाइत’ मानि कऽ ओकरा वस्तु-जगत के मोल पर तौलल जाइत अछि। जाहि सँ बेटी आ ओकर परिवार पर मानसिक आ आर्थिक दबाव बढैत अछि।
आई काल्हि दहेज मुक्त विवाह समाजक प्रमुख आवश्यकता बनि गेल अछि कारण एहि सँ नारी गरिमा के संरक्षण होइत छैक आऽ दहेज मुक्त विवाह नारी के केवल एक ‘वस्तु’ बुझै बला सोच सऽ बाहर लाबैत अछि। दहेज मुक्त विवाह सँ समानता पर आधारित संबंध स्थापित होइत छैक। एहि पद्धति में वर-वधू दुनू के सहमति, गुण आ समझदारी के आधार पर विवाह होइत छैक।
गरीब परिवार के राहत होइत छैक जाहि सँ आर्थिक बोझ सऽ मुक्ति भेटला पर ओ बेटी के पढ़ाई-लिखाई आ आत्मनिर्भरता पर जोर दैत छैथ।
आई काल्हि मिथिला में दहेज़ मुक्त विवाह के प्रोत्सहन के लेल भिन्न भिन्न तरहक सकारात्मक पहल कैल जा रहल अछि। जेना कि युवासभक नेतृत्व, बहुतो युवा वर अपन विवाह दहेज मुक्त तरीके सऽ कऽ रहल छथि, जे एक नब सोच के जनम दैत अछि।
समाजसेवी संस्था आ मंच ‘दहेज मुक्त मिथिला’, ‘मैथिल यूथ परिषद’ आदि संस्था एहि दिशा मे जागरूकता फैलाबऽ मे जुटल अछि। सादा विवाह के प्रोत्साहन देल जा रहल अछि। बहुतो परिवार आब तिलक, बारियाती, भोज आदि सादगी सऽ कऽ रहल छथि।
बहुत किछु दहेज मुक्त विवाहक विशेषता सभ सेहो अछि जेना सादगीपूर्ण आयोजन, दुनू पक्षक बराबर सहभागिता, कन्या के शिक्षा आ स्वावलंबन पर जोर आऽ वर-पक्ष द्वारा दहेज लेबा सऽ स्पष्ट इनकार इत्यादि इत्यादि।
अंततः दहेज मुक्त विवाह केवल एक सामाजिक आंदोलन नहि अपितु मिथिला के मूल सांस्कृतिक मूल्य “नारी सम्मान, सादगी, आत्मनिर्भरता आ विवेक” के पुनर्स्थापना थिक। एहि सऽ मिथिला फेर सऽ एक आदर्श समाजक दिशा में आगू बढ़ि सकैत अछि, जतऽ बेटी के जन्म उत्सव मानल जाए आ ओकर विवाह एक सम्मानजनक, सहज आ समतामूलक संस्कार हो।

चलू उठी, संकल्प नव लिअ एहि बेर,
दहेज रहित विवाह बनाउ जीवनक उद्देश्य।
मिथिला बनय आदर्श, जागरूक जन होय,
नारी सम्मान सँ नव युग केर संयोग होय।

अंत मे हम किछु एहेन संकल्प लेब चाहब…
“जहिया बेटी के भेटत सम्मान ओहि दिन होयत नव बिहान”
जय मैथिली जय मिथिला

Related Articles