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मिथिला मैथिली लेल सनगर प्रयास

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लेख विचार

प्रेषित : श्री प्रवीण नारायण चौधरी

#लेखनीक_धार

#दहेज_मुक्त_मिथिला, साप्ताहिक गतिविधि

विषय: श्वेक्षिक  (अपन अनुभव)

 

सीखू जमशेदपुर सँ

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् जमशेदपुरक आयोजन ३६म् अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन मे सहभागिता जनाबय गेल छलहुँ । जमशेदपुरक हार्टलैन्ड साक्छी सँ थोड़बे दूर गोलमुरी मे मैथिल समाजक सर्वथा प्राचीन संस्था ‘मिथिला सांस्कृतिक परिषद्’ द्वारा बहुद्देश्यीय भवनक निर्माण कराओल गेल अछि । लगभग ५०० आदमी अँटयवला सभागार मे एसी लागल अछि । खुब लम्बा-चौड़ा बरामदा, सोझाँ खुब पैघ अंगना, गाछ-वृक्ष-उपवन, सब बढियां । शौचालयक सुविधा संगहि मैथिल समुदायक व्यक्तिगत, संस्थागत वा आने कियो समुदाय द्वारा आयोजित कयल जायवला कोनो सार्वजनिक महोत्सव आदिक लेल उपयुक्त आयोजन स्थल रूप मे ई भवन जानल जाइत अछि ।

अहाँ कतहु रहू, अपन सब व्यवस्था उचित ढंग सँ राखू । मैथिल संस्कार मे ई बात मानू जेना अदौकाल सँ आबि रहल अछि । मिथिलाक गामहु सभक संरचना देखब त पोखरि-इनार संग बासडीह पर निवासस्थान, आबादी सँ कनिक हंटिकय बाध आ बोन (कलम-गाछी), बसबिट्टी, मरचर, श्मसानघाट, कब्रिस्तान आदिक समुचि व्यवस्था एहि बातक संकेत दैछ जे पुरखाजन हमेशा मानव सभ्यता लेल आवश्यक समुचित पूर्वाधारक निर्माण मे विश्वास रखलनि । पोखरि-इनार संग-संग देवी-देवता आ ग्रामदेवता आदिक पवित्र स्थान सब सेहो गामे-गाम भेटैत अछि । तहिना ‘विद्यापति परिसर, जमशेदपुर’ मे महाकवि विद्यापतिक मूर्ति लगाओल गेल अछि । सोझाँ मे दुइ गोट हाथीक मूर्ति सेहो राखल गेल अछि । कोनो कार्यारम्भ करय सँ पूर्व विद्यापतिक सोझाँ दीप प्रज्वलन कयल जाइछ, फूल-माला अर्पण कयल जाइछ आ मैथिलीभाषी समुदायक परिचय केँ स्थापित कयनिहार महाकविक रचित भैरवी वन्दना गायल जाइछ ।

उपरोक्त सम्मेलनक आरम्भ ओना त भव्य झाँकी सँ भेल छल जाहि मे हाथ मे पोस्टर, बैनर आदिक संग महिला आ पुरुष सजि-धजिकय नगर परिक्रमा कयलनि । चलैत काल मिथिला राज्य स्थापना करबाक वास्ते जोरदार नारा सेहो लगबैत रहलाह । सब कियो उत्साह आ आनन्द सँ भरल नगर-परिक्रमा करैत जखन विद्यापति परिसर पहुँचलथि, त ओतय आबि सब सँ पहिने महाकवि विद्यापतिक मूर्तिक समक्ष दीप प्रज्वलन आ माल्यार्पण करैत भैरवी वन्दनाक सामुहिक गायन करय जाय गेलथि । अहाँ अपन मूल संस्कार संग रहब त निश्चय वातावरण सुरम्य आ शानदार बनल रहत । तहिना देखय मे आयल जमशेदपुर मे । स्वतः मन सँ आनन्दक भाव प्रस्फुटित होइत रहल ।

तदोपरान्त सभागार मे कार्यक्रम शुरू भेलाक बाद महिला आ पुरुष मैथिल समाज बहुत सम्भ्रान्त, सुशान्त आ सावधान-साकांक्ष भ’ आयोजनक आनन्द लैत देखेलाह । जखन-जखन प्रस्तुतिक बेर होइत छल, तखन-तखन महिला समुदायक जोश व उत्साह देखयवला होइत छल । एकटा उद्घाटन सत्र मे पता नहि केना, लेकिन महिला समुदायक नेतृ लोकनि केँ मंच पर जगह नहि भेटब एकटा अनसोहांत दृश्य त देखौलक, मुदा तेकर बाद त मानू महिला सब अपन योग्यताक बल सँ पूरे सम्मेलन भरि ई सिद्ध करैत रहलीह जे मिथिला मे सच्चे गार्गी, मैत्रेयी व भारती-भामती घरे-घर जन्म लैत छथि । से आइयो स्पष्ट रूप सँ देखौलनि जमशेदपुरक मिथिलानी समुदाय । ओना वक्ता कमजोर होइत छल त फेर माछ-बाजार वला दृश्य त नहि मुदा, फुसफुसाहट सँ सभागार भरि गेल करैत छल । मुदा मुम्बई एमएलएफ मे ‘हा-हू – हू-हा’ करैत शेल्फी-जुल्फी वला दृश्य एतय कखनहुँ नहि देखायल, बल्कि ताहि लेल उपयुक्त समय ‘भोजनावकाश’ मे सब गोटे फोटोग्राफी करैत एक-दोसर केँ स्मृतिपाश मे बान्हि रहल देखाइत रहथि ।

जमशेदपुर सँ एकटा सशक्त शिक्षा ई भेटैछ जे आयोजक कियो रहथि, आयोजन सभक संयुक्त जिम्मेदारी थिक आ तेकरा सब मिलिकय पूरा करब । ई अनुकरणीय अछि ।

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