लेख विचार
प्रेषित: ममता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- “व्रत या उपवास करबाकेँ धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व”
पहिने त लोग अप्पन आत्मसंतुष्टि के लेल व्रत आ पूजा पाठ करैत अछि।बाद मे एकर लाभ आ हानि सोचैत अछि। व्रत कर सं ध्यान भंग नई होइए।चित्त एकाग्र रहैया। समय सार्थक आ सत्कर्म सं बितैत अछि।
व्रत करै सं शरीर कें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढैत अछि आ पाचन तंत्र संबंधित समस्या कंट्रोल मे रहैया। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहैया आ मोटापा कम होइए ।शरीर के वजन कम करै मे व्रत सहायक अछि।
सब महिला आ पुरुष अप्पन श्रद्धा भक्ति सं अप्पन मनोकामना पूर्ति कर के वास्ते व्रत रखैत छथि। भगवान के प्रति अटूट विश्वास अछि व्रतक प्रभाव।
वैज्ञानिक आ आध्यात्मिक रूप सं फायदेमंद अछि।
मन आत्मा के नियंत्रण मे राख के वास्ते लोग व्रत करैत छैथ। तीर्थयात्रा करैत अछि। सोमवारी महादेव के प्रसन्न कर के वास्ते,मंगल हनुमान जी आ भगवती के प्रसन्न कर के वास्ते,बुधकर व्रत गणेशजी के प्रसन्न कर के वास्ते, वृहस्पति विष्णु भगवान के प्रसन्न कर के वास्ते,शुक्र दिन लक्ष्मी आ संतोषी मां के प्रसन्न कर के वास्ते, शनि देव के प्रसन्न कर के वास्ते शनिक व्रत आ सूर्य भगवान के प्रसन्न कर के वास्ते रइब व्रत सब लोग करैत छैथ।ई त सप्ताहिक व्रत भेल। सब दिनक अलग-अलग प्रभाव अछि।
गरीब आदमी तं नित्य रोटी के अभाव मे व्रत करैत छैथ।हुनका लेल ने वैज्ञानिक कारण आ ने भक्ति भाव कारण ओ त अर्थाभाव मे सहैत छैथ।
मासिक व्रत के अलग-अलग प्रभाव अछि। पूर्णिमा आ अमावस्या के व्रत केला सं हार्मोन्स के समस्या कंट्रोल होइए। नियमित एकादशी व्रत केला सं धन आ आरोग्य के प्राप्ति होइत अछि।
नवरात्रि में मां दुर्गा सबहक झोली सुख सं भरैत सबहक मनोरथ पूर्ण करैत छैथ।छैठ केर उपास बच्चाक विकास के लेल कैल जाइए।अहिना श्रद्धालु सब अप्पन भक्ति भाव वैज्ञानिक आ आध्यात्मिक रूप सं सालों भरि करैत छैथ।
