मैथिली साहित्य मे सीताः साहित्य अकादमी दिल्लीक आयोजन पुपरी (सीतामढ़ी मे

मैथिली साहित्य मे सीता

साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा ई आयोजन १७ आ १८ दिसम्बर २०२३ पुपरी (सीतामढ़ी) मे होमय जा रहल अछि। परिदृश्य कतेक तीव्रता सँ बदलि रहल छैक से अनुमान स्वतः लगा सकैत छी अपने समस्त मैथिली भाषाभाषी!

साहित्य अकादमीक स्थापना भेल ६० वर्ष भ’ गेलैक। आर, जेना कि मैथिली साहित्यक वृहत् फलक केँ मात्र विद्वताक अभिमानक दायरा मे संकुचित कय केँ आम लोकक अंगना-दलान धरि पहुँचय मे कतहु न कतहु कंजूसी भेल, ठीक तहिना साहित्य अकादमी मे एकटा गलत परम्परा (केवल किछेक लोकक मुठ्ठी मे रखबाक खतरनाक चाइल) सँ आखिरकार मैथिली भाषाक वृहत् स्वरूप केँ संकुचित करबाक बेतरतीब परिणाम सोझाँ अभरल देखाइत अछि। आइ जे अंगिका आ बज्जिका दुइ भाषिका द्वारा मैथिलेतर भाषा होयबाक दम्भ भरल जा रहल अछि, तेकर जन्म देनिहार आन नहि हम मैथिलीभाषी अभिमानी विद्वान्-साहित्यकार लोकनि स्वयं छी। यदि हमरा लोकनि शिवहर, सीतामढ़ी, चम्पारण, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय, पूर्णियां, कटिहार, किशनगंज, अररिया व समस्त मिथिलाक जिलाक मैथिली लेख्य रूप केँ मैथिली कहि स्वीकार्यता प्रदान कएने रहितहुँ त दस्तावेजक आधार पर स्वतंत्रता पछातिक भाषा-भाषिका अन्तर्गत मैथिलीक वृहत् रूप देखय मे कनिकबो समस्या नहि होइतय।

वर्तमान संयोजक Udaya Narayana Singh नचिकेता सर प्रति हृदय सँ आभार जे मकड़ी बुनल जाल सँ मैथिली केँ बाहर निकालि एकरा अपन विस्तारक्षेत्र धरि प्रसार मे सहायक बनि रहल छथि। पराम्बा जानकी व पुरुषोत्तम राघवक दया बुझू – मैथिली अपन सम्पूर्ण मिथिला भाषा रूप मे विस्तार पाबय लागल अछि। धीरे-धीरे ई वरदान मैथिली केँ अपन विकसित रूप मे जरूर पटल पर स्थापित करत। भारतक आजादीक ७७वाँ वर्ष मे एखन धरिक सब आयोजन मे साहित्य अकादमीक फलक वृहत् आ समावेशी देखाय दय रहल अछि। आगुओ नीक होयत से विश्वास अछि।

सीतामढ़ीक पुपरी मे होइवला आयोजनक मुख्य संयोजक संजीव मिथिलाकिङ्कर प्रति कृतज्ञताक भाव रखैत कार्यक्रमक सफलताक कामना करैत छी।

हरिः हरः!!