सुन्दर गाम, सुन्दर लोक, सामाजिक न्याय आ सुशासन-विकासक अनुपम कथा

 
एक गोट सुन्दर गाम छल। ओहि गाम मे सब तरहक लोक रहैत छल। सब मे एकता आ आपसी सिनेह छलैक। ओहि गामक लोक डिबिया, टुक्की, लैम्प, लालटेन, पेट्रोमैक्स जरूरत मुताबिक जराकय अन्हार सँ प्रकाश मे जियैत छल। संयोग सँ बिजली सेहो सप्लाई जोड़ि देल गेल छलैक आ आब गोटेक-आधेक लोक बिजलीक लाइन सेहो जोड़ि लेने छलय, ओकरा घर बिजली वला बल्ब जरैत छलैक। चूँकि गाम छलैक, आर्थिक अवस्था आ घरक आमदनी सभक सब रंग, तैँ ई भेदभाव होयब स्वाभाविके रहैक। गाम मे चुनाव एलैक। सब नेता सब रंगक बात कहिकय गामक लोक सँ चुनाव मे अपन पक्ष मे मतदान करबाक अनुरोध करब आरम्भ केलक। पहिने सँ जे चुनाइत छल से सब दिने गाम-समाजक बड़का कहबैका केँ अपना पट्टी मे जोड़िकय रखैत छलय, ओहि बड़का द्वारा गामक लोक संग बैसिकय चुनाव मे केकरा चुनल जाय से तय होइत छलैक। कालान्तर मे बड़का कहबैका सभक संख्या एकाधिक हेबाक कारण आपसी बैसार मे ‘हम बड़ा त हम बड़ा’ बढि गेलैक। एक कहय आम त दोसर कहय तेत्तरि। एकर प्रभाव सँ गामक लोक आपस मे बँटय लागल। धीरे-धीरे अवस्था एहेन आबि गेलैक जे चुनाव मे मारापिटी आ खून-खुनामे तक होबय लेल लोक तैयार हुअय लागल। एहि सब बीच मे गामक मुंहदुब्बर लोक सब अपन चुप्पे रहनाय पसीन करय। चुनावी बूथ पर सब गेनाइयो खतरा सँ खाली नहि बुझय। महिला समाज त डरे घरो सँ नहि निकलय।
 
ई क्रम गोटेक वर्ष धरि चललैक। तखन सामाजिक न्याय केर नाम पर एक नव नेताक उदय भेल। ओ नव नेता द्वारा डिबिया, टुक्की, लालटेन, लैम्प, बल्ब – सभक घर अलग-अलग तरहक प्रकाशक बात हेबाक बात पर जोरदार प्रहार करैत कहल गेलैक जे आब ई सब नहि चलत, एक बेर हमरा वोट दिअ आ देखू जे समाजक हर वर्गक लोक केँ एक रंग बना देब। गामक लोक खूब खुश भेल। कमजोर वर्गक लोक केँ त एना बुझेलैक जे हमरा सभ लेल भगवान् कोनो मसीहा (अवतार) पठौलनि अछि। ओ बड़का कहबैका सब गाम मे मिटींग आ अपना मे मारापिटी कि खून-खुनामे करय मे व्यस्त रहितो एम्हर सब कियो एकमुस्ट ‘लालटेन’ छाप पर वोट करब शुरू कय देलक। राज्य मे नव सरकार लालटेन छापक बनि गेल। चारूकात एकटा नव जोश, नया उत्साह जे आब डिबिया, टुक्की, आ अन्हरिया त केकरो घर मे नहि रहत। कम सँ कम लालटेन सभक घर मे जरबे टा करत…। मुदा ई कि? ओ सामाजिक न्याय केर फुकास्टिंग दय राज्य मे सरकार गठन केनिहार नेता एहेन-एहेन उपाय करब शुरू केलक जे आब गाम मे विकसित आ उच्च सुसंस्कृत समाजक लोक रहनाइयो सँ भागय लागल। एहि तरहें चारूकात अन्हरिया-अन्हरिया पसैर गेलैक। ओ नवका मसीहा अपने तरहक सामाजिक न्याय करयवला गाम-गाम मे एजेन्ट ठाढ कय केँ समाद देनाय शुरू केलक। “देख लेलियैक न अहाँ सब? बड़ा जरबैत छलय बिजलीक बत्ती! ओकरा घर बेसी प्रकाश होइत छलैक। आब?” लोक सब सेहो मोने-मोन खूब खुश होइत छल। अपन गरीबी भले ओकर दूर नहि भेलैक, लेकिन ‘लालटेन’ केर युग आ ‘सामाजिक न्याय’ केर सरकार बनि गेला सँ बड़का-बड़का जे गाम सँ पलायन कय गेल, तेकर घरक अन्हरिया, मिझायल बत्ती देखि सभक मोन मे सन्तोष भेलैक। सामाजिक न्याय! सामाजिक न्याय यैह भेल।
 
देश मे नियम छलैक हरेक ५ वर्ष पर सरकार चुनेबाक। ऐगला बेर मतदान भेलैक। पुनः लालटेन छाप आ तेकर एजेन्ट द्वारा एहि बात केँ ततेक हावा देल गेलैक आ जनसामान्य केँ ई बुझायल गेलैक जे ‘सामाजिक न्याय’ सँ गरीब लोकनि केर मुंह मे आवाज आबि गेलैक। आब ‘भुराबाल’ साफ भऽ गेल। ‘सामन्तवादी’, ‘ब्राह्मणवादी’, समाजक कमजोर तवका केँ बाजय तक नहि दैत छल, से सब अपन मुख्यमंत्री जी केर कृपा सँ गाम तक छोड़ि देलक। आब सभक मुंह मे आवाज आबि गेलैक। पुनः नेताजी केँ लालटेन छाप पर मोहर मारिकय अपार बहुमत सँ विजयी बनाउ आ ऐगला किछु दिन मे ‘हेमामालिनी’ केर गाल जेकाँ सड़क बनौता ताहि पर लतखुरदन करैत चलय-चलू। जय सामाजिक न्याय, जय लालटेन, जय नेताजी!! यौ बाबू! एहि बेर फेर चुनाव मे नेताजीक जय-जयकार होबय लागल। विपक्षी दल सब टकटकी लगाकय मुंह तकैत रहि गेल एक-दोसरक। एम्हर सामाजिक न्याय देनिहार नेताजी हेमा मालिनीक गाल त छोड़ू जेहो रोड छल ताहू मे कतहु डाँर्ह भरि उँचका त कतहु भैर मरद गहींर बनाकय सड़क, संचार, सब किछु तेहेन जर्जर कय देल गेलैक जे चर्चा करितो जरकीन केर अनुभव कय रहल छी। लेकिन बात छैक सामाजिक न्यायक आ गाम-गाम ठाढ ई लालटेन एजेन्ट द्वारा वर्गीय विभाजन केर आगि मे घी ढारैत रहबाक – से बाकायदा चलैत रहल। आब त ‘माय’ यानि ‘एम’ आ ‘वाई’ अर्थात् मुसलमान आ यादव केर वोट समीकरण केर बात सेहो उठि गेल। खुलेआम ‘जिन्न’ निकलैत छल बैलट बौक्स सँ। विपक्षी सब मुंह ताकय आ गरीब एवं निमुखाक मुंहक आवाज मसीहा नेता सरेआम पान खा मुंह सँ लेर चुअबैत – मखरैत चारूकात कहने फिरथि जे १५ वर्ष धरि एहि राज्य मे हमर शासन केँ कियो डिगा नहि सकैत अछि। तहिना भेबो केलैक। तेसरो ५ वर्षक टर्म मे वैह चुनेला।
 
आब मसीहा सोचलनि जे किछु त काज करबाक चाही। ओ चरबाहा विद्यालय खोललनि। गरीब-किसान सभ जे पशुपालन कय जीवनयापन करय तेकरा सभक बाल-बच्चा केँ चरबाही करबाक संग-संग विद्यालय मे सेहो जाय वास्ते युक्ति बैसेलनि। गरीब, निमुखा आदि खूब प्रसन्न भेल। पूर्वक जमाना मे सामन्ती सब सेहो अपन किछु कट्ठा-बिग्घा परती छोड़ि दैत छलैक, ओतय लोक सब मालजाल चराबय। एम्हर त आब १५ वर्ष मे बोनि कमेबाक जोगार सेहो समाप्त भऽ गेल छलैक, लोकपलायन दर चरम पर पहुँचि गेल छलैक। आब गाम मे बड़के कि, छोटको सभक संख्या नदारद भऽ गेल छलैक। लेकिन मुंहक आवाज लौटल छलैक, गरीबक मसीहाक राज्य छलैक। बेसी कि चाही! धियापुता सब लेल चरबाही करैत विद्यालयक बात सुनि सब एकदम खुश भेल। आहि रौ बा! ताबत शासनकाल किछु बेसी भऽ जेबाक कारण सत्ताक मद बढि गेला सँ पशु लेल चारा देबाक नाम पर ब्रह्मलूट मे फँसि गेलाह मसीहा! ओना ओ कहैत रहलखिन जे हमरा फेर सँ बड़का कहबैका सभक पार्टी बड घुमा-फिराकय घेरिकय फँसा देलक हँ… मुदा एहि बेर चारा घोटाला मे गुरुजी सहित फँसि गेलाह आर शासनक बागडोर मे सामाजिक न्याय केर सूत्र संचालन कयनिहार सचिव, उपसचिव आ हाकिम-हुकुम सब सेहो फँसि गेल छल। केन्द्रीय स्तरक जाँच एजेन्सी द्वारा घोटालाक जाँच कयल गेल। मसीहा चाराचोर साबित भेलाह। केस-मुकदमा आ जेल भऽ गेलनि। चट सऽ अपन कुर्सी पर कनियाँ केँ बैसा देलखिन। बच्चा सब तेजस्वी आ तेजप्रताप रहितो उमेर मे छोट हेबाक कारण गद्दी पर नहि जा सकैत छलन्हि ताहि सँ मसीहा अपन धर्मपत्नी द्वारा शासन कायम रखबाक नीति अवलम्बन कयलनि। लेकिन चारिम बेर हिनका पटकबा मे पैछला कतेको बेर सँ प्रयास कयनिहार दोसर राजनेता सफल रहलाह।
 
दोसर राजनेता ‘जंगलराज’ केँ समाप्त करबाक वचन देने छलखिन। विकास आ सुशासन केर वादा पर ओ गद्दी आरोहण कयलनि। आर, खूब बढियां सुझबुझ सँ भरल निर्णय सब करैत ओ एक बेर लेल गाम केँ फेर सुन्दर आ सद्भावना मे भरल हेबाक बात केँ मर्यादित ढंग सँ सिद्ध कय देलनि। फेरो सगर विश्व मे एहि राज्य केर नाम होबय लागल। जंगलराज केर आरोप मे फँसल सामाजिक न्यायक मसीहा तेहेन पतरू भेलाह जे आब विपक्ष मे सेहो हुनक हैसियत एक-तिहाई सँ कम पहुँचि गेल। लेकिन सत्ताक उन्माद या अतिमहात्वाकांक्षा मे राज्यक राजनीतिक अवस्था मे एक बेर ‘महागठबन्धन’ यानि एम, वाई, के, डी, पी, बी…. किछेक केँ छोड़ि बाकी सब जातीय समूहक मैनजन केँ एकठाम अनबाक काज भेल। अहंकार केर शासन कनिकबा दिन मे सुशासन आ विकास केर राजनेता केँ गलतीक अनुभूति देलक। पुनः अपन प्राकृतिक गठबन्धन मे लौटि गेलाह। लेकिन गामक हालत, राज्यक हालत जाहि तरहें पहिल १० वर्ष मे नीक भेल छल से कतहु न कतहु पाछू गेल, शिथिल पड़ल। आब वर्ष २०१९ मे जंगलराज सह सामाजिक न्याय वर्सेज सुशासन-विकास आ समान नागरिक संहिताक पृष्ठपोषक बीच करारा संघर्षक स्थिति अछि। देखा चाही जे गामक लोक, राज्यक लोक मे एखनहुँ वैह पुरने पिछड़ापन आ राजनीतिक असाक्षरता हावी अछि या जाति-पाति सँ ऊपर उठि देश आ जनताक विकास प्रति भावना सुदृढ भेल अछि। अस्तु! भेटैत छी २३ मई केर बाद दोसर लेख मे!!
 
हरिः हरः!!