३०म साहित्यिक चौपाड़ि दिल्ली एनसीआर पर रिपोर्ट

श्याम झा, दिल्ली – फेसबुक स्टेटस

१८ सितम्बर, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद! 

30म #साहित्यिक_चौपाड़ि_दिल्ली०एन०सी०आर

“साहित्यिक उत्थान हेतु एकटा अलख जगौने छइ
किछ युवा सब ढाई बरखसँ लंगड़े टाँगे नाचे छइ”

मैथिली साहित्यिक संवर्द्धन हेतु युवा लोकिन ढाई बरख सँ अपन एकटा छोट छिन पैर सँ धाप दैत आगाँ बढ़ी रहल अछि जेकर प्रमाण आजुक 30म साहित्यिक चौपाड़िक सफलता पूर्ण आयोजन सँ होएत अछि। आजुक चौपाड़ि अपन समय सँ अदहा घण्टा देरी सँ शुरू भेल जेकर मूल कारण दिल्ली के भीड़ आर मैथिली संस्कृति पर समर्पित कैक जगह और आयोजन रहल अस्तु कार्यक्रम साहित्यकार ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ जी पर केंद्रित छल जहि मे सताइस नक्षत्र जेँका सताइस गोट चौपाड़ि मे सहभागिता ल’ आयोजन के पूर्ण केलैथ सँग काशी कांत मिश्र मधुप जी के पुतहु और शंकर कुमार मधुपांश जी केर माता श्री केर असामयिक देहावसान पर हुनकर आत्मा केर शांति हेतु दु मिनट के मौन सँ हुनका श्रद्धांजलि अर्पण करल गेल।

आयोजन क’ आरंभ संचालन मनीष झा ‘बौआ भाइ’ द्वारा करल गेलैन जहि मे मूर्धन्य साहित्यकार साहित्यकार श्री ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ जी के पुष्पांजलि अर्पण करैत हुनक जीवनी पर चर्च करल गेल। तत्पश्चात सुशांत झा ‘अवलोकित’ अपन कविता “दिवा स्वप्न” के पाठ केलनि , माधव जी द्वारा स्वरचित गीत “ए रे चान” , डॉ आभा झा जी कविता “हम देशक स्वर्ण” केर पाठ केलनि , राहुल चौधरी कविता “बम बिस्फोटक बाद” आ पूजा मिश्र अपन कविता “आब ओ गाम कहाँ” सँ सबके नॉस्टेलजिया सँ प्रभावित केलनि। मुन्ना जी बिहनी(लघु)कथा “सब्बल” सँ सबहक आकर्षण अपन ओर करे मे सफल भेलैथ। समता जी अपन कविता “टकराव अहम” सँ दशा-दिशा के माँग केलैथ, फेर धर्मवीर जी निर्गुण भजन “हे हरि जन्म किएक देल” सँ मंत्र मुग्ध केलैथ ओतहि मोहन राज अपन कथा “परती परल पोखरी” सँ पुनः एक बेर गामक यात्रा पर ल’ जाए मे सफल भेलाह। सविता झा सोनी “मिथिलाक्षर अभियान” पर लीखल गीत सँ मिथलाक्षर सिखए लेल आवाह्न केलैथ। संस्कृति मिश्र प्रेम कविता “हुनक स्मृति” सँ सबके आकर्षित केलैथ और महेश डखरामी जी साहित्यिक चौपाड़ि मे कवि सबके समर्पित करैत अपन अलग अंदाज सँ “कविकोविद” काव्य रचना रस्वादन हेतु पड़ोसलैन। बीच बीच मे कथा गीत काव्य पर समीक्षा सँ संचालक महोदय सबके ध्यान केंद्रित करे मे सफल भेलैथ। चौपाड़ि केर आगाँ बढ़बैत सुशान्त जी के संचालन मे विनय कुमर जी अपन “भूतक कथा” सँ सबके मन आल्हादित केलनि। मनमोहन जी पहिल बेर चौपाड़ि मे आबि अपन गीत सँ सबके सुना आकर्षित केलनि ओतहिए अमरनाथ मिश्र गीत सँ “अटल जी” के भाव भीनी श्रद्धांजलि देलैथ। अजित जी समसमायिक मुद्दा 377 पर लीखल कविता “ई केहन संबंध” क’ पाठ केलनि ओतहिए कैलाश कुमार झा जी व्यंग कविता “हमहुँ तेज कहबैत” क’ पाठ केलनि। चौपाड़ि केर अंतिम दिश बढ़बैत पं कौशल झा कविता “गिरहथ” के पाठ केलनि , मधुलता मिश्र “दुर्गा वंदना” सँ भक्तिमय वातावरण केलनि , नीरज कुमार “नीरज” अपन कविता “निष्ठुर” सँ सबके प्रभावित केलनि ओतहिए अंत मे श्याम झा अपन कथा “विज्ञानक जमाना” पाठ केलनि। आजुक चौपाड़ि मे बाइस टा साहित्यिकार सँग देलैथ ओतहिए पाँच गोट श्रोता संख्या मे नाम दैत आयोजन के सफलता पूर्वक सफल केलनि जहि मे डॉ कैलाश कुमार मिश्र, विमल जी मिश्र , राजीव चौधरी जी कमल मोहन ठाकुर आर मनीष झा बौआ भाइ छलैथ। अगिला साहित्यिक चौपाड़ि के संभावित तिथि के घोषणा 21 अक्टूबर क’ सेहो करल गेलै। अंत मे बात के पूर्णविन्दु दैत कहब जे।

“छए अन्हार बाट मुदा छिट-पुट भगजोगनी हाँफैत छइ
सजा रहल जे काते कात ठमकि ठमकि ओ गाबैत छइ”

(लेखकक पोस्ट जहिनाक तहिना, बिना कोनो संपादनक)