पिछला चारि वर्ष सँ मैथिली भाषा व मिथिलाक संस्कृति, आर्थिक विकास, कृषिक लचर व्यवस्था मे सुधार आदिक दिशा मे गंभीर अध्ययन करैत सामाजिक संजाल फेसबुक पर आम-जागरुकता मे उल्लेखनीय अभिवृद्धि देखल गेल अछि। एहि जागरुकताक पाछाँ सेहो ओना देक्सी बेसी आ मौलिकता कम छैक, कारण छूछ-जागरुकता किछु युवा मात्र मे देखल गेलैक अछि, ताहि पाछाँ कोनो तरहक जन-समर्थन हेबाक कतहु कोनो उदाहरण एखन धरि नहि देखायल अछि।
२०११ ई. मे कतहु सँ बात उठल जे मिथिला समाज लेल दहेज प्रथा दुश्मन बनि गेल छैक। कतेको गरीब परिवार बेटीक बियाह करिते कर्ज मे डूबि जाइत अछि, जमीन-जथा बिका जाइत छैक, परिवारक माली हालत आरो दयनीय भऽ जाइत छैक। यथार्थ मे सेहो यैह सच छैक जे समाज मे जेकरा जतेक भेटल तेकर ततेक नीक चर्चा होइत छैक, जाहि सँ दहेज बिना लेने या देने बियाह भेनाय उनटे सामाजित प्रताड़नाक शिकार होइत छैक। मोट मे ई मानवताक कोनो दृष्टि सँ प्रशंसाक विषय नहि थिकैक, भाषण देबा घड़ी एकरा सब आपराधिक प्रवृत्ति मे गानैत छैक, लेकिन ओतहि फेर समाज मे एहि व्यवहार केँ, भोज-भात आ बरियाती मे अति-आडंबर केँ सराहना कैल जाइछ। तैँ किछु युवाजन ‘दहेज मुक्त मिथिला’ बनबैत गाम-गाम केँ एहि आडंबर सँ मुक्त करबाक संकल्प लैत अछि आ शुरु करैत अछि अपना तरहें प्रयास। न्युजपेपर सँ लैत इन्टरनेट मे हंगामा मचि जाइत छैक। लोकक मस्तिष्क मे प्रश्न-विषय सब प्रवेश करैत छैक। अभियानक भरपूर सराहना होइत छैक। लेकिन जाहि स्तर पर धरातल पर खास मिथिला मे एकरा उतरबाक चाही से लोकसमर्थनक अभाव मे नगण्य रहैत छैक। तखन तऽ युवाजन मे मानसिकता मे प्रवेश कैल क्रान्ति केँ के रोकि सकैत अछि, तैँ नहि पूर्णत: तऽ अंशत: ई आन्दोलन अपन गति जरुर पकड़ने छैक।
२०१२ ई. मे बिहार १०० वर्ष पूरा केलक। बिहार सरकार राज्य गीत बनाकय प्रकाशित केलक ‘ऐ भारत के कंठहार…’ आ एहि मे कतहु सँ मिथिलाक पौराणिक-ऐतिहासिक-समकालीक योगदानक उल्लेख तक नहि कैल गेल। स्वाभाविके रूप सँ मिथिलाक अस्मिता पर स्वाभिमान निर्माण कएनिहार युवाजनकेँ ई बात बहुत अखरलैक। ओतय सँ शुरु भऽ गेल ‘मिथिला राज्य’ केर निर्माण हेतु प्रयास। पूर्व मे लागल वरिष्ठ अभियानी लोकनिक दशकोंक प्रयास केँ युवाजनक संङोर सँ आरो सशक्त बनेबाक प्रयास सेहो कैल गेल। लेकिन ओतहु आपसी घमर्थन आ सब अपने-आप मे बड़का नेता – विजनरी सोशियल साइंटिस्ट, दोसराक बात कियैक मानब, नेता कियो असगरे कियैक बनि जायत, नेता बनबे किया करत, कहीं नेता नहि बनि जाय, आदि अनेको आपसी-आशंका मे बानर जेकाँ चिकन खूटा पर २ मीटर चढिकय २ मीटर निचाँ पिछरैत परिणाम ढाक केर तीन पात जेकाँ – जतय छलहुँ ततहि छी, ताहि मे ई आन्दोलन घोंसिया गेल। हँ, तखन राजनीतिकर्मी किछु प्रखर पुत्र धरि एहि बात केँ अपन एजेन्डा मे समेट लेलनि अछि आ चुनाव २०१५ मे ई मुद्दा जोर पकड़ि लेत से अवस्था एहि सब प्रयास सँ बनि गेल अछि। प्रक्रिया थिकैक, चलि रहल छैक।
एम्हर फेसबुक केर भूमिका बहुत मामिला मे सकारात्मक भेल अछि तऽ बहुत मामिला मे नकारात्मकता केँ सेहो ग्रहण केलक। यथा – उपरोक्त आन्दोलनक शुरुआत देखि किछु कचैल आ अपूर्ण मस्तिष्कक युवा सब आपसी एकता केँ सुदृढ करबाक स्थान अपन घोंघाउजी प्रवृत्ति सँ नव-नव आन्दोलनक घोषणाक अंबार लगा देलक। एहन कोनो दिन नहि जाहि मे कोनो नवका आन्दोलनक समाचार फेसबुक पर नहि आबैत हो। एहेन कोनो महीना नहि जाहि मे नवका चारि गो संस्था नहि बनैत हो। एहेन कोनो समय नहि जाहि मे मिथिला आ मैथिलीक मुद्दा धरि नेता बनबाक सपना कतेको कचैल द्वारा अनुपालन नहि कैल जा रहल हो। अरे भाइ! आन्दोलन लेल दृष्टिकोण चाही आ ताहि अनुरूपे साधन चाही, तेकर संयोजन बिना केवल घोषणा कय देनाय, एकरहि नाम पड़ि गेल ‘फूकास्टिंग’। फेसबुक सँ फूकास्टिंग मे सबसँ बेसी माहिर दरभंगा आ मधुबनीक युवा जे अधिकांश दिल्ली आ नोएडा मे जीविकोपार्जन कय रहल अछि ओ सब लागल अछि। दोख ओकर नहि छैक, दिल्लीक हवा मे राजनीति छैक। ताहि पर सँ एकटा स्थान छैक ‘जन्तर-मन्तर’। ओहि जन्तर-मन्तर सँ एकटा नवका पार्टी आ तेकर अप्रत्यासित सफलता सँ बनल दिल्ली सरकार – ई सब अफीम जेकाँ मिथिलाक हृदयकेन्द्र दरभंगा-मधुबनीक दिल्ली प्रवासी युवा पर पड़ैत छैक। एहि मे किछु एहेन लोकक बैकप रहैत छैक जेकरा अपना क्षेत्र सँ टिकट लेबाक लेल पार्टी केँ देखेबाक रहैत छैक जे देखू हम कतेक पैघ मुद्दा पर काज कय रहल छी। मिथिला राज्यक माँग गृह मंत्रालय द्वारा संज्ञान मे लेल जेबाक कारणे आ एक अति प्राचिन संस्था द्वारा रूटीन मे पार्लियामेन्ट सेशन ओपनिंग डे पर आयोजित एक-दिवसीय अनशन मे सहभागी बनि फोटो खिचेबाक नीक अवसर भेटैत ‘राज्य आन्दोलनी’ बनब आसान छैक। आगू-पाछू फेर फैक्ट्री मे कार्यरत ओ युवा कतेक कय सकतैक। तथापि, फुर्सतक समय हाथ मे मोबाइल, ताहि पर फेसबुक, लिखय मे कि जाइत छैक। चलू लिखू! गाम छुट्टी मे जायब ताहि समय ‘जनजागरण अभियान’ चलायब। रवि दिन मार्च करब। रवि दिन धरना करब। छुट्टीक दिन थिकैक। ओनाहू घर मे बैसल कि करब। यैह सब थिकैक दिल्ली सेट मिथिला आन्दोलन।
आइ करीब ५ दिन भेलैक अछि, भारत सरकार द्वारा १०० स्मार्ट सिटी बनेबाक परिकल्पना पर घोषणा भेलैक जे फल्लाँ-फल्लाँ शहरकेँ स्मार्ट सिटी बनायल जायत। एहि मे दरभंगा नहि पड़लैक। एहि मे संपूर्ण उत्तर बिहारक एकमात्र नगर ‘मुजफ्फरपुर’ पड़लैक, सेहो छपरावासी एक विधायक सुरेश शर्मा आ बिहार सरकारक संबंधित मंत्रालयक विशेष कृपा सँ। मंत्री वेंकैया नायडू सँ पूर्वहु यदि कियो भेंटघांट करैत, बिहार सरकारक संबंधित मंत्रालयक समक्ष एहि लेल प्रतिनिधिमंडल पठबैत आ दरभंगा केँ कियैक स्मार्ट सिटी बनायल जाय ताहि तरहक अवधारणा पत्र सौंपैत यदि प्रयास केने रहितैक तऽ एकटा बातो… एतय तऽ विधायक, सांसद, आ फूकास्टर नेता केकरो आपस मे कोनो तालमेल तक नहि छैक आ बस आपसे मे एक-दोसर केँ गरियाबैत छैक, काजक पहर बितलाक बाद सब नेतागिरी करय लेल अपन-अपन नाम सँ न्युज १०० टाका या पन्नीवला दारूक नजराना दैत स्थानीय पत्रकार सँ पेपर मे छपबाबैत छैक, तेकर बाद शुरु करैत छैक ‘फूकास्टिंग’ पेपर कटिंग संग अपन लंबा-चौड़ा दाबी करैत। हौ बाबु! एना मे दरभंगाक कि विकास हेतैक? जेहो किछु रहैक से १०० वर्षक बिहारी औपनिवेशिक राज्य मे बर्बाद टा भेलैक। लाभ कि?
नेताक बात तऽ एक भेल। बुद्धिजीवी आ समाजसेवी कतय हेरायल छैक? प्रश्न इहो उठैत छैक। हम स्वयं मूल दरभंगावासी छी। एक-एक गाम आ एक-एक ठामक दशा सँ अवगत छी। राजनीति आ काजनीति मे एतुका जनताक विश्वास उठि गेल छैक। खाली नेता अपन जातिक लोक हेबाक चाही। समाज जाति-पाति आ अगड़ा-पिछड़ा मे पूर्ण विखंडित छैक। केकरो ई सुधि नहि छैक जे राज्य कि थिकैक, लोकक मौलिक अधिकार कि छैक, कतय अधिकार पर दमन भऽ रहल अछि…. राज्य सरकारक अंग शासन-प्रशासन दुनू मिलिकय खूब लूटि रहल अछि, जनताकेँ एहि सबसँ कोनो सरोकार नहि छैक। वैह लूटनिहार सबकेँ बखरा लगबय मे जखन झगड़ा-झाँटी भेल तखन उठिकय ठाढ भेल, आपस मे लड़ल आ ताहि लड़ाई मे अपन दियाद-वादक संग किछु चमचा-बेलचारूपी जनताक समर्थन पर दाबी ठोकैत काज यानि अपन हिस्सा-बखरा लेल संघर्ष आगू बढेलक। बुद्धिजीवी आ समाजसेवी सब चुपचाप मूक-दर्शक बनिकय ई घोर कलियुगी शासन देखि मनेमन जनक-विदेह केँ सुमिरैत दिन कटैत रहैत छथि। एम्हर लोक बेसी आतूर अहु लेल नहि होइत छैक जे बेटा-संतान कतहु बाहर दु गो पाइ कमेबे करैत छैक, कट्ठा-दु-कट्ठा जमीन छैक ताहि मे खेती-पाती सँ सेहो दालि-रोटी भेटिये जाइत छैक… तखन के बुझू जे हरमाजक काज मे पड़य। यैह अवस्था मे नेता सँ लैत प्रशासनक लोक सब मिथिला मे शान्तिपूर्ण लूट-तमाशा कय रहल अछि। एहना मे मिथिला राज्य होइक तैयो वैह, बिहार छैक तैयो वैह, बंग रहैक तैयो वैह! कि फर्क पड़ैत छैक!
आब देखबाक अछि जे वर्तमान फूकास्टिंग आन्दोलन जाहि मे एखन धरि मिथिला स्टुडेन्ट युनियन आ मैथिल मंचक संग किछु बिना संस्थेक संस्थाधारी नामधारी लोक सबहक नाम जुड़ि गेल अछि, एकर कि परिणाम निकलैत छैक। सांसद कीर्ति आजाद सेहो पेपर मे ‘बिफरे’ आ ‘अपने दलकी सरकार से असंतोष और आक्रोश जाहिर किये’ खानापूर्ति कइये लेलनि। आर, फूकास्टिंग आन्दोलन कहियो दरभंगिया जनताक ताश-तारी मे मस्ती सँ ऊपर जइयो नहि सकैत अछि, तथापि क्रान्ति कखन आ कोना सुलैग जायत ई कहनाय मोसकिल अछि। जय मिथिला!!