Search

प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली केँ भेटल एकटा आर दूर-दूर धरि ख्याति प्रदान करयवला भक्तिगीत – जलेश्वरनाथक स्तुतिगान

https://youtu.be/gqIbBZaVzK4 जय जलेश्वरनाथ – जय जलेश्वरनाथ – गंगा खेलथि जिनक जटा मे छथि जलेश्वरनाथ, नित दिन जल मे वास करैत छथि अपन जलेश्वरनाथ, जय जलेश्वरनाथ जय जय जलेश्वरनाथ एतेक सुन्दर बोलक रचना आ ततबे सुन्दर आवाज मे सुनील मल्लिक जी समान वरिष्ठ गायक द्वारा गायन – एकटा आरो दूर धरि अपन प्रभाव छोड़यवला भक्तिगीतक सृजन मैथिली केँ भेटल एकटा आर दूर-दूर धरि ख्याति प्रदान करयवला भक्तिगीत – जलेश्वरनाथक स्तुतिगान

सुशीला जेहेन सुशील कन्याक संग एहेन दुर्व्यवहार कियैक

कथा – सविता झा आइ जे कथा लिखल जा रहल अछि ओ वास्तविक घटना पर आधारित अछि। कलुवाही केर ढेंगा में सुशीला नामक लड़की रहैत छल्थिन्ह। जेहेने नाम छलन्हि सुशीला तेहने ओ सुशील स्वभाव केर छलथि। ओ मधुबनी सँ पढल-लिखल छलथि। पढ़य में ओ मेधावी छात्रा छलथि। देखय में सेहो बड़ सुन्दर रहथि। मिला-जुला कय सुशीला जेहेन सुशील कन्याक संग एहेन दुर्व्यवहार कियैक

थाईलैन्ड राज परिवार संग मिथिला नरेश जनक केर सम्बन्ध केँ स्पष्ट उजागर करबाक लेल पत्राचार

१७ अक्टूबर २०१९, मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली साहित्यकार सभा – जनकपुर द्वारा थाईलैन्ड राज परिवार सँ पत्राचार करैत प्राचीन मिथिलाक सुप्रसिद्ध नरेश जनक संग पारिवारिक सम्बन्ध केँ उजागर व स्पष्ट कय देबाक लेल वंशावली उपलब्ध करेबाक मांग कयल गेल अछि। ई जनतब मैथिली साहित्यकार सभाक सभापाल प्रेम विदेह ‘ललन’ मैथिली जिन्दाबाद केँ करौलनि, संगहि ओ बतेलनि थाईलैन्ड राज परिवार संग मिथिला नरेश जनक केर सम्बन्ध केँ स्पष्ट उजागर करबाक लेल पत्राचार

आत्मनिरीक्षण – बाबाधामक पेड़ा (प्रसाद)

आध्यात्मिक चिन्तन – प्रवीण नारायण चौधरी आत्मनिरीक्षण – बाबाधामक पेड़ा (प्रसाद)   कइएक दिवस सँ दिमाग मे एकटा बात अबैत अछि – प्रवीण! तोरा स्वयं मे कतेक अभिमान छौक आ तूँ दोसर अभिमानी केँ देखैत देरी कतेक जल्दी उताहुल भऽ अपन अभिमान केँ उजागर करय लगैत छँ से कहियो आत्मनिरीक्षण कयलें? ई सवाल अपना आप आत्मनिरीक्षण – बाबाधामक पेड़ा (प्रसाद)

दुर्गा पूजाक ओ घड़ी – मर्दक बेटा घड़ी जे बजैय से बजिते रहत

संस्मरण – रूबी झा वाणी दीदी के संस्मरण पढिकय हमरो अपन बालपन के दुर्गा पूजा मोन पड गेल।आ बहुत रास दृश्य आँखिक सामने आबि गेल। ओहि मे सँ किछु अपन पाठक लोकनि संग साझा कय रहल छी। हमरा गाँव मे तँ दुर्गा पूजा नहि होइत छलय, लेकिन अगल-बगल केर गाम मे होइत छलैक। बगले मे दुर्गा पूजाक ओ घड़ी – मर्दक बेटा घड़ी जे बजैय से बजिते रहत

भगवती केँ साँझ आइयो देखबैत छियनि मुदा ओ पहिलुका आनन्द कहाँ

संस्मरण – सविता झा आइ दुर्गापूजा देखय जा रहल छलहुँ त मेला देखकय अपन बाबूजीक याद आबि गेल। बात ओहि समयक अछि जखन हम बड़ छोट रही। साँझ में बाबूजी आबैथ त हम सब तैयार भ क बैसल रहैत छलहुँ जे मेला घुमअ जायब। ओही ठाम अन्तिम चारि दिन धूमधाम स पूजा होइत छलैक। दुर्गापूजा भगवती केँ साँझ आइयो देखबैत छियनि मुदा ओ पहिलुका आनन्द कहाँ

मिथिलाक भोज आ बारीकक महत्व

लेख – वाणी भारद्वाज भोज मे बारीकक महत्व समाजक बदलैत स्वरूप मे सबकिछु बदलैत जा रहल अछि. ताहि क्रम मे भोज-भातक आ बारीक मे सेहो बदलाव अवश्यमभावी छैक. हमर नेनपन गाम मे किछु समय बीतल अछि. कतेको भोज गाम-घर मे खेने छी. गाम सब मे भोजो कतेको तरहक होइत अछि. जेना, बरियतिया भोज, मुरनक भोज, मिथिलाक भोज आ बारीकक महत्व

बुरबक बेटा टक्के काबिल – पवन कुमार झा ‘अग्निबाण’ केर प्रखर विचार पर प्रतिविचार

विचार – पवन कुमार झा ‘अग्निवाण’ बुरबक बेटा टक्के काबिल मैथिल आ मिथिला के अवनति में सामूहिक सोच के विपरीत व्यक्तिगत सोच के अधिक प्रभाव छै. संभव छै हम गलत छी लेकिन हमर अपन अनुभव अछि जे मिथिला में जे कोनो तरीका स पाई कमा ललक तकरे टा पूछ छै आ एयेह समाज के पतनशील बुरबक बेटा टक्के काबिल – पवन कुमार झा ‘अग्निबाण’ केर प्रखर विचार पर प्रतिविचार

पटना मे वर्षाक जलजमाव सँ उत्पन्न बाढि सन स्थिति मे मानवीय सहायताक अपील

पटना मे बाढिक अवस्था आ स्वयंसेवी मार्फत सहयोग लेल अपील   ई संवाद कनी देरी सँ लिखय लेल क्षमायाचनाक संग….   बिहारक राजधानी पटना मे निरन्तर वर्षा आ जलजमावक कारण जनजीवन त्रस्त अछि। किछु क्षेत्र मे पानि एतेक लागि गेल अछि जे घर सँ बाहर निकलनाय तक लोक लेल आफद भेल छैक। जलनिकासीक सारा इन्तजाम पटना मे वर्षाक जलजमाव सँ उत्पन्न बाढि सन स्थिति मे मानवीय सहायताक अपील

महामाया जगदम्बाक प्रथम चरित्र – केना मनन करब अपना सब

आध्यात्मिक चिन्तन – प्रवीण नारायण चौधरी माँ दुर्गाक प्रथम चरित्र   एक राजा अपन राज्य सँ बेदखल कयल गेल अछि। एकटा वैश्य अपन व्यापार, परिवार, पत्नी, पुत्र, अरजल सम्पत्ति, स्वजन, परिजन सभक द्वारा त्यागल गेल अछि। दुनू परेशान भऽ भागिकय जंगल पहुँचि गेल। ओतय एक मेधा नामक ऋषिक आश्रम पहुँचि हुनकहि आश्रय मे रहि रहल महामाया जगदम्बाक प्रथम चरित्र – केना मनन करब अपना सब