भाषाभटकाव मिथिला सभ्यताक अन्तक संकेत त नहि?
भाषाभटकल लोक १९८७ ई. मे बाढि सँ बेहाली आयल। जहाँ-तहाँ नदीक तटबन्ध सब टूटि जेबाक कारण बेहिसाब पानि सँ खेत-पथार, एतेक तक कि खरिहान, घर-अंगना सबटा डूबि गेल छल। लोक खाना कोना पकायत ताहू लेल समस्या रहैक। ऊँच-ऊँच बान्ह आ घरक छत पर आश्रय लय येन-केन-प्रकारेण संघर्ष कय केँ प्राण-रक्षा मे लागल छल। शायद … भाषाभटकाव मिथिला सभ्यताक अन्तक संकेत त नहि?









