मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड पाँचम अध्यायः सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब आ खर-दूषणक बध
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अरण्यकाण्ड – अध्याय पाँच सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब, खर-दूषण केर बध ।चौपाइ। पञ्चवटी गोदावरि कात । आइलि सूर्पनखा उत्पात ॥१॥ कमल कुलिश अंकुश पद-रेख । अङ्कित अवनि रमनि से देख ॥२॥ जनु जगतीपति कयल निवास । सूर्पनखा मन काम विलास ॥३॥ गौलि कुटीतट गमयित भाज । … मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड पाँचम अध्यायः सूर्पनखाक नाक-कान काटल जायब आ खर-दूषणक बध






