मिथिलाक मूल संस्कृति मे ह्रास आ समाधान पर दृष्टि
विचार – संजय कुमार झा प्रवासी मैथिल जे सभ गाम-घर छोड़ला, नौकरी चाकरी के क्रम मे शहर गेला, ओ सबटा अपना केँ शहरी बुझय लगलाह। मैथिल सभ तेज़ त होयते छथि, शहर गेला सँ आरो खूब तेजी सँ दोसरक नकल करय मे अव्वल बनि गेलाह। कनियाँ सभ जे गेलखिन शहर मे तैं जे बच्चा सभक … मिथिलाक मूल संस्कृति मे ह्रास आ समाधान पर दृष्टि




