होली पर आधारित एक रचनाः होली साखी
साहित्य – प्रवीण नारायण चौधरी होली साखी मन उदास आ खिन्न अवस्था होली खूब मनेलहुँ, मिलिजुलि साथी-संगत सब तैर गीतो खूब जे गेलहुँ! सोचैत रहलहुँ मनहि मन कि होली के यैह थिक रीत, भाँग-गाँजा आ दारू पीबि कय गायब अनढन गीत! बच्चे सँ जे देखलहुँ-सीखलहुँ यैह बनल अछि आदैत, नीक-निकुत खूब खाउ … होली पर आधारित एक रचनाः होली साखी









