स्वयंसेवाक भाव सँ भाषा, भेष ओ भूषणक काज करू
बात बुझू साफ-साफ प्रसंगः मैथिली भाषा केँ तोड़बाक कुचक्र आ अनावश्यक चिन्ता पर प्रवीण विचार ई कलियुग थिक। एखन बेसी लोक अपन स्वार्थ आ भूख मे ओझरायल अछि। परोपकार आ दस के हित के काज लेल बहुत कम लोक उद्यत् होइछ। मैथिली आ कि मिथिला केकरो स्वार्थ नहि थिकैक। ई परोपकारी सभक स्वनिर्णय थिकैक। एहि … स्वयंसेवाक भाव सँ भाषा, भेष ओ भूषणक काज करू









