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प्रवीण नारायण चौधरी

अपन स्वार्थ सँ ऊपर उठिकय समाज लेल जिनाय सिखू

जगजननी जगदम्बाक दरबार सँ शिक्षा   प्रस्तुत तस्वीर भगवतीस्थान (दुर्गाजीक दरबार) कुर्सों-नदियामीक थिकैक। भगवतीक दरबार हम अपन बाल्यकाल सँ बहुत नजदीक सँ देखैत आबि रहल छी, बहुत किछु सिखबाक आ बुझबाक संग-संग कतेको रास चमत्कार आ भगवतीक लीला सब देखबाक, गुनबाक आ सुनबाक लेल सेहो भेटल अछि। मनुष्य जखन अपन जीवन अस्तित्व मे अबैत अछि अपन स्वार्थ सँ ऊपर उठिकय समाज लेल जिनाय सिखू

फ्रिज मे कि सब नहि रखबाक चाही

स्वास्थ्य सम्बन्धी सचेतनाक लेख – प्रवीण नारायण चौधरी फ्रिज मे कोन-कोन सामान नहि रखबाक चाही   गर्मी आ बर्खा के समय तैयार खाना जल्दी खराब भऽ जाइत छैक। हरियर तरकारी, फल, दूध, दही, आदि सेहो सामान्य तापक्रम मे जल्दी खराब हेबाक सम्भावना छैक। कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, माछ, माँस, आदि अनेकों खाद्य वस्तु केँ सुरक्षित रखबाक फ्रिज मे कि सब नहि रखबाक चाही

स्मारिका प्रकाशनक संग निर्धन कन्या सहायता अक्षय कोष निर्माण लेल प्रयास

८ अगस्त २०२१, मैथिली जिन्दाबाद!! दहेज मुक्त मिथिला स्मारिका – २०२१ केर प्रकाशन संग ‘निर्धन कन्या सहायता अक्षय कोष’ केर निर्माण कयल जेबाक सूचना दहेज मुक्त मिथिला संचालिका वन्दना चौधरी करेलनि अछि। एहि सन्दर्भ अभियानक संस्थापक प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा कयल गेल पोस्ट स्वयं सब बातक विवरण दैत अछि, तेकर उतार निम्न अछिः निर्धन कन्या स्मारिका प्रकाशनक संग निर्धन कन्या सहायता अक्षय कोष निर्माण लेल प्रयास

महादेव अर्धनारीश्वर केर रूप एहि कारण लेलनि

स्वाध्याय आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी महादेव अर्धनारीश्वर केर रूप एहि कारण लेलनि भगवान शिव केर पूजा हजारों-हजार वर्ष सँ भऽ रहलनि अछि, धरि ई तथ्य बहुत कम लोक जनैत अछि जे शिव केर एक आरो रूप छन्हि ओ थिक ‘अर्धनारीश्वर’। असल मे शिव अपन मर्जी सँ ई रूप धारण कएने रहथि। ओ एहि रूप महादेव अर्धनारीश्वर केर रूप एहि कारण लेलनि

हमर लक्ष्मीजीक जन्मदिवस पर किछु खास बात

दिवस विशेष स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी हमर लक्ष्मीजीक जन्मदिन पर किछु खास बात भगवान विष्णु केर विभिन्न अवतार आ ताहि मे हुनक शक्ति अर्थात् लक्ष्मीजीक भूमिका सुनिते-बुझिते छी। श्रीराम संग सीता एवं श्रीकृष्ण संग रुक्मिणी (राधा सेहो) केर विभिन्न जीवनलीला रामायण आ भागवत कथा मे हम सब सुनैत-बुझैत रहलहुँ अछि। भगवानक स्वरूप केर आध्यात्मिक हमर लक्ष्मीजीक जन्मदिवस पर किछु खास बात

बाबा केदारनाथक मन्दिर केर ओ चमत्कारिक लीला

५ अगस्त २०२१, मैथिली जिन्दाबाद!! ईश्वरीय चमत्कारक एक प्रत्यक्ष प्रकरण विश्वप्रसिद्ध #केदारनाथ मन्दिर के पाछू के एहि शिला केँ देखू, कहल जाइछ जे महाबली भीम द्वारा २०१३ के #जलप्रलय मे एहि महाशीला केँ राखि देल गेल छल आर तदोपरान्त जे महाजलप्रलय आयल से एहि शीला सँ टकराइत दूभग्गू होइत केहेन ताण्डव मचेलक से सब जनिते बाबा केदारनाथक मन्दिर केर ओ चमत्कारिक लीला

एक अवला नारी के सवालः मरल केँ आर कतेक मारब?

सामाजिक विमर्श – वन्दना चौधरी मरल के और कतेक मारब? अहाँ सब पूरा पढिकय अपन जवाब जरूर देबै, एकटा पीड़ित महिला के सवाल सभक! आय हम अहाँ सभक समक्ष जे बात राखि रहल छी ओ बहुत पैघ ज्वलंत मुद्दा बनिकय अभरल अछि अपन समाज में और एकर निराकरण कोना हेत अहि पर सबगोटे के मिलिकय एक अवला नारी के सवालः मरल केँ आर कतेक मारब?

जन्म हमर सुनि हर्षित भेल – बेटीक जन्म आ जीवन पर आधारित मैथिली कविता

साहित्य – अंजू झा जन्म हमर सुनि सब हर्षित भेल। सब मूँह मिठ कैल बधाई देल। मातु हमर अति पुलकित भेली, दादी चाची सोहर गेली। बाबा, कका, भैया निहारैथ, नेहक झूला सदा झूलाबैथ। पिता अपन गुमान बनेलैथ, शिक्षित सक्षम संतान बनेलैथ। लेकिन जन्म अकारथ भेल, जखन उम्र विवाहक भेल। बिवस पिता दहेज़ के आगू, बेटी जन्म हमर सुनि हर्षित भेल – बेटीक जन्म आ जीवन पर आधारित मैथिली कविता

मानसी मिश्रा केँ किक बौक्सिंग प्रतियोगिता भुटान मे सफलता लेल शुभकामना

साभारः बलराम मिश्र मैथिल (फेसबुक पोस्ट) मानसी मिश्रा, सर्वोदय विद्यालय, K-2मंगोल पुरी 11वीं के छात्रा मानसी मिश्रा जून में आयोजित दिल्ली स्टेट किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त क’ अपन माता-पिता श्रीमती मनोरमा मिश्रा आ श्री दिलीप मिश्राजी के संग-संग गाँव दूर्गौली, बेनीपट्टी, मधुबनी, मिथिला समाज केँ गौरवान्वित केने छलीह । पहिले त’ किछु मानसी मिश्रा केँ किक बौक्सिंग प्रतियोगिता भुटान मे सफलता लेल शुभकामना

छिन्नमस्तिका भगवती उजानक लीला आ माहात्म्य

३ अगस्त २०२१, मैथिली जिन्दाबाद!! छिन्नमस्तिका देवी उजान – विभा झा मिथिला, देवी- देवताक लेल सभ सँ प्रिय स्थान रहल अछि। मिथिलाक बाबा बिदेश्वरनाथ सँ पाँच किलोमीटर दक्षिण बड़का गाम उजान के लालपुरक कलमगाछी मे माँ छिन्नमस्तिका देवी श्मशानघाट पर अवस्थित छैथि। ई स्थान आई सँ सौ साल पहिले एतेक घनगर आ भयंकर जंगल रहय छिन्नमस्तिका भगवती उजानक लीला आ माहात्म्य