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प्रवीण नारायण चौधरी

आब नहि त कहियो नहिः विद्यापति डीह पर राष्ट्रीय स्मारक प्रसंग काल्हि ५ दिसम्बर ग्लोबल मीट

पैघ सपना पूरा होयबाक दिन थिक ५ दिसम्बर २०२० ग्लोबल मैथिल द्वारा महाकवि विद्यापतिक जन्मस्थली विस्फी मे राखल गेल कार्यक्रम जे काल्हि ५ दिसम्बर २०२० केँ आयोजित होयत से अनेकों कारण सँ नव इतिहास बनाओत। दशकों सँ लागि रहल एक स्वाभाविक कलंक जे महाकवि विद्यापतिक नाम पर सौंसे अनघोल होइत अछि, मैथिल केर समग्र पहिचान आब नहि त कहियो नहिः विद्यापति डीह पर राष्ट्रीय स्मारक प्रसंग काल्हि ५ दिसम्बर ग्लोबल मीट

विराटनगर मे मिथिला भवन व गायत्री मन्दिर निर्माणार्थ भूमि पूजन कयल गेल

४ दिसम्बर २०२० । विराटनगर । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली सेवा समिति विराटनगर द्वारा गायत्री मन्दिर एवं मिथिला सामुदायिक भवन निर्माण लेल भूमि पूजन कार्य काल्हि दिनांक ४ दिसम्बर २०२० केँ विराटनगर मे सम्पन्न भेल अछि।   कोविड-१९ महामारी केर कारण सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड अनुसार बिना कोनो विशेष भीड़भाड़ सिर्फ विराटनगर महानगरपालिका वार्ड संख्या १० विराटनगर मे मिथिला भवन व गायत्री मन्दिर निर्माणार्थ भूमि पूजन कयल गेल

कोरोना सँ भय नहि बल्कि सुरक्षा उपाय अपनेनाय जरूरी

कोरोना आ हम हमर किछु प्रिय पाठक लोकनिक अनुरोध पर ई लेख लिखि रहल छी। एहि कोरोनाकाल में सम्भवतः ई लेख जनसामान्य लेल उपयोगी होयत। विदित हो जे पिछला 12 दिन सँ हम कोविड 19 (SARS CoV 2) पॉजिटिव छी, एखनहुँ आइसोलेशन में रहैत स्वयं केर रोगनिरोधी सामर्थ्य (immunity) केँ बेहतर बनेबाक प्रयास कय रहलहुँ कोरोना सँ भय नहि बल्कि सुरक्षा उपाय अपनेनाय जरूरी

मानवीय एकजुटता केर मुख्य आधार आ मिथिला

हम सब एक छी हम सब मुमुक्षु मानव जाति केर लोक केवल मानव छी, मानवता हमरा सभक एकमात्र धर्म अछि। सब एक्के स्कूल केर छात्र, एक्के पढ़ाई, एक्के शिक्षक, सभक लक्ष्य सेहो एक जे मानव रूप सफल जीवन जियैत अपन कर्तव्य पालन करैत चली। गुरु साक्षात परब्रह्म परमात्मा होइत छथि। चाहे ओ मौलवी साहब होइथ मानवीय एकजुटता केर मुख्य आधार आ मिथिला

दीपावली शुभकामना – पठनीय मननीय सन्देश

दीपावली शुभकामना वर्ष 2020 केर दियाबाती यानी दीपावली आबि गेल। समय अपन गति केँ निर्बाध रूप सँ चलबैत रहैत अछि, किछु भ जाय ई ठमकैत तक नहि अछि। तेँ एहि वर्ष मानव सभ्यता पर कोरोना महामारी केर खतरा रहितो येन केन प्रकारेण गाड़ी बढ़िते जा रहल अछि, भले हम बीमार भ क्वरंटीने में छी आ दीपावली शुभकामना – पठनीय मननीय सन्देश

जगत में मिथिला हमर महान – रामभरोस कापड़ि भ्रमर रचित मिथिला गान केर लोकार्पण समारोह सम्पन्न

12 नवम्बर 2020, मैथिली जिन्दाबाद!! जगत में मिथिला हमर महान गीत केर भेल लोकार्पण मिथिला केर प्रसिद्ध गीतकार आ नाटककार संग साहित्यकार, पत्रकार, पैरोकार आ अनेकों प्रकार केर योगदान दाता रामभरोस कापड़ि भ्रमर केर रचित नव आ अनुपम गीत ‘जगत में मिथिला हमर महान’ केर लोकार्पण समारोह ‘आई लव मिथिला’ फेसबुक पेज द्वारा लाइव वेबिनार जगत में मिथिला हमर महान – रामभरोस कापड़ि भ्रमर रचित मिथिला गान केर लोकार्पण समारोह सम्पन्न

आ नर्क बनि गेल स्वर्ग (उपदेशप्रद कथा)

एक संयुक्त परिवार केर बात छी। एक सम्पन्न दम्पति केर पांच गो बेटा आ दुइ गो बेटी रहनि। बेटा पांचों के विवाह भ गेल रहय, बेटी दुनू कुमाइर रहथि। छोटका बेटा के विवाह हालहि भेल रहय, कनियाँ के दुइरागमन बाकिये रहय। घरक पुरुष सब काज धंधा में लागल रहैत छल आर स्त्रीगण लोकनि घर मे आ नर्क बनि गेल स्वर्ग (उपदेशप्रद कथा)

मैथिली लघुकथा: मैडमजी केर ईमानदारी

लघुकथा – बेबी झा, चकफतेहा, शिवहर आई अपने सब के बीच एकटा लघु कथा राखब जाहि में तीन टा बिन्दु पर फोकस करब। पहील जे छोट काज हुए या पैघ ईमानदारी बरकरार रहे, दोसर किनको में नीक बात लागे त अनुकरण करी नै की ईर्ष्या, तेसर जे जीवन में कोनो नकारात्मक बात हुए त धैर्य मैथिली लघुकथा: मैडमजी केर ईमानदारी

योग प्रशिक्षिका काजल चौधरी द्वारा लाइव टिप्स दहेज मुक्त मिथिला पर

31 अक्टूबर 2020 । मैथिली जिन्दाबाद!! सामाजिक संजाल केर लोकप्रिय अभियान दहेज मुक्त मिथिला केर फेसबुक समूह पर योग प्रशिक्षिका काजल चौधरी आइ सन्ध्या साढ़े 5 बजे लाइव आओती, ई जनतब समूह संचालिका वन्दना चौधरी देलीह। वर्तमान युग मे खानपान केर प्रकृति आ पाक पद्धति बदैल जेबाक कारण, जीवनशैली सेहो पहिने के तुलना काफी अलग योग प्रशिक्षिका काजल चौधरी द्वारा लाइव टिप्स दहेज मुक्त मिथिला पर

जँ बेटी केँ सुखी देखबाक इच्छुक छी तँ कि करबाक चाही

विचार – जय शंकर चौधरी की चाही…? बेटी केर संस्कार, विचार और व्यवहार वा दान दहेज? आग्रह एक बेर पोस्ट के पढ़ियौ आ अपन प्रतिक्रिया व्यक्त करियौ! दान, दहेज भेटला सँ सब बेटाक माँ-बाप के अत्यधिक खुशी होइत छैन्हि! मुदा कहि दी, ई खुशी क्षणिक छी। असली खुशी, परिवार कें, बेटीक संस्कार, विचार आ व्यवहार जँ बेटी केँ सुखी देखबाक इच्छुक छी तँ कि करबाक चाही