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प्रवीण नारायण चौधरी

कोशी आरती – मैथिली कवि अरविन्द मिश्र नीरज कृत्

१० जनवरी २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा जनगणना मे दर्ज कराउ, संविधान मे अपन मिथिला राज्य केँ लाउ – एहि आह्वान संग मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा आयोजित मिथिला पुनर्जागरण यात्रा केर दोसर चरण मे मिथिलाक एक सुप्रसिद्ध कारू खिरहर स्थान मे प्रथम दिनक विश्राम आयोजित भेल छल। एहि क्रम मे कारू बाबाक भव्य कोशी आरती – मैथिली कवि अरविन्द मिश्र नीरज कृत्

प्रदेश २ मे समाजवादी संस्कृतिकर्मी संगठन निर्माण

विद्यानन्द बेदर्दी, राजविराज। ३१ दिसम्बर २०२१। मैथिली जिन्दाबाद!! गीतकार भूषण सिंह ‘भँवर’ क अध्यक्षतामे २९ सदस्य सहित ‘समाजवादी साँस्कृतिक महासंघ, सप्तरी’ गठन । २२ गोटे पहिचानक आन्दोलनमे योगदान देनिहार कलाकारकेँ सम्मान। व्यवस्था परिवर्तनमे कलाकारसबहक महत्वपूर्ण योगदान अछि : प्रमुख अतिथि मन्त्री साह। प्रदेश नम्बर २ के अर्थमन्त्री मा. शैलेन्द्र प्रसाद साह वर्तमान शासन व्यवस्था परिवर्तन प्रदेश २ मे समाजवादी संस्कृतिकर्मी संगठन निर्माण

२०२१ केर जाइत जाइत एक अत्यन्त जरूरी चर्चा – प्रवीणक कलम सँ

कहियो ई सोचलियैक या विचारलियैक जे…..     मिथिलाक्षेत्रक एकमात्र भाषा ‘मैथिली’ लेल सुसंगठित कार्य कतेक भेल? राज्य द्वारा भाषा-संस्कृतिक विकास लेल कि सब योगदान कयल गेल?   एहि दुओ प्रश्नक उत्तर सहजहि भेटि जायत। आधुनिक भारत व नेपाल दुनू देश मे विद्यमान् मिथिला, एहि ठामक भाषा, संस्कृति आ समाजक विकास हेतु राज्य द्वारा लागू २०२१ केर जाइत जाइत एक अत्यन्त जरूरी चर्चा – प्रवीणक कलम सँ

हमर सभ्यता आ भूगोल केर अवस्था दयनीय कियैक

सभ्यता पर खतरा   कनी गौर करूः   “भाषा सँ साहित्य – साहित्य सँ संस्कार – संस्कार सँ संस्कृति – संस्कृति सँ सभ्यता – सभ्यता सँ भूगोल”   ई पंक्ति एकटा सूत्र थिकैक। एहि सूत्र के आधार पर हम सब मिथिला के छी। मैथिली हमरा सभक भाषा छी। एहि भाषा मे लिखित साहित्य मात्र १००० हमर सभ्यता आ भूगोल केर अवस्था दयनीय कियैक

सामाजिक एकजुटता मे दिन-दिन कमी के कारण की

सम्पादकीय २८ दिसम्बर २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!!   आइ एकटा विवाह उत्सव पर ताम-झाम मे लाखों रुपया खर्च करबाक नियति बनि गेल अछि। आब लोक पहिने जेकाँ घरही कुर्सी, टेबुल, सोफा, गुलदस्ता, टेबुल क्लोथ आ अन्य साज-श्रृंगारक सामान मांगिकय विवाह मे वर-बरियातीक स्वागत लेल जनमासा नहि बनबैत अछि। आब टेन्ट, लाइट, डेकोरेशन, आदिक सारा सामान सामाजिक एकजुटता मे दिन-दिन कमी के कारण की

मैथिली ठाकुर केँ भेटल राष्ट्रीय पुरस्कार

नई दिल्ली, 24 दिसम्बर 2021। – विमल जी मिश्र, मैथिली जिन्दाबाद। #लोकमत_सुर_ज्योत्स्ना राष्ट्रीय म्यूजिक अवार्ड सँ सम्मानित भेलिह मिथिला के धिया #मैथिली_ठाकुर #मैथिली_ठाकुर कें ढ़ेर रास आशिर्वाद 🌹🌹 यशस्वी भव 👍👍👍👍👍 एहि राष्ट्रीय म्यूजिक अवार्ड के चयन मे , देश के जानल मानल संगितज्ञ गायक शामिल रहैत छैक । अमजद अली खां, हरिहरन , उदित मैथिली ठाकुर केँ भेटल राष्ट्रीय पुरस्कार

२ जनवरी सँ शुरू होयत दोसर चरणक यात्राः मिथिला राज्य निर्माण सेना

२४ दिसम्बर २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!! “जनगणना मे मैथिली – संविधान मे मिथिला” मूल नाराक संग जनचेतना मे मातृभाषा मैथिली आ मौलिक पहिचान मैथिल केँ संविधान सँ सम्मान दिएबाक लेल मिथिला राज्य निर्माणार्थ ‘मिथिला पुनर्जागरण यात्रा’ दोसर चरण मे ५ दिन लेल सहरसा, मधेपुरा, सुपौल आ प्रस्तावित जिला झंझारपुर मे आयोजित कयल जायत। ई जनतब २ जनवरी सँ शुरू होयत दोसर चरणक यात्राः मिथिला राज्य निर्माण सेना

हराहीक ठमकल पानिपर एकटा ढेप – विभूति आनन्द

विचार – विभूति आनन्द #हराहीक_ठमकल_पानिपर_एकटा_ढेप… आइ चारि दिवसीय ‘मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल’क दरभंगा संस्करण संपन्न भेल. एक दर्शक रूप मे तीन दिन उत्सवीय मूड मे रहलहुँ. नीक लागल. की पौलहुँ, की गमौलहुँ, हमरा लेल ई सोच महत्वपूर्ण नहि. तहिना एहि आयोजन मे कतेक पाइ खर्च भेल, कत’ सँ आयल एतेक पाइ, ईहो हमरा लेल असोचनीय रहल. हराहीक ठमकल पानिपर एकटा ढेप – विभूति आनन्द

शिव-पार्वती संवाद – सुख आ दुःख केर भोग के मूल कारण की

स्वाध्याय लेख – प्रवीण नारायण चौधरी श्रद्धा आ विश्वास   काल्हि शिव-पार्वती संवादक एक कथा अपने सभक समक्ष रखने रही जाहि मे गंगा स्नान सँ निष्पाप बनबाक फल केकरा प्राप्त होइत छैक तेकर बड सुन्दर आख्यान (चर्चा) छल। ओहि मे देल गेल दृष्टान्त केर अनुसार जे लोक बिना श्रद्धा आ विश्वास केँ मात्र दंभ वास्ते शिव-पार्वती संवाद – सुख आ दुःख केर भोग के मूल कारण की

कि गंगा मे स्नान कय केँ सचमुच पापक नाश भऽ जाइत छैक

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी १५ दिसम्बर २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!! शिवमय संसार आ एक रोचक कथा   अपन मिथिला संस्कार मे शिव-पार्वतीक महिमा-गरिमा सँ भला के नहि परिचित होयब, डेग-डेग पर हुनक मन्दिर ई स्थापित करैत अछि जे हमरा लोकनि समस्त मैथिल पहिचानधारी आखिर भोला-भवानीक कतेक पैघ भक्ति करैत छी। आजुक कलिकाल मे, वर्तमान कि गंगा मे स्नान कय केँ सचमुच पापक नाश भऽ जाइत छैक