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प्रवीण नारायण चौधरी

लोकपाबैन सामा-चकेवाक एक एहनो आध्यात्म – चुगला तहिया आ आइ

लोककथा – प्रवीण नारायण चौधरी (पूर्व प्रकाशित लेख, १५ नवम्बर २०१२) चुगला चुगलखोरी करनिहारके कहल जाइत छैक। मैथिलके एक महत्त्वपूर्ण पावैन सामा-चकेवा में चुगला-दहन के गाथा छैक। चलू यैह बहाना हम किछु संस्मरण साझा करी पावैन सामा-चकेवाक, जे मिथिलामें लोक-पर्व रूप मे मनयबाक अति प्राचिन परंपरा अछि। सामा – याने द्वारकाधीश श्री कृ्ष्णकेर बेटीक नाम! लोकपाबैन सामा-चकेवाक एक एहनो आध्यात्म – चुगला तहिया आ आइ

सामा चकेवा मनेबाक लोकविधान – साभार पंडित सीताराम झा

मिथिलाक लोकसंस्कृति विशेष – लेख संकलन भाइ-बहिन केर प्रेम, त्याग आ समर्पण पर आधारित पौराणिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान सँ लोकपाबैन मे परिणत ‘सामा-चकेवा’ पर हार्दिक शुभकामना!! १. डाला लय बाहर भेली बहिनो से अन्नी बहिनो हरि भैया लेल डाला छीन सुनू राम सजनी! समुआ बैसल तोंहें बाबा बड़ैता तोर बेटा लेल डाला छीन सुनू राम सजनी!! कथी सामा चकेवा मनेबाक लोकविधान – साभार पंडित सीताराम झा

विह्वलक मैथिली तांका संग्रह ‘व्योमक ओहि पार’ सार्वजनिक

विह्वलक मैथिली तांका संग्रह ‘व्योमक ओहि पार’ सार्वजनिक काठमाडौं नेपाल पत्रकार महासंघक पूर्वअध्यक्ष धर्मेन्द्र झाक नवीन मैथिली कृति ‘व्योमक ओहि पार’ सार्वजनिक भेल अछि। पत्रकार झा मैथिली साहित्यमे धर्मेन्द्र विह्वलक नामसँ स्थापित छथि । सोमदिन काठमाडौंमे आयोजित एक कार्यक्रमकबीच मैथिलीक पहिल तांका संग्रह ‘व्योमक ओहि पार’ सार्वजनिक भेल छैक। नेपाल पत्रकार महासंघक अध्यक्ष विपुल पोखरेल, विह्वलक मैथिली तांका संग्रह ‘व्योमक ओहि पार’ सार्वजनिक

ऐतिहासिक नगरी विराटनगर मे काली पूजा मनेबाक इतिहास बनेलक अप्पन ब्राह्मण समाज

८ नवम्बर २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!! विराटनगर मे काली पूजा   अप्पन ब्राह्मण समाज – नामहि सँ सब केँ अपनाबयवला, सब मे अपनत्व केर सुन्दर भाव प्रदान करयवला एक नवस्थापित संस्था द्वारा ऐतिहासिक-औद्योगिक महानगरी विराटनगर केर एक कमी केँ पूर्ति करयवला ऐतिहासिक संस्था बनि गेल अछि। एहि महानगर मे ओना त नित्य कोनो न कोनो ऐतिहासिक नगरी विराटनगर मे काली पूजा मनेबाक इतिहास बनेलक अप्पन ब्राह्मण समाज

युवा राजनीतिकर्मी जयराम यादव बनलाह सामाजिक विकास मंत्री – युवा लेल प्रेरणाक सन्देश

८ नवम्बर २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!! विचार – प्रवीण नारायण चौधरी युवा लेल विशेष प्रेरणाः जयराम यादव   पाबनि-तिहारक समय व्यस्तताक कारण अपन पाठक लोकनि सँ ई साझा समय सँ नहि कय सकल छलहुँ… गाँधीवादी विचारधाराक युवा राजनीतिकर्मी तथा नेपालक वंचित-शोषित समुदाय मधेशी सहित आदिवासी, जनजाति, दलित, मुस्लिम, आदिक आवाज बनिकय अत्यन्त कम उमेर सँ युवा राजनीतिकर्मी जयराम यादव बनलाह सामाजिक विकास मंत्री – युवा लेल प्रेरणाक सन्देश

9म राम थाईलैंड के राजा?

साभार हिन्दी संस्थान कनाडा फेसबुक पेज   भारत के बाहर थाईलेंड में आज भी संवैधानिक रूप में राम राज्य है । वहां भगवान राम के छोटे पुत्र कुश के वंशज सम्राट “भूमिबल अतुल्य तेज ” राज्य कर रहे हैं , जिन्हें नौवां राम कहा जाता है । -भगवान राम का संक्षिप्त इतिहास- वाल्मीकि रामायण एक 9म राम थाईलैंड के राजा?

कोरोना महामारी सँ निजात लेल बिहार में सिसिडब्ल्यूजी द्वारा राज्य स्तरीय ई-ग्रैंड राउंड केर संचालन

पटना, 3 नवम्बर 2021 । मैथिली जिन्दाबाद । एम्स पटना के अगुवाई में यूएसएड (यूएसएआईडी) राइज तथा झपियेगो केर संयुक्त प्रयास सँ बिहार राज्य में गठित क्रिटिकल केयर वर्किंग ग्रुप (सिसिडब्ल्यूजी) द्वारा प्रत्येक जिला आ पब्लिक हेल्थ सेंटर केर स्वास्थ्यकर्मी सब केँ महामारी सँ ग्रसित रोगी केँ इमरजेंसी सेवा संग एकाएक जरूरी पड़ि सकय वला कोरोना महामारी सँ निजात लेल बिहार में सिसिडब्ल्यूजी द्वारा राज्य स्तरीय ई-ग्रैंड राउंड केर संचालन

मातृभाषाक महत्व

अपन मातृभाषा केर महत्व की?   मातृभाषा पर बहुत रास लेख अछि। हमर आग्रह जे एक बेर आर्ट अफ लिविंग श्री-श्री रविशंकर संग वार्ता पर आधारित एहि लेख केँ जरूर पढू। लिंकः https://www.artofliving.org/in-hi/wisdom/why-is-it-important-to-learn-mother-tongue   मातृभाषा सँ लोक केँ जे पहिचान भेटैत अछि वास्तव मे वैह आत्मसम्मान सेहो प्रदान करैत अछि। लेकिन दुर्भाग्य सँ आइ मिथिला मातृभाषाक महत्व

दहेज मुक्त मिथिला पूजा मिलन समारोह मधुबनीक सम्पूर्ण प्रतिवेदन (रिपोर्ट)

मधुबनी मे मिलन समारोह – कि सब उपलब्धि भेटल   दहेज मुक्त मिथिला पूजा मिलन समारोह पूर्व निर्धारित स्मारिका विमोचन तिथि अर्थात् १६ अक्टूबर २०२१ केँ तय समय आ तय स्थान ‘अतिथि होटल’ केर सभागार मे सम्पन्न भेल। एकर अध्यक्षता समूह संचालिका वन्दना चौधरी कयलीह आ कार्यक्रम संचालन नीरज कुमार झा संग हम प्रवीण नारायण दहेज मुक्त मिथिला पूजा मिलन समारोह मधुबनीक सम्पूर्ण प्रतिवेदन (रिपोर्ट)

मैथिली भाषा लेल चिन्ता आ चिन्तन – भाषिक एकरूपता कोना बनत

मैथिली लेखन मे एकरूपताक अभाव कोना दूर हो?     भाषा-विमर्श मे अक्सरहाँ ई चर्चा कयल जाइत अछि जे मैथिलीक कतेको रास शब्द अलग-अलग लेखक द्वारा अलग-अलग हिज्जे मे लिखल जाइछ। एहि सँ पाठक भ्रमित भेल करैत अछि आर मैथिलीक पठनीयता मे कतहु न कतहु कमी एबाक किंवा एकर अध्ययन मे लोकक रुचि घटि जेबाक मैथिली भाषा लेल चिन्ता आ चिन्तन – भाषिक एकरूपता कोना बनत