सामा चकेवा मनेबाक लोकविधान – साभार पंडित सीताराम झा

मिथिलाक लोकसंस्कृति विशेष – लेख संकलन

सामा चकेवा पाबनि अवसर पर महोत्सवरूपी आयोजन कतेको ठाम संपन्न

भाइ-बहिन केर प्रेम, त्याग आ समर्पण पर आधारित पौराणिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान सँ लोकपाबैन मे परिणत ‘सामा-चकेवा’ पर हार्दिक शुभकामना!!

१.

डाला लय बाहर भेली बहिनो से अन्नी बहिनो
हरि भैया लेल डाला छीन सुनू राम सजनी!

समुआ बैसल तोंहें बाबा बड़ैता
तोर बेटा लेल डाला छीन सुनू राम सजनी!!

कथी केर आहे बेटी डलबा तोहर छौ
कथी बान्हल चारू कोण सुनू राम सजनी!!

काँचहि जे बाँस केर डलबा यौ बाबा
बेली-चमेली चारू कोण सुनू राम सजनी!!

जौँ तोरा आहे बहिनी डलबा जे दय देब
हमरा के कि देब दान सुनू राम सजनी!!

चढ़बाक घोड़ा देब पढ़बाक पोथी देब
छोटकी ननदिया देब दान सुनू राम सजनी!!

२.

आबह सामा आबह चकेबा हे अपन देश
भाइ मोर हे आशीष दैह!

जीबह भाइ जीबह भाइ जीबह भाइ लाख बरीस
हमे सामा हे कातिक मास!!

हरि भाइ इहो सामा हे पोसलनि
खेलय जैती हे साक्षी बहिनों
आहे खेलय जैती देवांशी बहिनों
खेलह बहिनो खेलह बहिनो चारि पहर राति
हमे सामा हे कातिक मास!!

३.

अयलै कातिक मास रे भैया सामा लेल अवतार
चिठिया जे लिखै हे बहिनो विनती लिखल हजार
चिठिया जे दीहै रे हजमा हरि भैया के हाथ
चिठिया जे पढ़िते रे भैया घोड़ा पीठ भेल असवार

किछु गीत अपने सब सेहो संकलित कय दी!

साभारः पंडित सीताराम झा

सामा चकेवा – काँच माटिक बनल मानव , पशु आ पक्षीक आकृति सामा कहबैत अछि ।

ई पूजा कार्तिक शुक्ल द्वितीयासँ आरम्भ कए पूर्णिमा का समाप्त कएल जाइत अछि । ई सामा जाम्बवती आ कृष्णक कन्या थिकीह । शकुन्त पक्षीके रुपमे हिनक पूजा भाइक कल्याण कामनासँ महिला लोकनि करैत छथि । नव धानक शीशसँ हिनक पूजा साँझमे गीत गाबि कएल जाइत अछि । भ्रातृद्वितिया दिनसँ ई पूजा आरम्भ होइत अछि आ पूर्णिमा दिन चूड़ा – दही , गूड भोग लगा परिचारिका वर्गमे प्रसाद बाँटल जाइछ । वाटो बहिनो चौबटिया पर राखल जाइत छथि । सामाक अदला – बदली मैथिलीएमे मन्त्र पढ़ि – पढि कएल जाइत अछि । ई सब कार्य महिला लोकनि करैत छथि । रातिमे अरोस – परोसक महिला लोकनि एकत्र भय गीतनाद करैत आङनक बाहर बाड़ी आ कि चौमासाके चुगिला आ वृन्दावन जड़ाए एहि पूजाक समापन करैत छथि । भाइस सामा फोरेबाक आ जलपान देबाक विधान अछि । जहिया रातिमे पूर्णिमा पड़ेत छैक तहिये होइत अछि । ई पूजा सामा द्वारा अपन भाए साम्बकक कल्याणार्थ आरम्भ भेल।

सामा गीतः-

डाला लऽ बहार भेली, बहिनो से फल्लाँ बहिनो । फल्लाँ भइया लेल डाला छीन , सुनु राम सजनी ।
मचिया बैसल तोहे बाबा हो बरहिता । तोरो पुत लेल डाला छोनि सुनु राम सजनी ।
कथीकर तोहर डलबा हे बेटी । कथी लागल चारू खुट सुनू राम सजनी ।
सोने के हमरा डलबा हो बाबा । चम्पा चमेली चारू खुट सुन राम सजनी ।

गीत गबैत चौमास खेतमे जा समाके पसारि दी आ तहन डाँट बला पान गांट सुपारी , एक मुट्ठी अरबा चाउर सबके आँचर पर राखि ली तहन पाँच बेर सखी सब सँ सामा फेरा – फेरी करी तकर मन्त्र –

जीब जीबय जीबs की मोर भैया जीवः ।
कि तोर भैया जीव ।
जैसन धोबियाक पाट तैसन भैयाक पीठ ।
जैसन करड़िक थम्ह तैसन भैयाक जाँघ ।
जैसन पोखरि सेमार तैसन भैयाक टीक ।

तहन भाय सं सामा फोड़ा । हुनका चुरा गुड़ सं फाँफर भरल जाइछ । तखन सामा खेलेनाइ शुरु करी । गीत गाबि पहिने चुगिला डाहल जाइछ तखन वृन्दावन जाराओल जाइछ तहन सामा लय आङन अएबाकाल झम्मरि भम्हरा बाला गीत गबैत अबैत अछि ।

हरिः हरः!!