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जितिया : मायक अटूट आस्था, त्याग आ संतानक मंगल-कामनाक पाबनि

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लेख विचार
प्रेषित: सुष्मिता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- जितिया : मायक अटूट आस्था, त्याग आ संतानक मंगल-कामनाक पाबनि

मायक ममता संसारक सभसँ पवित्र भावना अछि। संतानक सुख, स्वास्थ्य आ दीर्घजीवनक लेल मायक हृदयसँ निकलल प्रार्थनाक कोनो तुलना नहि।

मिथिला अपन समृद्ध लोकपरम्परा, संस्कार आ पाबनि-तिहारक लेल प्रसिद्ध अछि। जितिया अथवा जीवित्पुत्रिका व्रत सेहो मिथिलाक एकटा महत्वपूर्ण पाबनि अछि, जाहिमे मायक ममता, त्याग, तपस्या आ संतानक मंगलक कामना एक संग देखबाक लेल भेटैत अछि।

आश्विन कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथिकेँ मनाओल जाएवला एहि पाबनिक अवसर पर मातृशक्ति अपन संतानक दीर्घायु, आरोग्य आ सुखमय जीवनक कामनासँ कठिन व्रत धारण करैत छथि। ई व्रत मात्र उपवास नहि, अपितु मायक निःस्वार्थ प्रेम आ समर्पणक प्रतीक अछि।

पौराणिक कथासँ जुड़ल आस्था

जितियाक परम्परासँ राजा जीमूतवाहनक कथा जुड़ल अछि। जीमूतवाहन दयालु आ परोपकारी राजा छलाह। एक बेर जंगलमे ओ एकटा वृद्धा नागिनकेँ अपन एकमात्र पुत्रक आसन्न मृत्यु पर विलाप करैत देखलनि। नागक प्राण बचयबाक लेल जीमूतवाहन अपन प्राणक परवाह नहि कऽ स्वयं गरुड़क समक्ष प्रस्तुत भऽ गेलाह।

जीमूतवाहनक निःस्वार्थ त्याग आ करुणासँ प्रभावित भऽ गरुड़ सत्य बुझलनि आ नागकेँ जीवन-दान देलनि। एहि कथामे त्याग, दया, करुणा आ प्राणिमात्रक रक्षाक महान संदेश निहित अछि। कालक्रममे एहि आख्यानक संग जीवित्पुत्रिका व्रतक परम्परा जुड़ि गेल।

मायक तपस्या आ विश्वास

जितियाक सभसँ पैघ विशेषता अछि मायक अटूट विश्वास। निर्जला व्रत करैत काल सेहो माँ अपन कष्ट नहि, संतानक मंगलक बात सोचैत छथि। मिथिलाक गाम-घरमे एहि अवसर पर व्रती महिला सभ कथा, पूजा-पाठ आ लोकपरम्पराक माध्यमसँ एहि पाबनिकेँ श्रद्धापूर्वक मनबैत छथि।

समय बदलल, मुदा जितियाक महत्त्व कम नहि भेल। ई पाबनि हमरा सभकेँ अपन संस्कृति आ जड़िसँ जोड़ैत अछि। मुदा एकर संदेश मात्र व्रत धरि सीमित नहि अछि। जीमूतवाहनक कथा त्याग आ परोपकार सिखबैत अछि, तँ मायक तपस्या प्रेम, समर्पण आ पारिवारिक उत्तरदायित्वक बोध करबैत अछि।

जितिया मात्र संतानक दीर्घायुक कामना नहि, अपितु एहि भावनाक पर्व अछि जे संतान सुखी रहथि, सन्मार्ग पर चलथि आ माता-पिताक आदर-सम्मान करथि। बेटा-बेटीमे भेद नहि करब, संतानकेँ समान स्नेह देब, परिवारमे प्रेम आ समाजमे सहयोगक भाव राखब—ई सभ जितियाक मूल भावनाकेँ आर सार्थक बनबैत अछि।

जितिया मायक हृदयमे बसल ओहि अनन्त प्रार्थनाक नाम थीक, जाहिमे माँ अपना लेल किछु नहि मँगैत छथि, अपितु अपन संतानक दीर्घायु आ सुखमय जीवनक लेल भगवानसँ प्रार्थना करैत छथि। जीमूतवाहनक त्याग आ मायक तपस्या मिलि एहि पाबनिकेँ त्याग, करुणा, आस्था आ ममताक अनुपम पर्व बना दैत अछि।

आब आवश्यकता अछि जे हम सभ एहि सांस्कृतिक धरोहरकेँ अगिला पीढ़ी धरि पहुँचाबी आ जितियाक मूल संदेश—प्रेम, त्याग, करुणा, संस्कार आ संतानक मंगल-कामना—केँ अपन जीवनमे धारण करी।

जितिया पाबनिक पावन अवसर पर समस्त मातृशक्तिक चरणमे सादर नमन।
माँ जानकीक कृपा सभ पर सदिखन बनल रहय।

जय मिथिला! जय मैथिली!

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