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प्रवीण नारायण चौधरी

अपन मिथिलाक साँझ आ शास्त्र-पुराण-वेद मे वर्णित संध्या केर महत्व

मिथिलाक लोकजीवन मे साँझ देबाक परम्परा   कहल जाइछ जे एहि धराधाम सँ वेद वर्णित विधान जँ लुप्त भऽ जाय, तँ मिथिलाक लोकजीवन मे स्थापित परम्परा केँ निभेला सँ वेद स्वस्फुर्त प्रकट भऽ जायत। जिनक जन्म आ लालन-पालन मिथिलाक लोकसंस्कार मे भेल ओ सब जनैत छी जे भोरे ब्रह्ममुहूर्त मे उठय सँ लैत नित्यकर्म सँ अपन मिथिलाक साँझ आ शास्त्र-पुराण-वेद मे वर्णित संध्या केर महत्व

छोट भाइ द्वारा जेठ भाइ केर पूरा परिवार केँ गोली मारिकय कय देल गेल हत्या, ई छल कारण

समाचार साभारः न्यूज १८ हिन्दी   मामिला कुशेश्वर स्थान थाना क्षेत्र केर उजुआ गाम केर थिक। जमीनी विवाद मे सहोदर जेठ भाइ सहित परिवारक चारि केँ कय देलक हत्या।   छोट भाइ द्वारा जेठ भाइ केर पूरा परिवार केँ गोली मारिकय कय देल गेल हत्या, ई छल कारण   News18 Bihar Updated: June 21, 2019, छोट भाइ द्वारा जेठ भाइ केर पूरा परिवार केँ गोली मारिकय कय देल गेल हत्या, ई छल कारण

मैथिली गजल – अहाँक सितम

मैथिली गजल – वंदना झा अहाँक सितम अहाँक सितम के की हम बात करू, अहाँक संगीत के की हम बात करू। ई जिनगी कटि रहल छई जहिना, अहाँक गीत के की हम बात करू। मानैत छी अपना के खुशनसीब कोनो, अहाँक रीत के की हम बात करू। करू नहि बात आब अहाँ अहिना, अहाँक प्रीत मैथिली गजल – अहाँक सितम

सगरो पसरल हाहाकार – सविता झा सोनी केर ई कविता बयान करैत वर्तमान आपदा सम समस्या केर

मैथिली कविता – सविता झा सोनी सगरो पसरल हाहाकार धरणी के हिय कोर कोर में फाटि रहल विस्मित बेमाय जल थल पोखरि झाँखरि उमरल अदौं संओ छल जे गेल बिलाए… त्राहि त्राहि जल बिनु मिथिला भेल नर नारी पशु जीवन इन्होर गाछ वृक्ष पंछी चुनमुनी सभ तड़पैत पीबय अपनहिं नोर… प्रकृति प्रदत्त वा दोष मनुष्यक सगरो पसरल हाहाकार – सविता झा सोनी केर ई कविता बयान करैत वर्तमान आपदा सम समस्या केर

के सब चलब सौराठ सभागाछी – के सब बचायब एहि अनमोल परम्परा केँ

सौराठ सभा सँ आमंत्रण   आइ २१ जून सँ ३० जून धरि सौराठ सभा लागि रहल अछि। एकर उद्घाटन सत्र अछि आइ। उद्घाटन समारोह केर भार आइ करीब २० वर्ष सँ डा. शेखर चन्द्र मिश्र केर नेतृत्व मे सौराठ सभा विकास समिति द्वारा कयल जाइत अछि। एहि अवसर महत्वपूर्ण अतिथि ओ सभैती लोकनिक सहभागिता होइत के सब चलब सौराठ सभागाछी – के सब बचायब एहि अनमोल परम्परा केँ

मिलाफ राजविराज केर साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान गाम-गाम मे श्रृंखला निरन्तरता मे

राजविराज सँ विद्यानन्द बेदर्दी जी केर अपडेट १५ जून २०१९। मैथिली जिन्दाबाद!! आइ मिथिला साहित्य-कला प्रतिष्ठान नेपाल ( MiLAF Nepal) द्वारा आयोजित मासिक मैथिली साहित्यिक तथा साङ्गितिक कार्यक्रम,श्रृंखला १९ श्री प वि मा विक प्राङ्गणमे मिलाफ नेपालक छिन्नमस्ता गाउँपालिका १ शाखा कार्यालयके अध्यक्ष अरूण कुमार यादव जीक अध्यक्षता,मैथिल मैक्स मुकेशक प्रमुख आतिथ्य आ विद्यानन्द वेदर्दीके मिलाफ राजविराज केर साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान गाम-गाम मे श्रृंखला निरन्तरता मे

नेपाल मे मैथिलीक आधुनिक पृष्ठपोषण आर राजविराजक मैथिली साहित्य परिषद

दू हजार छिहत्तरि सालः मैथिली साहित्य परिषदकलेल महत्वपूर्ण वर्ष – देवेन्द्र मिश्र मैथिली भाषाक उन्नयन आ संरक्षण–सम्बर्द्धन करएबला संस्थाक रुपमे मैथिली साहित्य परिषद राजविराजक अग्रणी स्थान अछि । एहि संस्थाकलेल विक्रम सम्वतक ई दू हजार छिहत्तरि साल दूटा दृष्टिसँ महत्वपूर्ण अछि । एकः एहि वर्ष २०७६ साल अषाढ दू गतेक दिन अर्थात काल्हि परिषदक स्थापना भेल पचास नेपाल मे मैथिलीक आधुनिक पृष्ठपोषण आर राजविराजक मैथिली साहित्य परिषद

अनुत्तरित प्रश्न – भाग २ः महाभारतक गांधारी संग आजुक स्त्री समाजक ज्वलन्त प्रश्न

अनुत्तरित प्रश्नः गांधारी – डा. लीना चौधरी अहाँ कखनो विचलित नइ भेलउं गांधारी अपन आँखि पर बान्हल पट्टी केँ मन पर बान्हैत? धृतराष्ट्र संग विवाह अहांक विवशता छल… अपन पिताक राष्ट्र और अपन लोकक प्राण रक्षा लेल। कियैक कि अहां बुझैत छलियैक जे हस्तिनापुर सं आयल प्रस्ताव केँ नइ मानबाक परिणाम अहांक राष्ट्र केर विनाश होयत। अनुत्तरित प्रश्न – भाग २ः महाभारतक गांधारी संग आजुक स्त्री समाजक ज्वलन्त प्रश्न

ब्रह्माण्डक बनावट आर सभक मालिक केर निवासस्थलक सहज वर्णन – रोचक आ पठनीय लेख

परमपिता परमेश्वरक धाम कोन ठाम अछि, मनुष्यक पहुँच ओतय धरि कियैक नहि – मूल लेखकः अनिरुद्ध जोशी ‘शतायु’ (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) एतय हम भगवानक नहि बल्कि ईश्वर केर, परमात्मा केर या ब्रह्म केर बात कय रहल छी। वर्तमान मे लोक ‘भगवान’ शब्द केँ ‘ईश्वर’ सँ जोड़ैते अछि ताहि सँ एहि लेख केर शीर्षक मे ब्रह्माण्डक बनावट आर सभक मालिक केर निवासस्थलक सहज वर्णन – रोचक आ पठनीय लेख

अपन-अपन कर्तव्य सँ परिचित रहि नीक-बेजा केर द्वंद्व सँ मुक्त रहब जरूरी

के नीक आ के बेजा नीक आ बेजा केर परिभाषा सामान्य सँ ऊपर सेहो एकटा होइत छैक। ओ थिकैक अपन-अपन दृष्टिकोण सँ केकरो नीक बुझब आ केकरो खराब बुझब। सामान्य समझ मे जे नीक-बेजा छैक से त छहिये। आब एकर मीमांसा मे प्रवेश करब त सामान्यतः पढनाय-लिखनाय केँ सब नीक कहैत छैक, बेजा कियो नहि अपन-अपन कर्तव्य सँ परिचित रहि नीक-बेजा केर द्वंद्व सँ मुक्त रहब जरूरी