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प्रवीण नारायण चौधरी

जुड़य अपना त आदर करय आन – ओकर कहानी जे संघर्ष कय धियापुता केँ ठाढ केलक

लघुकथा – रूबी झा बिलो रिक्सा चालक छलाह। दिन-राति मेहनत क अपन परिवार केर लालन-पालन करैत छलाह। ओ पाँच-प्राणी छलाह – अपने, कनियाँ आ हुनक दुटा बेटी आ एकटा बेटा छलैन। सब गोटे दिल्ली मे रहैत छलैथ। दिन बहुत नीक ढंग सँ बीत रहल छलैन। भगवान के लीला देखू, एक दिन शरीर हुनका धोखा द जुड़य अपना त आदर करय आन – ओकर कहानी जे संघर्ष कय धियापुता केँ ठाढ केलक

आइना सँ प्रश्न – मैथिली कविता

कविता  – ममता झा एतबा बता दे आइना   एतबा बता दे आइना जे हम तोरा देखैत छी या अपना केँ? तोरा देखी तँ हमरा अपन चेहरा देखाइछ तखन तोहर चेहरा केहेन छौक? एतबा बता दे आइना जे तूँ एतेक साफ कोना छँ? हम त अपना केँ तोरा मे देखैत छी, मुदा तूँ अपना केँ आइना सँ प्रश्न – मैथिली कविता

घर-घर केर कथा – एहनो होइत छैक सासु-पुतोहु

कथा – डा. लीना चौधरी गर्मी के छुट्टी छल। आमक मौसम छल। सब बच्चा क लक कनियाँ गांम ऐल छलीह। आंगन पैघ छलैन । चारिटा भइयारी रहइ छला। जखन हिनकर सभक मुखिया नइ रहला तखन सब के सोच छल जै आब ई सब बिखइर जैत । परंच मां और कनिया के सहयोग से बड़का बेटा घर-घर केर कथा – एहनो होइत छैक सासु-पुतोहु

हम तऽ झोंका छी हवा केर उड़ा लऽ जायब – मैथिली गजल

गज़ल   – गोपाल मोहन मिश्र   हम तs झोंका छी हवा केर, उड़ा लs जायब जागैत रहब, हम अहाँके अहीं सं चोरा लs जायब  मूर्ति के कदम पर भै निछावर, फूल कहलक खाक में मिलियो कs हम, अप्पन खुशबू लs जायब  हमरा मिटयबाक, भने भै जाय कोशिश कामयाब  तैयो मिटैत मिटैत हम, मिटबाक मजा हम तऽ झोंका छी हवा केर उड़ा लऽ जायब – मैथिली गजल

बेटो विवाह मे अपने खर्चा करब की – मधु बाबूक बेटाक दहेज मुक्त विवाह

मैथिली लघुकथा – रूबी झा बजलाह मधु बाबू हम शपथ खा बजय छी, अपन बेटा के विवाह में एको टका दहेज नहि लेब। बस हम जे बरियाती ल जायब तकर नीक जकाँ स्वागत क देथि कन्यागत। दू साँझ बरियाती हम सब रहबैनि, ई हकरल जौउ और डकरल आउ से हमरा नहि पसीन अछि। एक साँझ बेटो विवाह मे अपने खर्चा करब की – मधु बाबूक बेटाक दहेज मुक्त विवाह

नीकक संग सँ नीक आ खराबक संग सँ खराबे भेटत

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी श्रीतुलसीदास रचित रामचरितमानस मे गूढ सँ गूढतम बात बड़ा सहज परिभाषा – सोदाहरण बुझायल गेल अछि। बेसी पांडित्यपूर्ण भाषा मे कोनो तत्त्वक निरूपण जनसामान्य केर रुचि मे नहि आबि पबैत छैक। जनसामान्य सदिखन कमे मे बेसी ग्रहण करबाक लौल मे रहैत अछि। गम्भीरतापूर्वक कोनो गूढ बात केँ बेर-बेर मनन करब, नीकक संग सँ नीक आ खराबक संग सँ खराबे भेटत

स्नातक मे नामांकन आरम्भ, भाषाक विकल्प मे ५० अंक केर मातृभाषा मैथिली रखबाक सुझाव

विचार – प्रेम मोहन मिश्र स्नातक प्रथम खंड 2019 -22 के नामांकन प्रारंभ भ रहल अछि। भारतीय संविधान एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के त्रिभाषा फार्मूला केँ ध्यान में राखि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार कएल गैल पाठ्यक्रम के अनुरूप कोनो छात्र केँ प्रथम खंड में पांच पत्रक अध्ययन करबाक छनि। जाहि मे प्रतिष्ठा विषयक दू पत्र, अनुषांगिक विषय क स्नातक मे नामांकन आरम्भ, भाषाक विकल्प मे ५० अंक केर मातृभाषा मैथिली रखबाक सुझाव

ईमानदारीक संगे समझदारी सेहो जरूरी छैक – रूबी झा केर टटका लघुकथा

लघुकथा – रूबी झा मुरली बाबू (काल्पनिक नाम) तीन भाय छलाह। साझी आश्रम रहैन। दादाजी घर के मुखिया रहथिन और पिताजी पाँच भाय छलखिन्ह। सब गाम स बाहर रहै छलखिन्ह हिनक पिताजी छोड़ि क। पिताजी और दादाजी मिल क घर-गृहस्थी सम्हारै छलखिन्ह। दादाजी बहुत नामी-गामी और काफी समझदार व्यक्ति रहथिन्ह। दिन हिनक सभ के बहुत ईमानदारीक संगे समझदारी सेहो जरूरी छैक – रूबी झा केर टटका लघुकथा

रधिया आ शुगनी – मैथिली लघुकथा

लघुकथा – वन्दना चौधरी शुगनी दुए महीना के छेलै जखन ओकर पिता के देहांत भ गेलै अचानक। शुगनी के माय रधिया पर जेना पहाड़ टुइट पड़लै। कोना के अपना और अपना बच्चा के देखभाल करत आब अहि चिंता में छल, मुदा जीवन के ई कठोर सत्य छै और कहबी सेहो छै जे बड्ड दुःख में रधिया आ शुगनी – मैथिली लघुकथा

मालिकक खेत पर लालझंडा आ समझौता

कथा – डा. लीना चौधरी जमींदारी त खत्म भ गेल छल पर ओ अपने अपन आ बड़का भाई के हिस्सा जमींदारी अखनो बचा क रखने छला। बड़का भाई सब किछ हुनके पर छोड़ने छलखिन्ह। ओहो एक एक पाई के हिसाब क के भाई के हिस्सा देब में देर नइ करथीन। दुटा बेटा सपरिवार संग रहई मालिकक खेत पर लालझंडा आ समझौता