मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब
मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब युक्ति विभीषन सब सुनेलनि। चलथि पवनसुत विदाई लेलनि॥ कय वैह रूप गेला फेर ओहिठाँ। वन अशोक सीता रहथि जहाँ॥३॥ भावार्थ : विभीषणजी द्वारा (माता केर दर्शनक) सब युक्ति (उपाय) … मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब









