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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब युक्ति विभीषन सब सुनेलनि। चलथि पवनसुत विदाई लेलनि॥ कय वैह रूप गेला फेर ओहिठाँ। वन अशोक सीता रहथि जहाँ॥३॥ भावार्थ : विभीषणजी द्वारा (माता केर दर्शनक) सब युक्ति (उपाय) मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री हनुमान् विभीषण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित रामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌-विभीषण संवाद दोहा : रामायुध अंकित गृह शोभा बरन न जाय। नव तुलसीक बृंद ओतय देखि हरख कपिराय॥५॥ भावार्थ : ओ महल श्री रामजी केर आयुध (धनुष-बाण) केर चिह्न सँ अंकित छल, ओकर शोभा वर्णन नहि कयल जा सकैत अछि। ओतय नव-नव तुलसी गाछक समूह केँ मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री हनुमान् विभीषण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दकाण्डक मैथिली अनुवाद लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश नाना वृक्ष फल फूल सोहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए॥ सैल विशाल देखि एक आगू। ओहिपर दौड़ि चढल भय त्यागू॥४॥ भावार्थ : अनेकों प्रकारक वृक्ष फल-फूल सँ शोभित अछि। पक्षी आर पशु सभक समूह केँ देखिकय ओ मनहिमन मैथिली सुन्दरकाण्डः लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध

मैथिली सुन्दरकाण्ड – श्री तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध चौपाई : जामवंत के वचन सोहेलनि। सुनि हनुमंतक चित्त रमेलनि॥ ता धरि तूँ सब रुकिहें भाइ। रहिहें दुःखे कंद मूल फल खाइ॥१॥ भावार्थ : जाम्बवान्‌ केर सुंदर वचन सुनिकय हनुमान्‌जी केर हृदय मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध

मैथिली सुन्दरकाण्ड – मंगलाचरण

श्री तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्ड केर मैथिली अनुवाद अनुवादकः प्रवीण नारायण चौधरी प्रेरकः मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार ‘लेखक रमेश’  शेष सम्पूर्ण कृपा श्री सीताराम व श्री गौरीशंकर संग स्वयं पवनसुत हनुमानजी छथि। महाकवि तुलसीदास प्रति पूर्ण श्रद्धा आ समर्पण संग हुनक गुण-धर्मक अंश मात्र भेटि जाय अपने पाठक लोकनि केँ, यैह सोचि ई ‘मैथिली सुन्दरकाण्ड’ मैथिली सुन्दरकाण्ड – मंगलाचरण

मैथिली सुन्दरकाण्ड – समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध आर समुद्रक विनती – श्री राम गुणगानक महिमा

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद समुद्र पर श्री रामजी केर क्रोध और समुद्र केर विनती, श्री राम गुणगान केर महिमा दोहा : विनय नै मानय जलधि जड़ गेल तीनि दिन बीति। बजला राम सकोप तखन भय बिनु होय न प्रीति॥५७॥ भावार्थ:- एम्हर तीन दिन बीत गेल, मुदा जड़ समुद्र विनय मैथिली सुन्दरकाण्ड – समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध आर समुद्रक विनती – श्री राम गुणगानक महिमा

कि अहाँ सेहो मैथिली पत्रकार बनय चाहि रहल छी?

“मैथिली जिन्दाबाद पर सीधा लेखन लेल आफर”   दहेज मुक्त मिथिला समूह पर एक सँ बढिकय एक लेखिका आ लेखक सब केँ देखि मैथिली भाषा-साहित्य जगत मे काफी उत्साह अछि। फेसबुक पर लिखल लेख सब छिड़िया जेबाक खतरा अछि, बहुत लोक अपनहि पुरान लेख केँ ताकियो नहि पबैत छथि। एहि समस्याक समाधान लेल वेबसाइट पर कि अहाँ सेहो मैथिली पत्रकार बनय चाहि रहल छी?

मैथिली सुन्दरकाण्डः दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय दोहा : कि भेल भेंट कि फिरि गेला श्रवण सुयश सुनि मोर। कहे न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर ॥५३॥ भावार्थ:- हुनका सँ तोहर भेंटो भेलौक या ओ सब हमर सुयश सुनिकय मैथिली सुन्दरकाण्डः दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय

कवि प्रणव नार्मदेय केँ श्रद्धांजलि अर्पित करबाक लेल दरभंगा में सभा

19 जनवरी 2021, मैथिली जिन्दाबाद!! कवि प्रणव नार्मदेय केर काल्हि भेल असामयिक निधन सँ आहत मैथिलीप्रेमी व साहित्य जगत द्वारा लगातार शोक संवेदना प्रकट कयल जा रहल अछि। एहि क्रम में लेखक रमेश द्वारा फेसबुक सँ देल गेल जानकारी निम्न अछि। *मैथिली सृजन, दरभंगा* आइ दिनांक 19 जनवरी 2021 केँ मैथिली सृजन, दरभंगा द्वारा मैथिलीक कवि प्रणव नार्मदेय केँ श्रद्धांजलि अर्पित करबाक लेल दरभंगा में सभा

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्रीरामजी द्वारा समुद्र सँ रास्ता देबाक लेल प्रार्थना – लक्ष्मणजी द्वारा रावण लेल शुक मार्फत सन्देश

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद समुद्र पार करबाक लेल विचार, रावणदूत शुक केर एनाय और लक्ष्मणजी केर पत्र केँ लैत वापस जेनाय सुनु कपीश लंकापति वीर। कुन विधि तरब जलधि गंभीर॥ संकुल मगर साँप मत्स जाति। अति अगाध दुस्तर सब भाँति॥३॥ भावार्थ:- हे वीर वानरराज सुग्रीव और लंकापति विभीषण! सुनू, मैथिली सुन्दरकाण्डः श्रीरामजी द्वारा समुद्र सँ रास्ता देबाक लेल प्रार्थना – लक्ष्मणजी द्वारा रावण लेल शुक मार्फत सन्देश