छैठिक अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमक जगह पर साहित्यिक कार्यक्रम – आनन्द-आनन्द भेल

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

सच मे ई एकटा नया प्रयोग छल
 
उद्घाटन मे सहस्र-आवाज फटक्का फोड़ैत कवि गोष्ठी अध्यक्ष विभूति आनन्द

हमर गाम कुर्सों मे हरेक वर्ष छैठिक अवसर पर किछु न किछु सांस्कृतिक कार्यक्रम केर आयोजन होएत रहल अछि। हम अपन बाल्यकाल सँ एहि आयोजन सँ अपन जीवन पद्धति केँ कलासंपन्न बनबाक प्रेरणा दैत आयल छी। जखन आरो होशगर भेलहुँ त आदरणीय काका श्री मुक्ति नारायण चौधरी केर निर्देशन आ अपन परिवारक संग-संग विभिन्न परिजन-पुरजनक अलग-अलग उमेरक कलाकार, गायक, गीतकार, बजनियां, रंगकर्मी सब संग अभिनय, रंगकर्म, लेखन, गायन, जे संभव भेल सब करब शुरु कय देलहुँ – यैह प्रारंभिक शिक्षाक बदौलत आइ जे छी से छी – मंच पर ठाढ होयबाक किंवा अपन भावना केँ सजाकय कतहु परसबाक – ई सबटा ज्ञान ओहि परम्परा सँ भेटल। हमरा ईहो विश्वास अछि जे हमरो सँ पूर्व – अत्यन्त अदौकाल सँ ई परम्परा चलैत रहल जेकरा कारण संसारक कोनो भाग मे यदि हम मैथिल जनमानस आइ प्रवासहु केर बाध्यता खेपि रहल छी त अपन दम-खम पर आ सब क्षेत्र मे दोसरा केँ सिखाबयवला गुरुवर्ग मे छी।

 
कवि गोष्ठी आरम्भ पूर्व कार्यक्रमक शुरुआत अम्बिका, भावना आ देवांशी द्वारा भैरवि वन्दना ‘जय जय भैरवि असुर भयाउनि’ केर गान

वर्ष २०१७ – आयोजन रिक्त जायवला छल। गामक युवा सब परिस्थितिवश कोनो तैयारी नहि कयने छलाह। गाम पहुँचलाक बाद पता लागल जे एहि बेर हिन्दू-मुस्लिम रायट भेलाक कारण आ विभिन्न अन्य कारण सँ कोनो आयोजन गाम मे नहि होयत। आब आत्मा स्वयं जाहि आयोजनक आभार मानैत हो तेकरा करबाक लेल भले देहक खून केना नहि ऊबलत…. सुनैत देरी मोन मे आबि गेल जे किछु भऽ जाउक, मुदा कोनो आयोजनक परम्परा आखिर कियैक रूकत! बस सोचैत-सोचैत मार्गदर्शक गुरुदेव अजित आजाद भाइ केँ फोन लगेलहुँ आ सीधे पूछलियैन जे मुशायरा मैथिली मे संभव छैक कि…. ओ कहलैन जे ‘हमरा सभक राज मे किछु संभव छैक’। बिल्कुक यैह जोश केँ त हम सब कायल छी! बस फेर कि छलैक – नियारैत बेसीकाल थोड़े न लगैत छैक। मुशायरा आ मैथिली मे – यानि सिर्फ काव्य संध्या आ सेहो पूरा सप्तम स्वर आ ताल मे करबाक छल….. संगीत वादनक वगैर…! आ से सफल हेतैक, कि नहि हेतैक…. बहुत डरा रहल छलहुँ। गाम भरिक लोक केँ हकार त दय देलियैन, मुदा हुनका सब केँ नीक लगतैन कि नहि से डर बनल छल। आखिरकार २७ अक्टूबर साँझ मे ७ बजे सँ ई मैथिली मुशायरा शुरु भेल। आ तेकर बाद…. जेना कवि लोकनि शमां बान्हलखिन जे लगातार ३ घंटा धरि एक पर एक प्रस्तुति केलाक बादो लोक सभक मोन नहि भरलैन। मांग भेल जे वृहत् स्तर पर हो। हमर जेठ-श्रेष्ठ सब खुलेआम हमरा फटकारो लगौलनि – एतेक महत्वपूर्ण कार्यक्रम हम ओतेक संछेप मे कियैक रखलहुँ…. कियैक न ५ गामक लोक सब केँ जनतब करेलहुँ…. आरो पैघ मैदान मे कियैक नहि भेल…. आदि-आदि!

 
कवि गोष्ठीक संचालन उपरान्त अपन कविता रखैत समकालीन कवि अजित आजाद

आर, शेयर कयल गेल पोस्ट मे पढू स्वयं कवि गोष्ठीक अध्यक्ष आदरणीय विभूति आनन्द सर अपन भाव कतेक सुन्दर सँ रखलैन अछि। हम सब आभारी छी, समस्त गाम आभारी अछि – ऐगला वर्ष वृहत् स्तर पर आयोजन होयत से एखनहि सँ तय अछि। एहि बेर मात्र २ दिन के समय सँ तैयारी केने रही, जतबे संभव भेल…. त्रुटिक लेल क्षमा याचना करैत छी! एहि सम्मेलन केर सफलता मे गामक बुझनुक, विवेकी आ समर्पित युवा सभक प्रति विशेष कृतज्ञता प्रकट करय चाहब जे एकर महत्ता केँ आत्मसात करैत कार्यक्रम मे सब तरहक सहयोग कएलनि। मात्र २ दिनक समय आ ताहू मे छैठिक तैयारी सर्वोपरि बुझैत युवा लोकनि सिर्फ १ दिन मे सबटा तैयारी कय देलनि। गामक कमौआ बेटा मे चन्दा परिपाटी लगभग समाप्त भेल जा रहलैक अछि, लेकिन जनसहभागिता आ सभक योगदान कोनो न कोनो रूप मे लागब ओहि यज्ञक सफलता तय करैत छैक – से बुझि समस्त ग्रामीण एकजुट भऽ एहि महत्वपूर्ण कार्यक्रम केँ सफल बनौलनि। निश्चिते आगामी समय मे एकरा आरो वृहत् स्तर पर मनेबाक लेल सब आधार ठाढ भेल एहि बेर।

काव्य साँझ केर अध्यक्ष कवि विभूति आनन्द द्वारा अध्यक्षीय प्रस्तुति

गीत, कविता, हास्य आ प्रहसन – एहि ४ गोट रस मे प्रेमक गीत, विद्याक देवी सरस्वतीक वन्दना, मायक हाथक सोहारी बिना तरकारियो कोना नीक लगैत अछि तेकर बखान, दहेज मे सीधा किछु नहि लेब मुदा मांगक सूची घूमा-फिराकय कुटुम्ब लग कोना राखब तेकर बेजोड़ प्रस्तुति आ मैथिली प्रहसनक सम्राट अद्भुतानन्दक अद्भुत प्रस्तुति सब – हर तरहें गामक परिवेश मे ई साहित्यिक कार्यक्रम सँ लोक एतेक त निश्चिते प्रेरणा लेलनि जे अपन मातृभाषा मैथिलीक साहित्य बहुत गहिंर अछि, कवि लोकनि काफी महत्वपूर्ण कार्य करैत छथि आर एहि सँ मैथिली गीत-संगीतक दुनिया सेहो बपटूरा कहियो नहि होयत। आगामी समय मे एहि तरहक आयोजन सँ आरो उत्कृष्टता बढतैक से विश्वास अछि।

 
काव्य साँझ मे कवि लोकनिक सम्मान पाग-दोपटा सँ, सभाध्यक्ष गुरुवर रत्नेश्वर नारायण चौधरी कयलनि

हरिः हरः!!