मिथिलाक ऐतिहासिक बौद्धिक परंपरा पर आइपीएस विकास वैभव केर सान्दर्भिक विचार

आइपीएस विकास वैभव केर मिथिलाक ऐतिहासिकता-पौराणिकता केर आगाँ बढेबाक लेल युवा पर जिम्मेवारी होयबाक विचार

विचार

– विकास वैभव, आइपीएस

#मिथिला की ऐतिहासिक #बौद्धिक_परंपरा

क्षेत्र भ्रमण के क्रम में कुछ दिवस पूर्व मिथिला की सीमा पर स्थित राष्ट्रकवि #दिनकर के ग्राम सिमरिया के #गंगा तट पर स्वामी चिदात्मन #वेद #विज्ञान #अनुसंधान केंद्र में “मिथिला की ऐतिहासिक बौद्धिक परंपरा” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों के बीच अपने विचारों को रखने का अवसर मिला था । मेरे पैतृक ग्राम बीहट (बेगुसराय, बिहार) के निकट स्थित गंगा तट पर स्वागत के क्रम में मिथिला निवासी होने के कारण आयोजकों द्वारा पारंपरिक गणवेश धारण कर ही संबोधित करने हेतु अनुरोध किया गया । अपने यशस्वी पूर्वजों के गणवेश में सभा को संबोधित करना अपने आप में एक अनूठा अनुभव रहा । संबोधन के क्रम में मिथिला के बौद्धिक इतिहास और परंपरा पर विस्तार से चर्चा हुई ।

भारत में जहाँ विलुप्त #सरस्वती नदी के तटों को वेदों का उद्गम स्थल माना जाता रहा है वहीं मिथिला को #वेदांत की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है । उपनिषदों में मिथिला में नित्य आयोजित होने वाली बौद्धिक सभाओं का उल्लेख आता है जिसमें #याज्ञवल्क्य#मैत्रेयी#गार्गी और #जनक जैसे विद्वानों/ विदुषियों के विचार आज भी प्रेरित करते हैं । आदि#शंकराचार्य द्वारा भी जब कुमारिल भट्ट से उस समय के बौद्धिक तर्क में सक्षम विद्वान के बारे में पूछा गया तब पता मिथिला स्थित मंडन मिश्र के महिष्मती ग्राम का ही मिला । सदियों से अक्षुण्ण बनी रही मिथिला की बौद्धिक परंपरा आज अपने भविष्य के लिए युवा वर्ग की ओर देख रही है । मिथिला की ऐतिहासिक बौद्धिक #विरासत का भविष्य मिथिला के युवा वर्ग के कंधों पर है । मिथिला का युवा वर्ग भले ही अपनी बौद्धिक परंपरा पर गौरवान्वित हो सकता हो, परंतु चिंतनीय प्रश्न यह है कि क्या वह भविष्य में उसके अग्रतर विकास में अपना योगदान दे सकेगा ? क्या मिथिला की बौद्धिक परंपरा भविष्य में भी मानव प्रजाति का मार्गदर्शन करती रहेगी ?

आइपीएस विकास वैभव केर परिचय (हिनकर अपनहि शब्द मे)

As an IPS Officer from the 2003 batch of the Bihar Cadre, I have been fortunate to serve the Nation along with my home state of Bihar in several capacities.

Am presently serving as DIG, Eastern Range, Bhagalpur since 2nd May, 2017. My earlier postings have been as
AIG, Training (4.12.2015 to 30.4.2017), SSP, Patna, (23.6.2015 to 28.8.2015, and from 12.9.2015 to 3.12.2015), SP, Purnea (29.8.2015 to 12.9.2015), SP, NIA (National Investigation Agency), New Delhi, (5.12.2011 to 1.6.2015),
SSP, Darbhanga, (15.2.2011 to 28.11.2011), SP, Rohtas (4.8.2008 to 13.2.2011), SP, Bagaha (W. Champaran) (3.12.2006 to 2.8.2008), City SP, Patna (1.3.2006 to 23.12.2006), and earlier as ASP, Danapur (5.12.2005 to 1.3.2006) and ASP, Aurangabad (18.9.2005 to 5.12.2005).

Some of the Major Contributions I have made till date as a field officer include:-

– Sustained police and economic action over criminal gangs in Bagaha Police district resulted in surrender of several (25) criminals, and resultant total control in incidents of kidnapping for ransom. The district was earlier infamous for these incidents.

– Sustained operations along with community policing measures resulted in effective control of Maoist activities in Rohtas district.

– Made efforts to promote the Historic Rohtasgarh Fort as a Tourist Destination

– Ensured Free, Fair and Peaceful Lok Sabha (2009) and Vidhan Sabha (2010, 2015) in the districts of Rohtas and Patna

Apart from the hectic Police work, I have also been researching on hidden facets of Indian History in my spare time. You can follow my blog on Indian History at silentpagesindia.blogspot.in

I have also been penning down some of my experiences in the Field as a Cop at http://copinbihar.blogspot.in/

Milestones

इतिहास और मेरी यात्रा !

जीवन की इस यात्रा में मिलने वाले कई लोग अक्सर मुझसे मेरे इतिहास के प्रति प्रेम और जिज्ञासा के बारे में अत्यंत आश्चर्य से पूछा करते हैं I कई लोगों को यह स्वाभाविक नहीं लगता की पुलिस की सेवा में कार्यरत और पूर्व में आई आई टी, कानपूर से प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त किसी व्यक्ति का इतिहास से इतना गहरा लगाव भी हो सकता है I जब इस प्रश्न का उत्तर मैं देता हूँ तो मन में संतोष का भाव होता है चुकी मेरे लिए इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नहीं है I वास्तव में बचपन से ही रहस्यों को सुलझाने में मुझे बहुत आनंद मिलता रहा है और विद्यार्थी जीवन से ही एक कभी न बुझने वाली सी आतंरिक जिज्ञासा के कारण विज्ञान के रहस्यों के उद्घाटन के साथ साथ आध्यात्म, धर्म तथा बीते हुए समय के विस्मृत इतिहास जैसे अनेक रहस्यमय विषयों ने मुझे सदैव आकर्षित किया है I अपने देश के विस्तृत और पुरातन इतिहास को मैंने सदैव अत्यंत रहस्यमय पाया है जिसके अनेक विस्मृत पृष्ठ आज भी अपने सुक्ष्म रहस्यों को पूरी तरह समेटे हुए हैं I

जब मैंने विद्यार्थी जीवन में इतिहास पढ़ना प्रारम्भ किया तभी से मुझे ऐसा लगता था की कहीं न कहीं लोगों की समझ में कुछ कमी है और शायद मैं कुछ नए रहस्योद्घाटन करने में अपनी भूमिका निभा सकता हूँ I जब इतिहास के पृष्ठों में मैं और गहनता से प्रविष्ट होता गया तो मैंने पाया की आज के सन्दर्भ में इतिहास का हमारा ज्ञान जो लगभग अंग्रेजों के भारत आगमन के पश्चात करीब पिछले २०० वर्षों के दौरान किये गए अध्ध्यनों तथा शोधों पर आधारित है, वह अभी भी पूर्णतः परिपक्व नहीं है और नित प्रतिदिन हो रही नयी खोजों से नए आयाम प्राप्त कर रही है I इतिहास के अनेक रहस्य जहाँ अभी तक बिलकुल अनसुलझे हैं वहीँ उनके बारे में विभिन्न विचारधाराओं से प्रभावित इतिहासविदों ने भिन्न भिन्न परिकल्पनाएं की हैं और उन्हें मौलिक इतिहास के रूप में प्रस्तुत कर स्वीकार कराने का हठी प्रयास भी किया है I जहाँ कुछ परिकल्पनाएं कभी कभी सत्य के निकट सी प्रतीत होती हैं, वहीँ अक्सर नए खोजों से उनमे मुलभुत परिवर्तन होते भी देखा गया है I

दसवीं की परीक्षा में जहाँ गणित और विज्ञान में मुझे अत्यंत उत्कृष्ट अंक प्राप्त हुए वहीँ समाज विज्ञान में भी मुझे 97% अंक प्राप्त हुए जिसके कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मुझे विशिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ जो इतिहास के क्षेत्र में कुछ सकारात्मक योगदान देने के लिए मुझे आज भी प्रेरित करता है I उस समय दसवीं के पश्चात जब मैंने औपचारिक रूप से आगे पढ़ने के लिए विज्ञान के विषयों को चयनीत किया तब भी मैं यह चाहता था की इतिहास को भी एक विषय के रूप में साथ रख सकूँ I परन्तु उस समय की शिक्षा व्यवस्था में यह संभव नहीं था I ऐसे में मैंने तब ही यह निर्णय लिया था की इतिहास को भले ही एक विषय के रूप में न पढ़ सकूँ पर इससे मेरा जुड़ाव कभी कम नहीं होने दूंगा और जब भी खाली समय मिले तब मैं उन विस्मृत पृष्ठों में से कुछ रहस्यों का उद्घाटन करने का प्रयास करूँगा I

कालांतर में ऐसा ही हुआ I जहाँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी की पढाई कर औपचारिक उपाधियाँ प्राप्त करने हेतु मैं अथक परिश्रम कर रहा था वहीँ थोड़े भी खाली समय मिलने पर मैं इतिहास की गहराईयों में खोकर सुकून पाने का प्रयास करता था I अध्ययन के साथ साथ मैंने आस पास के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी प्रारम्भ किया जो एक जूनून के रूप में धीरे धीरे दावानल की तरह फैलने लगा I पुलिस की सेवा में कार्यरत होने के पश्चात इतिहास के विस्मृत पृष्ठों से और निकटता से साक्षात्कार हुआ विशेषकर वैसे अभियानों के दौरान जब अपराधियों या माओवादियों को ढूंढते हुए अक्सर वैसे स्थानों पर जाना पड़ा जो पूरी तरह वीरान हो चुके थे और जिन्हे लोग विस्मृत कर चुके थे I वैसे स्थलों पर भ्रमण के पश्चात उनके इतिहास के बारे में और जानने की इच्छा लेकर मैंने अनेक दस्तावेजों और ग्रंथों के अध्ययन करना प्रारम्भ कर दिया और मेरा ज्ञान बढ़ता सा गया I

करीब 4 वर्ष पूर्व मुझे ऐसा लगा की इतिहास के साथ जिस यात्रा का आरम्भ मैंने बाल्यकाल से ही किया था वह बहुत आगे बढ़ चुकी थी और अब यह समय आ गया था की अपने कुछ अनुभव मैं दूसरों के साथ भी साझा करूँ I तब इसके निमित्त अंग्रेजी भाषा में “#साइलेंटपेजेज” #SilentPages http://silentpagesindia.blogspot.in/ ब्लॉग लिखना मैंने प्रारम्भ किया जिसके माध्यम से अनेक जानकारियां मैंने लोगों के साथ समय समय पर लगातार साझा की हैं और वह क्रम आज भी सतत गतिमान है I इतिहास के विस्मृत पृष्ठों में से महत्वपूर्ण तथ्यों का और अधिक लोगों तक प्रसार करने के लिए अब मैं यह प्रयास भी कर रहा हूँ की पूर्व के सभी लेखों को हिंदी भाषा में भी शीघ्र अनुवादित कर साझा कर सकूँ I हाल में ही विलुप्त सरस्वती पर लिखा लेख इसकी शुरुआत थी जो अत्यंत सफल हुई प्रतीत होती है चुकी मैंने यह पाया की एक सप्ताह से कम समय मे ही 10,000 से अधिक लोगों ने उसे पढ़ा और कई लोगों ने उसपर टिपण्णी भी की I “#मूकसाक्षी” http://silentpageshindi.blogspot.com/ के नाम से वैसे लेखों को मैं धीरे धीरे श्रृंख्लाबद्ध कर लोगों के साथ साझा करता रहूँगा I इसके साथ ही अपने इस फेसबुक पेज के माध्यम से इतिहास के विस्मृत पृष्ठों के बारे में उभरते हुए नए तथ्यों तथा खोजों के बारे मे भी जागृति पैदा करने का प्रयास करता रहूँगा I

इतिहास के साथ मेरी यात्रा जारी है ….

 — with Rupesh MishraKameshwar PurijiBageshwar Pandey andSanjay Kumar.

 (साभारः विकास वैभव, आइपीएस केर फेसबुक पेज सँ)