मुक्ति यात्रा नाटक केर भेल विमोचन, पोथीपर लेखक दिलीप झा केर संछिप्त समीक्षा

मधुबनी। जुलाई ७, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

काल्हि विमोचित पोथी ‘मुक्ति-यात्रा’ मादे मैथिली लेखक ‘दिलीप झा’ केर विचार

‘मुक्तियात्रा’ युवा नाटककार आनंद कुमार झाक टटका नाटकक पोथी आयल अछि। काल्हि लोकार्पण भेल अछि। लोकार्पण मे हमरो जेबाक छल, मुदा जा नहि सकलहुँ। सबसँ पहिने एहि विलक्षण पोथीक हेतु शुभकामना आनंद जी कें। नाटकक पोथीक असली निष्पत्ति त’ मंचन भेलाक उपरांते पता लागत । नाटक के पढलाक उत्तर हमरा बुझबा मे आयल जे ई नाटक समकालीन विश्वक जे भयाबह समस्या अछि आतंकवाद ओकरा लक्ष्य केलक अछि। नारी स्वतंत्रता सेहो एहि नाटकक एकटा विषय अछि। दूटा महत्वपूर्ण विषय एक संगे उठेलानि अछि जे हमरा जनैत मंचीय दृष्टिकोण सँ रिस्क अछि ।

आनंद कुमार झा सामाजिक नाटक लिखैत रहलाह अछि। एकरो एक पाठकक रूप मे हम सामाजिक नाटक बुझैत छी। हमरा पोथी पढ़ैतकाल मानसपटल पर जे दृश्य उभरल से नाटक के अपन निष्पत्ति दिस ल’ जाइत अछि। भाषा सरल अछि। संवाद संप्रेषणीय अछि। कतहु-कतहु हिन्दीयाल वाक्य सभ खटकल अछि। रंगमंचीय संस्था सभ एहि समकालीन नाटक के संज्ञान लिए आ एकर शीघ्र मंचन हुए ताहि शुभकामना संग।