पत्नी पर निबंधः व्यंग्य प्रसंग परन्तु यथार्थ सँ कनिको भिन्न नहि
– बैजू बावरा (अनुवादक)
पत्नी नामक प्राणी भारत सहित समस्त विश्व में भेटैत छैथ। प्राचीन समय में इ सिर्फ़ भोजनशाला में भेटैत छली, लेकिन वर्तमान में इ शौपिंग मोल्स, थेटर्स व् रेस्टोरेंट्स के नजदीक टहलैत अधिक भेटैत छैथ। पहिले इ प्रजाति म लम्बा केश, सुन्दर आकृति व् पूरा वस्त्र प्रायः भेटैत छल। लेकिन आब छोट केश, अत्यन्त छोट वस्त्र, कृत्रिम श्वेत मुख, रक्त क सामान ठोर सामान्य रूप सँ देखल जा सकैत ऐछ। हिनक मुख्य आहार पति नामक मूक प्राणी छैन। भारत में हिनका धर्म पत्नी, भाग्यवती, लक्ष्मी आदि के नाम से जानल जाइत छैन। अधिक बजनै, अकारण झगड़नै, अति व्यय करनाइ एहि प्रजाति क मुख्य लक्षण थिकै। हलाँकि एहि प्रजाति पर सम्पूर्ण अध्ययन करब संभव नै, किन्तु सामान्यतः हिनक निम्न प्रकार होएत छैक:१. सुशील पत्नी: इ प्रजाति आब् लुप्त हुवऽ के कगार तक पहुँच गेल छैथ। एहि प्रजातिक प्राणी प्रायः सुशील व सहनशील होइत छलीह और घर में बेसी पाओल जाएत छलीह।
२. आक्रमक पत्नी: इ प्रजाति भारत सहित पूरा विश्व म बहुत अधिक मात्रा में भेटैत छैथ। इ अपन आक्रामक शैली, व तेज प्रहार के लेल जानल जाएत छैथ। समय एला पर इ बेलना, झाड़ू और चरण पादुका क सेहो उपयोग करैत छैथ।
३. झगडालू पत्नी: इहो प्रजाति वर्तमान में सब जगह मिलैत छैथ। हिनका जोर से बजनै व् झगडा करनाइ अत्यंत पसंद छैन। हिनक अधिकतर सामना सासु नामक एक और अत्यंत खतरनाक प्राणी सँ होएत छैन।
४. खर्चीली पत्नी: भारत एहेन गरीब देश में सेहो पत्नीक इ प्रजाति निरंतर बढैत जा रहल ऐछ। हिनक मुख्य आदत में क्रेडिट कार्ड रखनाइ, बिना विचार केने खर्च करनाइ और बिना जरूरत सामान खरीदनाइ छैन। इ प्रजाति क संग पति नामक प्राणी के चप्पल में थाकल हारल पाछु पाछु घुमैत देखल जा सकैत ऐछ।
५. नखरीली पत्नी: इ प्रजाति के प्राणी अधिकांश आइना के सामने ठाढ़ देखल जा सकैत छैथ। हिनक ठोर से रक्त के सामान लाल, नाख़ून बड़का बड़का, केश सतरंगी और चेहरा श्वेत पाउडर से निपल रहैत छैन्ह। हिनका भोजन शाला में जेनाइ और काज करनाइ काफी नापसंद छैन।
चेतावनी: पति नामक प्राणी के लेल इ प्रजाति के प्राण अत्यंत खतरनाक व आक्रामक होएत छैन। हिनका साड़ी, गहना, उपहार, फ्लावर्स आदि के द्वारा केवल किछेक समय के लेल नियंत्रित कैल जा सकैत ऐछ।

3 Comments
इ नारी के गरिमा गिराबय बला आ पुरूष वादी मानसिकता के अत्यंत निम्न रूप अछि।
राजन जी – व्यंग्य आ कटाक्ष मे सेहो जँ यथार्थ चरित्र-चित्रण कैल जाय त ओकरा नारीक अस्मिता सँ नहि जोड़ल जाय। आजुक यथार्थ अवस्था सँ ई लेख दूर नहि अछि आर एहि सँ नारी केँ सेहो अपन स्वत्वपर उठि रहल सवाल सँ नजरि खुलतनि। एकरा सकारात्मक रूप मे सब कियो ग्रहण करी। एहि मे लेखक आ अनुवादक केँ हतोत्साहित नहि कय सकैत छी हम सब। हरिः हरः!!
धन्यवाद प्रवीण भाई पोर्टल पर हमरो सनके अज्ञानी के जगह देबाक लेल