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न राधा केँ नौ मन घी हेतनि न राधा नचतीः प्रेमकान्त चौधरी

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विचार

premkant choudhary– प्रेमकान्त चौधरी, गुआहाटी, मैथिली-मिथिलाक प्रबल समर्थक एवं अभियानी

समस्त मैथिल, मैथिली प्रेमी, भाषा अनुरागी, राज्य अभियानी धरतीपुत्र मैथिलजन केँ नमस्कार।

पहिने साफ क दी की हम मिथिला राज्य के समर्थक छी, मातृभाषा स अटूट प्रेम अछि, मिथिला के सार्वांगीन विकाश केर समर्थक छी। मिथिला स 1000 कि मी के दुरी पर आसाम मे रहैत छी।

मान्यवर हम अप्पन बात किछु राखए चाहैत छी यदि एहन पैघ उदेश्य पर बात भ रहल छै आ किया ने ई सफल भ रहल अछि।

01. मिथिला राज्य के हेतु फुल टाइमर कार्यकर्ता चाही, जे नहि अछि।

02. मिथिला के चौहद्दी के अंतर्गत अबै बला गाम शहर मे संगठन, जे नहि अछि।

03. मिथिला राज्यक भाषा यदि मैथिली होयत त पहिने मैथिली के बचाओ, जे नहि भ रहल अछि।

04. गाम स ल क शहर तक चुन्ना स चुनैट क लाल रंग स लिखु की “मिथिला राज्य” एक वर्ष तक ताहि के बाद दोसर स्लोगन, जे नहि अछि।

05. हिंदी अखवार के द्वारा मिथिला के हरेक ज़िला मे विभेद करबैत अछि एकरा बंद केनाइ ओ मैथिली मे अखबार निकलैक एही के लेल बाध्य करि जे नै अछि।

06. मैथिली मे प्राथमिक शिक्षा मिथिलाक्षर स होय तकर आरम्भ केनाइ, जे नहि अछि।

07. हिंदी मीडिया के विरोध करि कियाकि हिंदीये मैथिली के खा रहल अछि की हम विरोध क सकैत छी?

08. मिथिलाक सम्पूर्ण नेता मैथिली में बात करैथ ताहि के लेल बाध्य क़ायल जय चाहे ओ कोनो पार्टी के होय।

09. मैथिलक बात करि जातिक नहि।

सबहक़ संग स संभव होयत आ अंत मे, राज्य भेटनाइ आसान नहि अछि तै हेतु उपयुक्त बात पर ध्यान द क शुरुआत, श्रीगणेश कयल जय, जय मैथिली, प्रेमकांत।

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