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कंटेंट क्रिएटर मूलतः समाजक दर्पण आ संवादक सेतु छथि

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लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- डिजिटल चौपाल पर चेतनाक दीप
(कंटेंट सँ चेतना धरि)

आबक समयमे समाजक चेतना केवल चौपाल, सभा आ मंच धरि सीमित नहि रहल। डिजिटल युगमे मोबाइलक छोट स्क्रीन एक नव चौपाल बनि गेल अछि, जतय विचारक आदान-प्रदान क्षणभरिमे लाखों लोक धरि पहुँचि जाइत अछि। एहि नव माध्यमक केन्द्रमे छथि कंटेंट क्रिएटर। हुनकर शब्द, चित्र, वीडियो आ विचार केवल मनोरंजनक साधन नहि, बल्कि समाजक सोच, संवेदना आ व्यवहारकेँ प्रभावित करबाक सामर्थ्य रखैत अछि।
एकटा सजग कंटेंट क्रिएटर अपन सृजनकेँ केवल लोकप्रियताक सीढ़ी नहि बनबैत छथि, बल्कि ओकरा सामाजिक जागरणक दीप सेहो बना सकैत छथि। हुनकर कलम कैमरा सँ जुड़ैत अछि आ कैमरा समाजक यथार्थकेँ संसारक सामने अनैत अछि।
परम्परागत पत्रकारिता आ साहित्यक अपन महत्त्व अछि, मुदा डिजिटल माध्यमक सहजता कंटेंट क्रिएटरकेँ सीधे जनमानस धरि पहुँचबाक अवसर देलक। गामक कोनो छोट समस्या, उपेक्षित कलाकारक प्रतिभा, लोकसंस्कृतिक कोनो बिसरल परम्परा अथवा समाजमे पसैर रहल कुरीति सभ किछु आब एकटा सजग क्रिएटरक माध्यमसँ व्यापक विमर्शक विषय बनि सकैत अछि।
कंटेंट क्रिएटर मूलतः समाजक दर्पण आ संवादक सेतु छथि । ओ जे देखैत छथि, ओकरा केवल देखाबैत नहि, बल्कि ओकर अर्थ, प्रभाव आ सामाजिक सन्दर्भकेँ सेहो सामने अनैत छथि।
दहेज, बाल-विवाह, नशा, लैंगिक भेदभाव, अन्धविश्वास, अशिक्षा, पर्यावरणक उपेक्षा ई सभ समस्या केवल कानूनसँ समाप्त नहि भऽ सकैत अछि। एकरा लेल आवश्यक अछि सामाजिक चेतना। एहि चेतना निर्माणमे डिजिटल कंटेंटक भूमिका अत्यन्त प्रभावशाली भऽ सकैत अछि।
एकटा सार्थक वीडियो, एकटा संवेदनशील लेख अथवा एकटा प्रभावकारी लघु-कथा हजारों लोकक सोच बदलि सकैत अछि। यदि कंटेंट क्रिएटर अपन लोकप्रियताकेँ सामाजिक उत्तरदायित्वसँ जोड़थि, तँ मनोरंजनक माध्यम सेहो परिवर्तनक माध्यम बनि सकैत अछि।
कंटेंट क्रिएटरक योगदानक एकटा महत्वपूर्ण पक्ष अछि भाषा आ संस्कृति संरक्षण। डिजिटल संसारमे जे भाषा अपन उपस्थिति दर्ज करबैत अछि, ओ भविष्यक पीढ़ीक स्मृतिमे सेहो जीवित रहैत अछि।
मैथिली लोकगीत, लोककथा, कहावत, पाबनि-तिहार, लोककलाक रूप, पारम्परिक भोजन, ग्रामीण जीवन-पद्धति आ मिथिलाक सांस्कृतिक संस्कारकेँ डिजिटल माध्यमपर स्थान देनिहार क्रिएटर वास्तवमे अपन माटिक स्मृतिकेँ नूतन पीढ़ीक हाथमे सौंपि रहल छथि।
माटिक गन्ध जखन डिजिटल शब्दमे उतरैत अछि, तँ ओ केवल सामग्री नहि रहैत ओ संस्कृति बनि जाइत अछि।
सोशल मीडियाक संसारमे नकारात्मकता बहुत शीघ्र फैलैत अछि। अफवाह, विवाद, कटुता आ सनसनीखेज सामग्री लोकक मनकेँ अशान्त करैत अछि। एहि परिस्थितिमे सकारात्मक, तथ्यपूर्ण आ प्रेरणादायक कंटेंटक आवश्यकता आरो बढ़ि जाइत अछि।

कंटेंट क्रिएटर अपन मंचक माध्यमसँ शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन, पर्यावरण-संरक्षण, महिला-सशक्तीकरण, युवा-प्रेरणा आ मानवीय संवेदनाक संदेश दऽ सकैत अछि। एकटा छोट संदेश ककरो जीवनमे आशाक दीप जरा सकैत अछि।
युवा पीढ़ी डिजिटल माध्यमसँ सर्वाधिक जुड़ल अछि। अतः सामाजिक परिवर्तनक संदेश यदि युवामन धरि पहुँचाबय चाहैत छी तँ डिजिटल भाषा आ माध्यमकेँ अपनाबय पड़त।
कंटेंट क्रिएटर युवा पीढ़ीकेँ केवल दर्शक नहि, बल्कि परिवर्तनक सहभागी बना सकैत छथि। हुनका शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, सामाजिक सेवा आ राष्ट्र-निर्माणक दिस प्रेरित कऽ सकैत छथि।
मुदा एहि शक्ति संग एकटा पैघ उत्तरदायित्व सेहो जुड़ल अछि। गलत सूचना, अतिरंजना, चरित्र-हनन, अश्लीलता अथवा सामाजिक विभाजन बढ़ेबाक सामग्री तत्काल लोकप्रिय तँ भऽ सकैत अछि, मुदा समाज लेल विनाशकारी सिद्ध भऽ सकैत अछि।
एहि कारणेँ कंटेंट क्रिएटर लेल सत्य, संवेदना, मर्यादा आ सामाजिक उत्तरदायित्व चारि आधार-स्तम्भ होबाक चाही। ‘कतेक लोक देखलक’ सँ बेसी महत्वपूर्ण प्रश्न ई होयबाक चाही ‘जे देखलक, ओकर मनमे की बदलल?’
सामाजिक उत्थान केवल सरकार, संस्था अथवा समाजसेवीक दायित्व नहि, ई प्रत्येक जागरूक नागरिकक साझा उत्तरदायित्व थिक। डिजिटल युगमे कंटेंट क्रिएटर एहि उत्तरदायित्वक एकटा प्रभावशाली वाहक बनि सकैत छथि।
हुनकर हाथमे कैमरा अछि, मुदा ओकर प्रभाव समाजक चेतनापर पड़ैत अछि, हुनकर हाथमे शब्द अछि, मुदा ओकर प्रतिध्वनि पीढ़ी धरि जा सकैत अछि। अतः कंटेंट क्रिएटर यदि अपन सृजनकेँ सत्य, संस्कार आ सामाजिक सरोकार सँ जोड़ि देथि, तँ हुनकर मंच केवल मनोरंजनक माध्यम नहि, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरणक दीपस्तम्भ बनि सकैत अछि।
सार्थक कंटेंट ओ नहि, जे केवल आँखि धरि पहुँचय;
सार्थक कंटेंट ओ थिक, जे आँखिसँ उतरि कऽ हृदय आ चेतनामे स्थान बना लैक।

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