लेख विचार
प्रेषित: सुष्मिता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- सामाजिक उत्थानमे कंटेंट क्रिएटरक योगदान
आजुक समय डिजिटल युग थिक। मोबाइल आ सोशल मीडिया आब मात्र मनोरंजनक साधन नहि रहल, अपितु विचार, जानकारी आ जनजागरणक प्रभावशाली माध्यम बनि गेल अछि। एहि माध्यमकेँ अपन सृजनशीलतासँ सार्थक बनौनिहार लोक कंटेंट क्रिएटर छथि। हुनकर एकटा पोस्ट, वीडियो, कथा अथवा विचार हजारो लोकधरि पहुँचि सकैत अछि। तेँ सामाजिक उत्थानमे हुनकर भूमिका महत्त्वपूर्ण अछि।
मिथिलांचलमे सेहो अनेक कंटेंट क्रिएटर अपन भाषा, संस्कृति आ समाजक मुद्दासँ जुड़ल सामग्रीक माध्यमसँ सकारात्मक योगदान दऽ रहल छथि। मैथिली कविता, कथा, साहित्य, लोकगीत, लोकसंस्कृति, पावनि-तिहार, मधुबनी चित्रकला, मिथिलाक खान-पान आ परंपराकेँ डिजिटल मंचपर प्रस्तुत कऽ ओ सभ नव पीढ़ीकेँ अपन जड़िसँ जोड़बाक काज कऽ रहल छथि। स्थानीय कलाकार, साहित्यकार, उद्यमी आ नवोदित प्रतिभाकेँ मंच देब सेहो एहि माध्यमक महत्त्वपूर्ण योगदान अछि।
कंटेंट क्रिएटर मिथिलाक ऐतिहासिक, धार्मिक आ पर्यटन स्थलकेँ देश-दुनियाक लोकधरि पहुँचाए स्थानीय पहचानकेँ मजगूत कऽ सकैत छथि। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण, स्वच्छता, रक्तदान, नशामुक्ति आदि विषयपर जागरूकतापूर्ण सामग्री समाजमे सकारात्मक चेतना उत्पन्न करैत अछि। विशेष रूपसँ आपदा अथवा बाढ़िक समयमे स्थानीय सूचना लोकधरि तुरंत पहुँचायब जनसेवाक रूप लऽ सकैत अछि।
सामाजिक कुरीतिक विरुद्ध जागरणमे सेहो कंटेंट क्रिएटरक भूमिका उल्लेखनीय अछि। एहि संदर्भमे दहेज मुक्त मिथिला एकटा महत्त्वपूर्ण उदाहरण अछि। ई अभियान दहेज प्रथाक विरुद्ध जनचेतना जगाबय आ दहेजमुक्त विवाहकेँ प्रोत्साहित करबाक प्रयास करैत आबि रहल अछि। अभियानसँ जुड़ल श्रीमती वंदना दीदी आ श्रीमान प्रवीण भाईजीक नेतृत्वमे सामाजिक जागरण, महिला प्रशिक्षण आ लेखनक माध्यमसँ लोककेँ जोड़बाक प्रयास सेहो उल्लेखनीय अछि।
दहेज प्रथा मात्र धनक लेन-देन नहि, अपितु बेटीकेँ बोझ बुझबाक मानसिकतासँ सेहो जुड़ल अछि। तेँ परिवर्तनक शुरुआत अपन घरसँ हेबाक चाही। न दहेज लेब, न दहेज देब—ई मात्र नारा नहि, अपितु प्रत्येक परिवारक सामाजिक संकल्प बनबाक चाही। बेटा स्वयं दहेज अस्वीकार करय आ बेटी पक्ष सेहो दहेज देबाक दबावकेँ स्वीकार नहि करय, तखने समाजमे वास्तविक परिवर्तन संभव अछि।
मिथिलाक महिला कंटेंट क्रिएटर सेहो अपन लेखनी, कला, उद्यम आ विचारक माध्यमसँ आत्मनिर्भरता आ जागरूकताक संदेश दऽ रहल छथि। एहिसँ महिला सभकेँ अपन प्रतिभा देखाबक मंच आ नव अवसर भेटैत अछि।
मुदा एहि शक्तिक संग जिम्मेदारी सेहो जुड़ल अछि। गलत सूचना, अफवाह अथवा मात्र लोकप्रियताक लेल बनाओल सामग्री समाजकेँ हानि पहुँचा सकैत अछि। तेँ कंटेंट क्रिएटरकेँ सत्य, संवेदना आ सामाजिक उत्तरदायित्वकेँ प्राथमिकता देबाक चाही।
अंततः कहल जा सकैत अछि जे मिथिलाक कंटेंट क्रिएटर मात्र सामग्री नहि बना रहल छथि, अपितु भाषा-संस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक जागरण आ सकारात्मक परिवर्तनक आधार तैयार कऽ रहल छथि। जखन डिजिटल सृजन सामाजिक सरोकारसँ जुड़ैत अछि, तखन शब्द मात्र शब्द नहि रहैत—ओ परिवर्तनक आवाज बनि जाइत अछि।
“अपन भाषा बचाबी, संस्कृति सजाबी, कुरीति मिटाबी आ समाजकेँ आगाँ बढ़ाबी—यैह थिक कंटेंट सृजनक वास्तविक सार्थकता।”
जय मिथिला जय मैथिली
