लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- श्री कृष्ण जन्माष्टमी केर महोत्सव
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पावनि मात्र एकटा धार्मिक अनुष्ठान नै, बल्कि ई मानव जीवनक श्रेष्ठता, शुद्धता आ सामाजिक समरसताक महाउत्सव थिक। मिथिलांचल में एहि पावनिक विशिष्टता आ एहि सँ भेटय बला शिक्षाक अपन एकटा अलग आ गंभीर महत्व अछि।
एहि पावनिक सब सँ पैघ विशिष्टता अछि भादव मासक अन्हरिया रातिक बारह बजे भगवानक जनमोत्सव मनाएब। ठंढा आ कनकनी क बीच लोक राति भरि जागि कऽ भजन, कीर्तन आ नचारी गबैत छथि, जे मन केँ असीम शांति दैत अछि।
मिथिला में श्रीकृष्ण केँ भगवान सँ बेसी अपन घरक बच्चा (ललना) मानि कऽ पूजल जाइत अछि। हुनक बाल-लीला सँ प्रभावित भऽ कऽ घर-घर में कन्हा केँ झूला झुलाओल जाइत अछि, जे मिथिलाक गंभीर पारिवारिक स्नेह केँ दर्शाबैत अछि।पावनि सँ कतेको दिन पहिने गामक कुम्हार आ कलाकार सभ माटि सँ शिशु कृष्ण, राधा, वसुदेव, देवकी जसोदा , वासुकी नाग, कंस, संगे विशेष क’ के नंदबाबा केर बड्ड पैघ सुंदर मूर्ति बनबैत छथि। ई मिथिलाक पारंपरिक शिल्पकला केँ जीवित राखबाक एकटा पैघ माध्यम थिक।
मिथिलाक फल के राजा मखान थिक। एहि पावनि मे कान्हा केँ माखन-मिश्रीक संग-संग मखानक खीर, पञ्जरी आ ऋतु फलक विशेष भोग लगाओल जाइत अछि, जे एहि क्षेत्रक कृषि आ खाद्य संस्कृतिक विशिष्टता थिक।
कंसक कारागार मे जन्म विपरित आ कठिन परिस्थिति मे होइछ । मुदा अपन सत्य आ धर्मक मार्ग जनि छोडू। अंत मे जीत सत्यक होइत छैक ।गोप-गोपी संग रास आ मित्र सुदामा संग मित्रता आ गोपी सभ संग प्रेम ई सिखाबैत अछि जे समाज मे जाति-पाति आ ऊँच-नीचक कोनो स्थान नै अछि। माखन चोरी लीला प्रतीकात्मक अछि, जे सिखाबैत अछि जे लोकक हृदय मे नुकाएल प्रेम रूपी माखन केँ चोरा कऽ संसार मे बाँटबाक चाही। कृष्णक जीवन संदेश अछि जे कनेको चिंता कएने बिना अपन कर्तव्य ईमानदारी सँ करू। कर्म सब सँ पैघ पूजा थिक।
मैथिल समाज मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमीक आस्था ई संदेश दैत अछि जे जखन-जखन समाज मे अधर्म, अत्याचार आ अहंकार बढ़ैत अछि, तखन-तखन ओकरा नष्ट करबाक लेल कोनो न कोनो रूप मे दिव्य शक्तिक आगमन होइत अछि। ई पावनि हमरा सभक भीतरक नकारात्मकता (कंस) केँ मारि कऽ सकारात्मकता (कृष्ण) केँ जगेबाक पावनि थिक।
