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कारागार ( जहल वा जेल)मे जन्म लेलथि जगतपति श्री कृष्ण

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लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :– श्री कृष्ण जन्माष्टमी

मिथिलामे समयानुसार बहुत रास तीज त्यौहार अबैत रहैत अछि।मुदा सभमे कोनो ने कोनहुँ गूढ़ रहस्य नुकाएल रहैत अछि।हरेक मौसम अनुसार उत्सव सेहो।ई पावनि सभ देखाउँसे नञि अपितु सभ इतिहास सँ जुरल अछि।सभ अपन संस्कृति आ संस्कारक धरोहर अछि।एहि मध्ये श्री कृष्ण जन्माष्टमी आस्था सँ मनाओल जाए वाला एकटा बहुत नीक पर्व होइत अछि। जन्माष्टमीक महत्त्व सिर्फ ताम-झाम या सर सजावट सँ नञि होइत अछि ई तऽ निष्ठा सँ मनाबऽ वाला एकटा सुन्दर सन मनभावन पर्व होइत अछि।

पुराणक अनुसार द्वापरयुग मे जखन पृथ्वी पर कंसक अत्याचार अत्यधिक बढ़ि गेल तखन भगवान भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथी कऽ कंसक कारावासमे देवकीके कोखी सँ जन्म लेलनि। हुनक पिता वसुदेव ईश्वर के कृपा सँ हुनका नंद गृह पहुँचाऽ ओतऽ सँ तत्काल यशोदा कोखी सँ जनमल योगमाया कऽ कारावास मे अनलनि।कंस हुनक हत्या करबालेल पत्थर पर पटकलक मुदा ओ हाथ सों उड़ैत आकाशवाणी कएल रे कंस तोहर काल जन्म लऽ लेलक।

आब कंस व्याकुल भऽ दैत्य के पठबैत रहल कृष्ण वध खातिर आ एहि क्रममे कृष्ण कतेको लीला कएल।जेना – पूतना उद्धार,अघासुर,वकासुर,कालिया नाग….इत्यादि।एहि क्रममे बहुत रास लीला गोपी ग्वाल संग सेहो केलनि।गाय चरौलनि,मक्खन चोरा कऽ खेलनि,ग्वालिनके मटकी फोरलनि,गोपिके चीड़ चोरेलनि,गोवर्धन पर्वत उठेलनि।एहि बीच राधा- कृष्णक अद्भुत प्रेम सेहो जग विख्यात अछि।राधा आ कृष्ण मे कोनहुँ अंतर नञि रहि गेल।एकटा मधुर मुरलीक आवाज सुनतहिं राधा संग सभ गोपि दौड़ल अबैत छल।शरद पूर्णिमाक राति श्री कृष्ण सभ गोपी संग एकै समय पर रास रचाओल।एखनहुँ धरि जखन प्रेमक चर्चा होइत अछि तऽ राधा- कृष्णक प्रेम सर्वोपरी रहैत अछि।

एखनहुँ लोग कृष्णाष्टमी बहुत श्रद्धा आ निष्ठा सँ मनबैत अछि।नियमपूर्वक एक दिन पहिने अरबा अरबाइन भोजन कऽ दोसर दिन कृष्णक जन्म काल तक निराहार रहि व्रत करैत अछि। जन्मक प्रातः काल नियम निष्ठा सँ भोजन कऽ व्रतक पारणा करैत अछि।लोक मेलामे जाऽ कृष्ण जन्मोत्सवक आनंद उठबैत अछि।ई आस्था आ विश्वाशक असीम उदाहरण अछि।

कृष्णक कथाके वर्णन असंभव अछि।जरासंध संग युद्ध आ रणछोड नाम परल मनमोहन के,सभा बीचमे द्रोपदी के लाज बचौलनि,महाभारतक युद्धमे स्वंय अर्जुन के सारथी बनि गीताक ज्ञान देलनि।मुदा एहि गीताक एक-एक पांति मनुक्खक जीवन सँ जोरल अछि।ई मनुक्खक जीवन असल सार अछि।गीता जीवनमे धारण करबा योग्य पुराण अछि।

कृष्णक जीवन सँ ई प्रेरणा भेटैत अछि जे अहाँ अपन गुण आ दोषक अवलोकन खुद करी। हम जे छी से देखेबामे कोनहुँ हर्ज नञि। वास्तविक जीवन सर्वोपरि।

 

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