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हमर मामा गाम –अहि जनम मे नै बिसरब ओ स्नेह

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लेख विचार
प्रेषित: पीतांबरी देवी
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- बच्चा मे मामा गाम

बात ओहि दिनक अछि जहिया फैमली प्लानिंग नहि होईत छल।कियो बुझितो नहि छल फैमिली प्लानिंग केकरा कहैत छैक।शहर मे रहू वा गाम मे भगवान जतवा बाल वच्चा देलनि सबटा हमर छि। सब के आठ नौ टा बच्चा रहैत छलै । ते हमहु सब छ भाई बहिन रहि। आर हमर मौसियो सब के नौ ,दस टा के बच्चा छलनि। मां हमर पांच बहिन छल आर मामा के सेहो आठ टा बच्चा छलनि। हम सभ सब बेर आमक समय मे नानी गाम जेबे करी। एकर कारण छल जे मामा के बेटा के उपनयन, बा मामा के बेटी के विवाह, बा केकरो बच्चा भेल, आर आमक मास मे स्कूलो बंद रहैत छल । मौसी सब सेहो अबैत छलि। हम सभ सब मिला के 42 भाई बहिन रहैत छलियै।जखनि हम सब खाई लेल बैसैत छलियै ते नानी करौछे करौछे भात दाली आर एकटा भुजिया एकटा झोर तरकारी अपनहि से परसय । जाबत अंतिम के दै छल ताबत पहिल परसन मागय लागय। नानी कहय अबै छियौ हल्ला नहि कर। आर अंत मे खुरचन से एक एक खुरचन दही सब के दैत छल। दिन राति दूनू साझ भाते बनैत छले । राति मे नानी नहि परसय मां मौसी सब परसथिन । हम सब खाय ली तखनि नाना मामा ओ भाईजी सब जे पैघ भय गेल छलाह हुनका सब के ठाव पीरहि लागनि आर थारी मे खेनाई परसि के देल जाइत छलनि।हमरा सब के केरा के पात पर खेनाई भेटय। भोर खन के चूरा,दही,आम जलखै भेटैत छल दही खुरचन से एक एक खुरचन असल बूझूते आम चूरा जलखै मे। एक मास हम सब नानी गाम मे रहैत छलौ। सबसे बेसी राति के सुतय काल पछवरिया असोरा पर एहि कोन से ओहि कोन तक बिछाओन होइत छलै आर सब धिया पूता सब सुतैत छल । ओहि मे ओढ़ना लेल तकिया लेल खुब झगरा होइ छल। भरि दिन हम सब कलम-गाछी से घर आर घर से कलम दौड़ा- दौड़ी करैत छलियै। आर सब बहिन मिल के कनिया पूतरा खुब खेलाइत छलियै। माटी धूरा से भात दालि, पात से तरकारी बना बना के बारी मे खुब खेल होइ । मास कोना बित जाइ से बुझबे नहि करियै। जखनि गाम से बैल गाड़ी आनय जाय ते भोकासि पारि के कानय लागि जाइत जे हम नहि जैब।सब धिया पूता के सैह हाल रहै । मौसी सब के सेहो बैल गाड़ी आबनि ते हम सब कानय लागियै। तहिया कोनो स्त्री गण वर संग डेरा पर नहि जाथि सासुरे मे रहथि। पूरूष कमाइ लेल कलकत्त- मुम्बई जाइत छलाह। ओहो बहुत कमे गोटा परदेश जाइत छल। नानी कानि -कानि के सब के सनेस -बारी ओरियाबै लागय। हमरा सब भाई -बहिन के नवका कपड़ा भेटय नानी गाम मे। आबय से दस दिन पहिनहि नाना दू थान कपरा अनैत छलाह। सब भाई के कमीज के कपड़ा आर सब बहिन के फ्राक के कपड़ा ।फेर दीलजान दर्जी अबैत छल आर सब के नाप लय के जाइ छल।आबय से दूर दिन पहिने सबटा कपड़ा सीबी के द’ जाइत छल। सब बच्चा अपन -अपन नाप के कपड़ा ल’ लैत छल। नाना पैंट बनले किन के आनि दैत छलाह । पुरुष के पुरखाही पैंट आर सबटा लड़की बच्चा के रबर लगलाहा पैंट। हमरा सब के ते नहि पैघ होइत छल लेकिन पूरूष बच्चा के पैघ पैघ पैंट के डराडोरी मे खोंसि -खोंसि के पहिरौल जाइत छलै। ओना दर्जी से हमरो सब लेल कहल जाइत छलै जे कने पैघे के नपहि आर एतबा पैघ फ्राक रहैत छल जे लगैत छल जे केकरो आन के पहिर लेलियै यै। अविस्मरणीय मधुर संस्मरण छल । परन्तु ई सुख आब कत्त’ पाओत? आजुक बच्चा! ओ समय त’ स्वर्णिम काल छल। आब तऽ किओ ककरो नै सोहाइ छै।

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