विराटनगर, १० अप्रैल २०२६ । मैथिली जिन्दाबाद !!
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२६ बस पैछला सप्ताहक शुक्र, शनि आ रवि दिन करैत तीन दिनक कार्यक्रम तारीखक हिसाब सँ ३, ४ आ ५ अप्रैल केँ मुम्बई केर मड आइलैन्ड मे सम्पन्न भेल अछि । एखन एहि साहित्यिक उत्सवक आवाज सँ उठल तरंग सामाजिक संजाल पर ओहिना देखल जा सकैत अछि । साहित्यक असर समाज पर एनाही पड़ल करैत छैक, तेँ कहल जाइत छैक जे साहित्य सँ संस्कार बनैछ आ संस्कारक सँ संस्कृतिक निर्माण होइत संस्कृति आखिरकार सभ्यता मे परिणत होइत छैक । मिथिला सभ्यता थिक । मैथिली भाषा थिक । मैथिलीक अपन साहित्य छैक । साहित्य पर विमर्श करबाक मुख्य साधन ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ छैक । एकर सकारात्मक प्रभाव सँ मैथिलीभाषी समाज किछु डेग आगू बढ़ि रहल अछि ।
परिणामोत्पादन मे एकटा महत्वपूर्ण विमर्श अभरल अछि जे मैथिलीक बात हिन्दी मे, किंवा नेपाली मे, अथवा अंग्रेजी कि आनहु-आन भाषा मे लिखल गेला पर किछु लोक मे बड़ा भारी प्रतिक्रिया होइत अछि । कियो एकरा सही मानैत छथि, कियो गलत कहैत छथि । चूँकि भाषाक आधार पर आजुक स्थिति बहुभाषिक जीवन पद्धति मे बहुल्यजन जिबय लेल बाध्य अछि, एकल भाषाक स्थिति आजुक प्रतिस्पर्धी संसार मे बिल्कुल नहि छैक । एहेन स्थिति मे मैथिली-मिथिलाक बात केँ आन भाषा मे लेखन कयल जेबाक एकटा समुचित सूत्र होयब आवश्यक अछि । एहि सन्दर्भित किछु बात राजेश कुमार झा, महासचिव, मिथिला राज्य निर्माण सेना सामाजिक संजाल मे कएने छथि । हुनका देल गेल किछु विचारक उतार निम्नानुसार अछि । मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक लेल ई उपयोगी लेख हो तेँ एतय पोस्ट कय रहल छी ।
चिठ्ठी प्रारूप मे –
प्रिय राजेश जी,
अहाँक एहि पोस्ट पर उचित ध्यानाकर्षण भेल । बात बुझबाक कोशिश करैत एहि पर किछु लिखबाक मोन भेल हमरो ।
अहाँ मात्र नहि, बहुत लोक हिन्दी लेखन पसिन करैत छथि । मैथिली आ मिथिलाक बात हिन्दी मे लिखल जेबाक चाही । तहिना नेपाल मे मैथिलीक बात नेपाली मे लिखल जाइत अछि । लिखल गेनाय जरूरियो छैक । एमएलएफ मे अनुवाद पर कतेक जोर देल गेलैक आ अनुवाद विधा भाषा सभक बीच केना सेतुक कार्य करैत छैक, केना सह-अस्तित्वक जीवनयापन कय रहल मिश्रित भाषाभाषी समाज आइ एक संग जीवन जिबि रहल अछि से यथार्थ सुस्पष्टे अछि । हमरा लोकनिक आँखिक सोझेँ मे अछि ।
कियो जखन मैथिलीक बात हिन्दी मे लिखैत छथि, त दुइ तरहक प्रतिक्रिया होइत अछि । नीक बात केँ लिखलनि, प्रचार-प्रसार कयलनि, प्रशंसनीय पक्ष लागल । दोसर, अपन घरक कमजोर पक्ष केँ आन भाषा मे आलोचना आ कि निन्दा आदिक बात लिखैत छथि जाहि सँ घरक बात बाहरक लोक केँ सुनाकय अपना केँ अपने नंगा करब समान लगैछ । ई बिल्कुल उचित नहि लगैछ । मन मे क्षोभ होइत अछि । जँ बुझय योग्य लोक छथि त इशारा मे बुझेबाक कोशिशो करैत छी ।
ओतहि जखन कियो मैथिलीक प्रचार-प्रसार हेबा योग्य बात-विचार हिन्दी-नेपाली-अंग्रेजी आदि आन-आन भाषा मे लिखैत छथि त प्रत्येक मैथिलक छाती गुमान सँ चौड़ा भ’ गेल करैत अछि । नीक लगैछ सब केँ, कम सँ कम अपन नीक चीज केँ वृहत् भाषिक समाज धरि लय गेलाह ।
मैथिलीक ओ बात जेकरा पढ़ला सँ मैथिलीक स्तरीयता-उत्कृष्टताक बारे बेसी लोक जानकारी हासिल करय, पढ़य, बुझय आ मैथिली प्रति सहयोग-सहानुभूतिक भाव पाबय – तेकरा सब भाषा मे लिखबाक चाही । आत्मसमीक्षाक कतेको रास बात, कमजोर आ निन्दनीय बात सब, अथवा अपना तरहें मात्र कोनो बात केँ बुझबाक आ तदनुसार विश्लेषण जाहि सँ बहुत लोक अस्वीकृतिक स्थिति मे हो, तेहेन बात सब आन भाषा मे लिखनाय शायद उचित नहि ।
हरिः हरः!!
श्री राजेश कुमार झाक लेख – साभार फेसबुकः (वगैर सम्पादन – जहिनाक तहिना उतारल गेल अछि)
