मिथिलाभाषा रामायणः मैथिली साहित्य मे निस्सन क्रान्ति
मैथिली साहित्यक इतिहास मे कविश्वर चन्दा झाक उल्लेख महाकवि विद्यापतिक मध्ययुगीन साहित्यिक योगदान उपरान्तक दोसर महत्वपूर्ण एवं क्रान्तिकारी योगदान देनिहार रूप मे पढ़ने रही । लिखल अछि –
With the advent of Chanda Jha (1831-1907) an era of awakening dawned in Maithili poetry. He revolutionised the whole realm of Maithili literature and infused new blood into the exhausted form of erotic mysticism.
– by Devkant Jha in his book “A History of Modern Maithili Literature”
(चन्दा झा (१८३१-१९०७) केर अयला सँ मैथिली कविता मे एकटा नव जान आयल । ओ मैथिली साहित्य केर सम्पूर्ण सम्राज्य मे क्रान्ति आनि देलनि तथा कामुक रहस्यवाद सँ थाकल-ठहियाअल हुए रूप मे नव प्राण भरि देलनि ।”)
देवकान्त बाबू द्वारा पुस्तक केर भूमिका मे सेहो लिखल गेल अछि –
Maithili literature long remained under Vidyapati’s spell; it was only with the advent of Manabodh in the eighteenth century and Chanda Jha that a new era started in Maithili.
(मैथिली साहित्य पर विद्यापतिक प्रभाव लम्बा समय तक रहल; अठारहम सदी मे मानबोध आर चन्दा झाक अयला बादे मैथिली मे एकटा नव युग आरम्भ भेल ।)
स्वतंत्रता उपरान्तक भारत मे मैथिली साहित्यक इतिहास लिखबाक साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा अढ़ायल काज केँ पूर्ण करैत ‘देवकान्त झा’ द्वारा लिखल गेल अछि । एकर प्रथम प्रकाशन २००४ मे कयल गेल । फेर २००७ मे रिप्रिन्ट कयल गेल । किताब अत्यन्त महत्वपूर्ण लेखा-जोखा आ मैथिली साहित्यक इतिहास पर विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत कएने अछि ।
लेखक देवकान्त बाबू पूर्व मे कयल महत्वपूर्ण काज सभक सन्दर्भ सेहो रखने छथि एहि मे । डा. जयकान्त मिश्र द्वारा मैथिली साहित्यक इतिहास पर कयल गेल कार्य, लेखन-प्रकाशनक चर्चा भेटैत अछि । ताहू सँ गहन शोध-खोज आ विस्तृत अध्ययन पर आधारित अछि ई मैथिली साहित्यक इतिहास जे साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित कयल गेल अछि ।
एहि इतिहास मे चन्दा झा द्वारा लिखल गेल “मिथिलाभाषा रामायण” केर सन्दर्भ दैत देवकान्त बाबू लिखने छथि –
Chanda Jha is credited with crowning success by modelling the epic in a folk-classical style. His monumental work is marked by epic sublimity and lyricism. It is remarkable in its depth and intensity, rhythm and melody, conflict and contrasts, suspense and surpasses.
(चन्दा झा केँ एहि महाकाव्य केँ लोकशास्त्रीय शैली मे ढालबाक लेल सर्वाधिक सफल हेबाक श्रेय भेटैत छन्हि । हुनक स्मरणीय कार्य महाकाव्यक महानता तथा गीतात्मकता सँ चिन्हल गेलन्हि । ई अपन गहिराइ आ तीव्रता, लय आ सुर, द्वन्द्व आ विरोधाभास, अनिश्चितता ओ उत्कृष्टता मे उल्लेखनीय अछि ।)
उपरोक्त सम्पूर्ण तथ्य आब आर बेसी सत्य रूप मे सोझाँ अभरल अछि । तखन जखन स्वयं ३ वर्ष निरन्तर एहि ‘मिथिलाभाषा रामायण’ केर गहन अध्ययन कयलहुँ, त इतिहासकार देवकान्त बाबूक लिखल बात अक्षरशः सत्य प्रतीत भ’ रहल अछि ।
लय आ सुर संगीतज्ञ केँ बुझल रहैत छन्हि । चन्दा झा अवश्य संगीतक बहुत पैघ जानकार रहथि, तेँ रामायण केर रचना तदनुसार कय सकलथि । आजुक समय साहित्य सँ रुचि रखनिहार गोटेक-आधेक लोक मात्र छथि जे संगीतक सम्पूर्ण जानकारी रखैत छथि ।
मैथिली मे छन्दबद्ध रचना कयनिहार कालीकान्त झा तृषित, डा. चन्द्रमणि, सियाराम झा सरस, दिगम्बर दिनमणि आदि नाम हमर निजी अनुभव मे आबि रहल अछि । तहिना संगीतक विशद् जानकार रूप मे सुनील मल्लिक, हरिनाथ झा, श्यामसुन्दर श्याम, आदि चर्चित व्यक्तित्व हमर संज्ञान मे आबि रहल छथि ।
आबयवला पीढ़ी लेल ‘मिथिलाभाषा रामायण’ केर गेय रूप भेटौक ई सदिच्छा अछि । बहुतो बेर पहिनहुँ आग्रह-विनय कएने छी । हाल आदरणीय सुनील मल्लिक भाइजी सँ एहि सन्दर्भ मे अनुरोध कयल अछि । तहिना आदरणीय सियाराम झा सरस सँ सेहो जनकपुर भेंटक दरम्यान अनुनय-विनय कयल जे अपने छन्दक नीक जानकार छी, गबितो छी, एहि पुनीत उद्देश्य मे सहायक होउ । अपन जीवनकाल मे जँ ई सम्भव होयत त हम एहि लेल सब तरहें आगू रहब, मिलिजुलि ई काज पूरा कयल जाय । फेर सँ सभक ध्यानाकर्षण लेल ई लेख लिखल अछि ।
एहि बीच सम्पूर्ण रामायणक वर्तमान मैथिली रूप भावानुवाद पंडित गोविन्द झाक कृति ‘मिथिलाभाषाक हिन्दी अनुवाद’ सँ सहयोग लैत पूरा कय लेल अछि । लगभग ६०० पृष्ठक पुस्तक तैयार अछि । प्रकाशन मे सहयोगी भेटता त अवश्य प्रकाशन करब । ॐ तत्सत् !!
हरिः हरः!!
