मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर विशेषता
मैथिली भाषा-साहित्य केँ हृष्ट-पुष्ट कयनिहार दिवंगत स्रष्टा लोकनि केँ श्रद्धाञ्जलि शब्दक वाचन संग शब्द-श्रद्धा-सुमन अर्पित करब बड पैघ विलक्षणता लगैत अछि । विडम्बना ई जरूर लगैछ जे स्रष्टा सभक जिबिते हुनकर सृजित साहित्य पर लोकचर्चा कम भेल करैछ मैथिल समाज मे । सब अपनहिं गुमान आ निजकर्तव्य-कर्मक अहंताक भार मे दबल, साहित्यिक सृजन मे जीवन खपेनिहार सर्जक केँ कतेक पढ़ैछ, नहि पढ़ैछ… प्रकाशित पुस्तक कतेक दूर धरि पहुँचि पबैछ… से सब कमजोर अवस्था मे रहितो ‘एमएलएफ’ द्वारा शब्द-श्रद्धाञ्जलि अर्पित करब निश्चय हमरा लोकनिक दिवंगत साहित्यकारक कृतित्व ओ योगदानक मादे अति विशिष्ट चर्चा करैछ । आर ई काज शुरुए मे कयल जाइछ तेँ एकर महत्व आर बेसी व विशेष लगैछ हमरा-अहाँ सब गोटा केँ । एहि वर्ष कीर्तिनारायण मिश्र, अग्निपुष्प, उषाकिरण खा, भवेशचन्द्र शिवांशु, श्रीपति सिंह, डा. शिवेन्द्र दास, शरदिन्दु चौधरी, अमरनाथ मिश्र, शिव कुमार नीरव, कृष्णचन्द्र झा रसिक आदिक प्रति श्रद्धाञ्जलि अर्पित कयल जेबाक नियारक जनतब आयोजक करौलनि अछि ।
औपचारिक उद्घाटन समारोह मे सेहो एकटा निश्चित थीम रहल करैछ । सब किछु बान्हल समय भीतर कयल जायब आ घड़ीक सुइया पूर्वसूचित शेड्यूल अनुरूप भेल करैछ । जा धरि महान स्रष्टा श्याम दरिहरे छलथि, एकल विलक्षणता अलगे आनन्द दैत छल । ओ पुलिस कप्तान (एसपी) सेहो रहल छलाह, तेँ हुनकर ओ पुलिसिया अन्दाज मे समय सीमा, मर्यादा ओ अनुशासनक संग प्रस्तुति अलगे गुदगुदी आ स्फूरणा प्रदान करैत छल । हालांकि आब जे कियो ई जिम्मेदारी निभबैत छथि तिनको उपर दरिहरेजीक आत्मा स्वाभाविक आवेश (चार्ज) उत्पन्न कय देल करैत छथिन, कारण श्रेष्ठक निर्धारित मार्गहि पर अनुगामी लोक अनुकरण कयल करैछ । कहबी छैक न – महाजनो येन गताः स पन्थाः !
विषय-विमर्शक चयन सेहो विलक्षण भेल करैत अछि । परिकल्पनाकार लोकनि केँ जतेक धन्यवाद करब से कम होयत । वैश्विक मानदंड पर मैथिली केँ ठाढ़ करबाक मूल परिकल्पना अनुरूप नव पीढ़ी लेल कोना आकर्षण आ जुड़ाव बढ़त तदनुरूप भेल करैछ विषय-सन्दर्भ सब । अन्यान्य भारतीय भाषा सँ तुलना करैत वक्ता मार्फत मैथिलीक भूत, वर्तमान व भविष्यक चिन्तन कयल जाइछ । ई सिद्ध करैत अछि जे हम-अहाँ केकरो सँ कम नहि छी । तैयो समाज मे धियापुता संग मखरि-मखरि हिन्दी भाषा किंवा नेपाली भाषा मे तुष्ट हेबाक हविगति किनको होय त हम-अहाँ कि कय लेब ? ओ पोपसाहेब सब पोप बनल रहथु, धरि एमएलएफ ई अवसर दैछ जे निजता प्रति मानबोधक संकल्प सब कियो लेथि ।
साहित्यक संग सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक पक्ष सब पर सेहो छूबैत रहैछ निर्धारित विषय । हालांकि नेता सब केँ मंच पर नहि चढ़ायल जाइछ – पता कयलहुँ त पता लागल जे नेता सब सँ घोर असन्तुष्ट छथि मैथिली लेखक-साहित्यकार समाज । कहियो चउ अलगिते नहि छन्हि सदन मे, सड़क पर आ कि आइ-काल्हिक सामाजिक संजाल पर । फेर लहरिया लूटय लेल नेता केँ मंच पर आबि मखरय देबाक कोनो प्रयोजन नहि । टका-पैसा सेहो जखन लेखके समाज अपन लगानी करत, राज्यक प्रायोजन मे मैथिली भाषा-साहित्यक उत्थान हेतु ई लोकनि कोनो योगदान करबे नहि करता – त मैथिली एहेन पुत्तर सब सँ निपुत्तर सही ! ॐ तत्सत् !
आब कार्यक्रम बम्बइ मे हो आ बम्बइया फिल्मी सेट केर साज-सज्जा नहि हो त फेर स्वर्गीय सुमित मिश्रक आत्मा दुःखी भ’ जायत । मर्दक बेटा जेकाँ काज कएने रहथि, मुदा नहि जाइन ओहेन मर्द आदमी कोना डरा गेला जीवन सँ आ कय लेलनि आत्महत्या । मोन नहि मानैत अछि, लेकिन ई कठोर सत्य प्रवीण मानैत अछि । कखन किनकर मन केहेन होयत से के कहत ? खैर… हुनका श्रद्धाञ्जलि दैत एहि बेरुक एमएलएफ मे केहेन फिल्मी सेट लागत ओहो देखनुके होयत ।
दिल्ली है दिलवालों की आ बम्बइ है पैसेवालों की ! ओतय जे खाना बनबयवाली गामवाली सब रोटी, आलू सन्ना, कचड़ी, बरी, भटबर, तिलकोर सब तरैत अछि – गरम-गरम चाह बनबैत आ पियबैत अछि – कतेक वर्णन करू । लोक सब खूब खाइतो छथि आ भोर-साँझ बगले समुन्दर केर बिच पर टहलि-टहलिकय शेल्फीक जुल्फी उड़बैत कुल्फी, नारियल पानी, आदिक ‘लुत्फ’ सेहो उठबैत छथि । त, एमएलएफ मुम्बई केर विशेषता बहुते होइछ, बेसी लिखला पर कहाँ दिना लोक सब आयोजक केँ फोन कय-कय ‘हमरा-त-हमरा’ मौका दिय’ तंग करैत छथिन । बेसी लिखय पर सेन्सरशिप लागल अछि, तैयो रहल नहि जाइछ त कि करू… लिखि देलहुँ । जानब अपने सब ।
भेटैत छी बाकी प्रत्यक्षे – मुम्बइकर सब सँ मुम्बइ मे ३, ४ आ ५ अप्रैल २०२६ केँ ।
हरिः हरः!!
