लेख विचार
प्रेषित: प्रिया झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- मैथिल विवाह मे जयमाल
#विषय-#संयुक्त परिवार
आब सभ एकल परिवार मे रहय छी,संयुक्त परिवार मे नञि रहय छी । छोट परिवार भऽ गेल ।पहिलुक जकाँ नञि रहल व्यवस्था परिवार के बदलि गेल…….!
पहिने तीन पीढ़ी परिवार संगे रहय छलैथ । ई सझिया परिवार मे सुख बड़ छल मुदा आब नञि देखल जा रहल अछि । बाल बच्चा के पालन पोषण सँ लऽक विवाह दान तक मे सुविधा रहैत छल ।
आर्थिक सामाजिक सहयोग के अलावा संस्कृति संस्कार के आदान प्रदान के सुंदर व्यवस्था रहैत छल ।
संयुक्त परिवार मे आपसी सहयोग आ आत्मीयता भेटैत छल जे आब नञि देखवा मे भेटैत अछि ।
बच्चा सभ एक संग तीन सँ चारि पीढ़ी संग रहला सँ बहुत किछु सीखैत छलैथ जे आब नगण्य भऽ गेल ।
कखनो एकसर रहय के मौका नञि भेटैत छल सभ काज करतेवता वा कोनो तरहक काजक भार नञि रहैत छल , मिलिजुलि कऽ काज भऽ जाइत छल।
विशेषता तऽ छलय ई परिवार के मुदा दोष तऽ सभ किछु मे तकला पर भेटैत अछि ,सभहक सोच अलग तऽ रूसा फुल्ली होइत रहय,मुदा बड़ रमनगर समय छल संयुक्त परिवार के जे आब सपना सन भऽ गेल ,ना ओ नगरी ना ओ ठाम……!
हाल रोजगार एकठाम नञि रहला सँ आ समयानुसार सभ किछु बदलैत अछि तऽ समय बदलल आ ई समय के महत्व के विषय मे सभ बुझि रहल छी जे ई सझिया परिवार कतेक महत्वपूर्ण रहैत छल ,ककरो पर कोनो बेसी कार्यक भार नञि रहैत छल आ सबटा काज भऽ जाइत छल ।
एक दोसर मे सामंजस्य राखि जँ चलि तऽ सबसँ बढ़िया व्यवस्था छल। अखनो बहुत घर मे संयुक्त परिवार अछि जे मिलीजुली अपन परिवारक पालन पोषण करय छैक सामाजिक आथिर्क आ सांस्कृतिक सभ आयोजन बड़ नीक सँ संपन्न होइत अछि ।
प्रिया झा
