लेख विचार
प्रेषित: आशा चौधरी
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- संयुक्त परिवार
मतलब जे साझी परिवार
पहिलुक एकटा कहावत छलै जे दस सेरे नै नितराइ दस समांगे नितराइ। यानी कतबो धनिक छी आ परिवार छोट अछि तऽ नै घमंड करू अगर परिवार पैघ अछि तखन घमंड करू।
संयुक्त परिवार के लाभ –
दुख सुख मे एक दोसर के देखभाल कैलक।
परिवार मे एकटा नहिंओ कियो कमाइत छलै तकरो बाल बच्चा पोसा जाइत छलैक।
मुरन उपनयन बियाह दान सब साझिए सँ भऽ जाइत छलैक।
सबहक कमाई एक जगह भेल तऽ आगू तरक़्क़ी भेल जमीर जथा किनल गेल।
सब अनुशासन मे रहल।
छोट बच्चा के दादा दादी काका काकी सबहक स्नेह भेटल।
गामक लोक जल्दी पंगा नै लेलल कारण जे ओ अपने जेरगर अछि।
और बहुत रास फायदा छै।
संयुक्त परिवार के हानि
संयुक्त परिवार मे महिला सबके बड कष्ट रहै भरि दिन चुल्हा पजरले अछि कतबो बनाकय राखि दियौ खायकाल मे
ककरो बुट्टी ककरो झोर ककरो आँखि सँ खसै नोर।
कोनो जरूरी परल त अपना मोन सँ खरीद नै सकै छी जाबत गार्जियन नै किनकय देता। मोनक बात मोने मे रहि जाइत छलैक। शासन बड रहै छै संयुक्त परिवार मे। ककरो घुमय के आज़ादी नै रहै छै।
एहन बहुत रास बात छै जेना बिमार परल तऽ है इलाजो के लेल मुँतक्की मे परल अछि। कोनो नीक नुकुत खाय के मोन भेलै तऽ सुलभ नै छलै।
अढाहिस बड छलै। संयुक्त परिवार मे बड्ड लाभ छल परंतु बड्ड कलह केर संभावना सेहो रहैत छलै
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