लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- मिथिला” संयुक्त परिवारक जीवंत दर्शन (सामाजिक–सांस्कृतिक विश्लेषण)
घर-आँगनक फूल सुवासित, आऽ संग-स्नेहक नेहक रंग,
मिथिला में संयुक्त परिवार, जीवनक सततम धड़कन अंग।
“मिथिला” ज्ञान, कला, लोकपरंपरा आऽ सांस्कृतिक मर्यादाक भूमि हमेशा सँ पारिवारिक एकता आऽ सामाजिक संतुलनक प्रतीक रहल छल। मिथिलाक समाजक आधार स्तम्भ संयुक्त परिवार मानल जाइत छल, जतय कतेको पीढ़ी एकहि छाँह तर सह-अस्तित्वक सूत्रमे बन्हल रहैत छल। अपन अलग पहचान, बोली-व्यवहार आऽ मर्यादा-मान्यता केँ बनेने रखबाक सबसँ पैघ माध्यम यैह संयुक्त परिवारक व्यवस्था रहैत छल।
मिथिला मे संयुक्त परिवार मात्र रक्त-संबंधक समूह नहि, बल्कि दायित्व, संबंध, कर्तव्य, साझा श्रमक, आऽ परस्पर स्नेहक साझा इकाई मानल जाइत छल। एहि प्रणाली में दाई-बाबा, माय-बाबू, कक्का-काकी, भैया-भौजी, भतिजा-भतिजी, सब मिलिकए एक सुसंगठित सामाजिक-आर्थिक इकाई बनबैत छलथि।
मिथिला मे संयुक्त परिवारक ऐतिहासिक आधार बहुत गहिर छल।
मिथिला मे मूलतः कृषि आधारित जीवनशैली छल। ज़मीन सँ जुड़ल श्रम वितरण, खेती-बारी, पशुपालन ई सब संयुक्त श्रम पर निर्भर रहैत छल।
एतऽ भूमि-सहभोज सिद्धांत के अनुपालन सहजहि देखल जाइत छल। मिथिलाक परंपरा मे “संग खाउ, आऽ संगे रहू” जीवनक मूल मन्त्र छल।
मिथिला में सांस्कृतिक–वैदिक प्रभाव सेहो छल।
आदर्श परिवारक रूप मे जनक-सीता आऽ रामायण के प्रसंगक विशेष प्रभाव छल। कुटुंब आधारित सामाजिक सुरक्षा बुजुर्ग, विधवा, अनाथ, विद्यार्थी सब केँ जीवन-निर्वाह संयुक्त परिवार करैत छल। नारी सम्मान आऽ सुरक्षाक तऽ बाते जुनि पुछी। मिथिला मे कन्यापूजन, मातृ-पूजा, आऽ स्त्री गृह-धुरीक परंपरा संयुक्त परिवारमे अधिक सुरक्षित रहल।
संयुक्त परिवारक प्रमुख विशेषता छल।सामूहिकता आऽ परस्पर निर्भरता जेना कि
मिथिलाक लोक केँ “हम” भाव ज्यादा प्रिय छलैन्ह। खेत मे संग संग काज, विवाह भोज मे सामूहिक व्यवस्था, आऽ आपत्ति मे एक-दोसराक सहारा ई जीवनशैली संयुक्त परिवारक रीढ़ छल।
मर्यादा आऽ परंपराक प्रवाह छल। संस्कृति, बोली, लूरि-व्यवहार, मिथिलाक रीति, संस्कार संयुक्त परिवार व्यवस्था द्वारा पीढ़ीदर पीढ़ी सुरक्षित रहल। उदाहरण मधुर मैथिलि बजबाक संस्कार, व्रत–उपवासक परंपरा। पारंपरिक गीत कजरी, समा-चकेबा, झिझिया सब संयुक्त परिवार मे सीखल जाइत छल।
आर्थिक सुरक्षा भेटैत छल जेना कि संयुक्त परिवार मे श्रमशक्ति ज्यादा होइत छल।खेती-बारी, दाना-पानी, माल-जाल, व्यापार, साझा परिश्रम सँ अधिक उपज आऽ बचत होइत छल।
नैतिक मूल्य आऽ जीवनक अनुशासन बनल रहैत छल। मिथिला मे दाई-बाबा नैतिक मूल्यक पहिल शिक्षक छलाह। अनुशासन, आदर, परोपकार, आऽ सामाजिक जिम्मेदारी
ई सब परिवारक दैनिक जीवन में सीखल जाइत छल।
संयुक्त परिवारक सामाजिक लाभ सेहो छल जेना कि बच्चाक संस्कार, नेनपन में लोकगीतक गायन सिखब, संस्कार, कथा-उदाहरण सब किछु बुजुर्ग सँ भेटैत छल। मिथिला मे कहावत अछि “माय-बाप सँ जीवन, दादा-दादी सँ संस्कार।”
संयुक्त परिवार महिला सभक सामाजिक-मानसिक सहारा होइत छल। प्रसव काल, बच्चा के पोसब, घरेलू दायित्व मे महिलाक बोझ बाँटल जाइत छल। विद्या अर्जन आऽ कर्मक लेल समय भेटैत छल।
सब सँ महत्त्वपूर्ण बात ई जे बुजुर्गक सम्मान आऽ अपेक्षा होइत छल कोनो उपेक्षा नहि। दैनन्दिन निर्णयन में बुजुर्गक राय अग्रगण्य होइत छल परिवारक “धुरी” धरोहर रूपेँ।
देखने छी बच्चा मे मिथिलाक संकट प्रबंधन बीमारी, आर्थिक हानि, विवाह, शिक्षा सब में पूरा परिवारक मदद उपलब्ध रहैत छल।
परन्तु आई काल्हि मे संयुक्त परिवार प्रथा पर किछु एहेन गहन लागल जे ओ विलुप्त होइत गेल या अजुक समय में कुहरि रहल अछि। सामाजिक आर्थिक बदलाव रूपेँ रोजगार, शहरिकरण, विदेश-प्रवासनक कारण एकल परिवारक दिस मैथिलक झुकाव बढ़ल। शिक्षा आऽ आधुनिकताक प्रभाव नव दृष्टि में निजता, स्वतंत्रता आऽ व्यक्तिगत स्पेस महत्व पाबए लागल। भूमिक विभाजन के कारण पीढ़ीगत हिस्सेदारी सँ बेसी परिवारक स्थायित्व कमजोर पड़ल। मूल्य-संघर्ष के कारण नब-पुरान सोच के बीच टकराव सँ परिवार छोट होमय लागल।
संतोषक बात ई जे तैयो मिथिला मे कतहु कतहु संयुक्त परिवार बिरलेक आइयो काल्हि देखल जाइत अछि मुदा नगन्य। जेकर कारण अछि मिथला में गाँव-केंद्रित सामाजिक संरचना।
ग्रामीण मिथिला मे आइयो खेती-बाड़ी कतहु कतहु साझा छैक। सांस्कृतिक मजबूती विवाह-मुण्डन, पाबनि-त्योहार, आऽ मरण-हरण-व्यवहार सब सामूहिक चलैत अछि।
भावनात्मक बंधन “हमर घर-आँगन, हमर गोत्र, हमर कुल” एहि सब भावना सँ परिवारिक एकता टिकैत अछि। आर्थिक हित खेती-पशुपालन मे संयुक्त श्रमक आवश्यकता छैक। सामाजिक मूल्य जेना बुजुर्गक सम्मान, परिवारक गरिमा ई सब अखनो मिथिलाक मन-मानस में गड़ल अछि।
भविष्यक दिशा के देखैत संयुक्त परिवारक ओ रूप तऽ नहि मुदा संयुक्त परिवारक पुनर्गठन अवश्य भेल अछि। मात्र ओकर रूप बदलि रहल अछि। आधुनिक मजबूरी के रहितो डिजिटल संपर्क सँ दूर रहितो परिवार जुड़ल अछि। साझा जिम्मेदारी, आर्थिक साझेदारी, धरोहर संरक्षण आऽ समन्वित जीवनशैली आधुनिक संयुक्त परिवारक रूप बनि रहल अछि।
मिथिला मे संयुक्त परिवार मात्र सामाजिक संरचना नहि, जीवनक दर्शन अछि जतय प्रेम, परंपरा, दायित्व, आऽ सम्मानक धार अविरल बहैत अछि। समय बदलल, परंतु मिथिला अपन पारिवारिक भावना के आइयो अपना हृदय में ज्यों-का-त्यों रखने अछि। जाहि कारण सँ मिथिलाक संस्कृति, सामूहिकता आऽ संतुलित जीवन दुनिया लेल आइयो एक प्रेरक मॉडल अछि।
हे परिवर्तनक भेलै काल, पर नेहक धार आबो झरै छै,
मिथिला परंपराक संग, परिवारक दीप सदिखन जरै छै।
