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विवाह कोनो खेल नै समृद्ध आऽ सार्थक परंपरा थीक

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दहेज मुक्त मिथिला

लेख विचार
प्रेषित: प्रिया झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- मैथिल विवाह मे जयमाल आ बाह्य आडंबर

विवाह सबसँ महत्वपूर्ण संस्कार अछि।
विवाह पहिने आ अखनो मैथिल समाज मे विवाह एकटा संस्कार के रूपमे देखल जाइत अछि। विवाह श्रेष्ठ प्रचलित संस्कार अछि जे समाज द्वारा सेहो तहिना मान्य अछि ।

विवाह परिवार के निर्माण करैत अछि आ दु परिवार के एक बनबैत अछि आ दुटा भिन्न विचार के लोक के एक बनबैत अछि । विवाह समाज के सेहो निर्माण करैत अछि। विवाह के मान्यता सँ परिवार आ परिवार सँ समाज के निर्माण होइत अछि।
आई कालि विवाह बाह्य आडंबर मे लिप्त अछि ।
विवाह कखनो आडंबर नञि मंगैत अछि बल्कि विवाह
साधारण रूप सँ निर्वाह करयबला एकटा संगठन अछि जकर निर्वाह सभके करय के प्रयत्न अवश्य करबाक चाही।
विवाह मे आडंबर नञि हेबाक चाही, इ संस्कृति अछि
समृद्ध परंपरा अछि । आ पहिलुक समय मे साधारणतया
विवाह मात्र संस्कृति सँ जुड़ल रहैत छल आडंबर के कोनो स्थान नञि रहय। विवाह मे देखावा आ दहेज केर कोनो स्थान नञि अछि आब विवाह मे शोर शराबा देखावा के स्थान भऽ गेल जे लोकक मानसिकता कें सेहो बदलि देलक आ विवाहक संस्कार गौण भऽ गेल ।
विवाह मे पहिने लाज धाक रहैत छल आब तऽ वर कनिया सभहक गप्प सप्प भऽ गेल रहैत छैक । बदलि गेल समय तऽ रहन सहन आ विवाहक रूप रेखा बदलि गेल ।
अहि वैवाहिक आडंबर मे सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक बदलाव जिम्मेदार अछि ।
लोक पाश्चात्य संस्कृति दिस आकर्षित भऽ गेल । पहिने सँ लोकक स्थिति मे सेहो सुधार भेल आ आधुनिकीकरण अकर मुख्य कारण भऽ गेल ।
वैवाहिक बाह्यआडंबर मे शिक्षा के सेहो मुख्य कारण अछि ।

 

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