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मिथिला शिथिला होयबाक मूल कारण की ?

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नामक खरखाँही लुटब प्रवीणक काज नहि

अपन मिथिला मे नामक खरखाँही (वाहवाही) लूटबाक एकटा बड पैघ बीमारी देखय मे आयल । से आइ स नहि, अपितु बाल्यकालहि सँ बहुते गोटा मे ई बीमारी देखायल । कतेक लोकक नजरि मे हमरो मे ई बीमारी होयबाक बुझय मे आयल हो त निश्चय हमरो मे ई बीमारी भ’ सकैत अछि, कारण इनारे मे भाँग घोरायल बेर इनारक जल पियनिहार हम सब छी आ एहि बीमारीक दुष्प्रभाव सँ हमर समाज सेहो बीमार भेल एना हमरा लगैत अछि ।

सौराठ सभागाछीक नाम सुनने छियैक अपने लोकनि ? जी, मधुबनी जिला मुख्यालय सँ मात्र ६ किलोमीटर पश्चमि-उत्तर दिशा मे मिथिलाक एकटा अति-प्रसिद्ध गाम पड़ैछ, जेकरा सौराठ (सौराष्ट्रक अपभ्रंश) कहल जाइत छैक । एहि गाम मे गुजरातक सौराष्ट्र मे विराजित ज्योतिर्लिंग सोमनाथक विग्रह प्राप्त भेल छल । खेत खनन समय अनचोकहि मे किसानद कोदारि लागि जेबाक कारण रक्तक धार बहि गेल छल । सपना मे सोमनाथक सन्देश-निर्देश सेहो भेटल छल । मुगलकालीन भारत मे हिन्दू धार्मिक आस्थाक परमपावन स्थल सोमनाथ पर बेर-बेर विधर्मी आक्रान्ताक आक्रमण सँ क्षोभित देवाधिदेव महादेव मिथिलाक एहि पवित्र गाम मे अपन प्रवासक विचार कय एना स्वतः अंकुरित महादेव रूप मे अभरलाह – तेँ सौराष्ट्रक प्रतिरूप बनल ई गाम आ आइ कहाइत अछि सौराठ ।

सौराठ, ससौला सहित कुल ४२ स्थान पर पंजीबद्ध मैथिल ब्राह्मण समुदायक बौद्धिक स्तरीय श्रेष्ठ लोक सब वैवाहिक सम्बन्ध निर्धारण हेतु सभावास करैत छलथि। वेद, वेदान्त, दर्शन व ज्ञानादिक संग कर्मकाण्डहु मे महान मिथिलाक ब्राह्मण समुदायक जीवन मे एक-एक टा व्यवहार वेदानुसार कहि सकैत छी । ब्राह्मण समुदायक विवाह मे गोत्र-भिन्नताक बाद ‘अधिकार निर्णय’ एक कठिन कार्य विधान वर्णित व्यवहार मे छल । पैतृक कुल दिश ७ पीढ़ी, मातृक कुल दिश ५ पीढ़ी मे सीधा रक्त सम्बन्ध नहि हो, तखनहि ओ वर एवं कन्याक विवाह कयल जा सकैत अछि – ई प्रमेय (थ्योरम) रहैक । एकर बाद पाँजि, कुल-मूल, चाइल-चलन, विध-व्यवहार आदि अबैछ ।

ई वैज्ञानिक प्रविधि सेहो मानल जाय लागल अछि आब, रक्त सम्बन्धक जाँच केँ विज्ञान पर्यन्त मान्यता दय रहल अछि । आनुवांशिकताक सिद्धान्त आ ग्रेगर मेंडलक मटर दाना पर प्रयोग उपरान्त एहि सिद्धान्तक प्रतिपादन रूप मे, डीएनए व जीन आदिक तौर पर आधुनिक विज्ञान मिथिलाक पुरखाजन द्वारा अपनायल प्रक्रिया केँ बहुत हद तक समर्थन दैत अछि जे सीधा रक्त सम्बन्ध मेने सन्तानोत्पत्ति एवं सन्तानक गुण-धर्म, लक्षण, शारीरिक निर्माण संग मस्तिष्क एवं बौद्धिक चेतना आदिक निर्माण मे विकृतिक स्थिति आबि सकैछ ।

यैह अधिकार निर्णय वास्ते सभावास एवं पंजिकार लोकनिक पंजी पुस्तिका व कुल-मूलक विवरण सहित लगभग १० दिनक दरम्यान मैथिल ब्राह्मण समुदायक विभिन्न गाम-ठाम सँ लोक सब सहभागी बनथि आ तदोपरान्त अधिकार तय भेलाक बाद ‘सिद्धान्त लेखन’ हो, कुलदेवता समक्ष सिद्धान्त राखि आशीर्वादक याचना, पुनः बाबा-पुरखा लोकनिक गीत गबैत, ब्रह्मरूप ब्राह्मण बाबूक गीत गबैत, वैवाहिक सम्बन्ध केँ इजोत मे आनैत विवाह लेल तैयार भेल दम्पत्तिक प्रबोधन हेतु गीत गबैत – मनोरंजन लेल हँसी-चौल आ सम्बन्धक मिठासक मिश्री घोरयवला गीत गबैत – बिना कोनो तामझाम आ देखाबा कएने अत्यन्त साधारण ढंग सँ विवाह सम्पन्न होइत छल ।

षोडश मातृका पूजा, आभ्युदयिक श्राद्ध सँ पितरक तुष्टि, नवग्रहादिक कृपायाचना, अग्निदेवताक आह्वान, समुचित वैदिक मंत्रोच्चारणक संग शपथपूर्वक दुइ प्राणी केँ एक सूत्र (परिणय) मे बाँधल जाइत छल । वेदांग ज्योतिष अनुसार समस्त ग्रह एवं देवतादिक अनुकूलता लेल तेहने वेदी, हवनकुंड, अहिपन, कोहबर, मंडप, जनवासा आदिक निर्माण कयल जाइत रहल छल ।

मुदा आब…… ???

जनैत छी, ई सारा के सारा झूठक नाम केर खरखाँही लूटबाक चक्कर मे नष्टनाबूद भए गेल अछि ।

सौराठ सभागाछी मे नामक खरखाँही लूटबाक कुचक्र भारतक स्वतंत्रता उपरान्त कथित कम्यूनिष्ट आन्दोलन आ वर सब केँ धर-पकड़ आ जबर्दस्ती विवाह करा, पंजीकार व दुतीकार सभक धरकट्टी-बयमानी, अनेकों भाट सभक गलत भाटगिरी आ लोक सब केँ ठकबाक स्थिति – आइ सभावासक परम्परे केँ समाप्त कय देलक ।

दहेजक विरोध केर नाम पर खरखाँही लूटय लेल कतेको युवा, जननेता, अभिनेता, पत्रकार, फिल्मकार, कलाकार, गीतकार – सब कियो ‘सौराठ सभा’ पर विष उगलैत रहलाह । ब्राह्मणक एकटा महत्वपूर्ण संस्था, परम्परा आ प्रामाणिक सुकार्यक सुन्दर उपक्रम चौपट बना देल गेल ।

आध्यात्मिकता ठाम पर भौतिकता हावी अछि ब्राह्मण समाज पर । बिगड़ि रहल अछि पुस्त-पीढ़ी । नहि रहि गेल कोनो सीमा आ मर्यादा आब । कैमरामैन आ अपारम्परिक फिल्मी विध-व्यवहार सब राज कय रहल अछि वर्तमान ‘ब्राह्मण बाबू’ सभक परिवार मे । माय-बहिन काकी संग दीदी-बहिन आ बाबू-बेटा आदिक ‘डिस्को-८२’ वर्सन नहि अपितु ‘भाँगड़ा २०२५’ केर वर्सन पर लन्डनवाली लौन्डिया सब राति भरि नाच करैछ । माय कयलक कुटन-पिसन बेटाक नाम दुर्गादत्त – फटक्का आ आतिशबाजी संगहि रंग-बिरंगक ड्रेस कोड पर विवाह इवेन्ट पूरा होइछ ।

आब त मैथिली गीतो नहि गबैछ । केकरो एबो नहि करैत छैक बेसीतर । विधो व्यवहारक स्वरूप बदलि गेल अछि । चतुर्थी, अनोना, मौहक, आम-महुआ ब्याह, उख्खैड़ मे धान कूटनाय – ई सारा चीज आब असान्दर्भिक भ’ गेल । मुदा प्रि-वेडिंग शूट, वेडिंग इवेन्ट मे हरैद, मेंहदी, संगीत एवं लफासोटिंग वला दिखाबटी विध सब, वरमाला, सार सब बहिन केँ एना छतरी तर मे वरमालाक स्टेज तक आनत… दूल्हा ओंगी – दुल्हाक बाप पोंगी…. हमर त बुझू माथे चकरा जाइछ ई नवका विध आ व्यवहार सब देखिकय । भविष्यक सन्तति सब केहेन जन्म लेत, नहि कहि सकैत छी ।

ई सारा बात झूठक खरखाँही लूटबाक कारण भेल अछि । एहि बीमारीक इलाज सम्भवो छैक अथवा नहि, हमरा त अबूह बुझाइत अछि । जँ किनको पास इलाजक इल्म हो त कृपया साझा करी ।

हरिः हरः!!

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